Sunday, May 3, 2015

शहीदों की याद दिलाता खड़की वार सिमेट्री

हम मंदिर मसजिद तो हर शहर में देखते हैं। पर कभी उन सैकड़ों हजारों अनाम फौजियों को भी याद कर लें तो देश के नाम पर शहीद हो गए। जिनके बदौलत किसी देश को आजादी मिलती है। जिनकी बदौलत सीमाएं महफूज रहती हैं।  

पुणे - कॉमनवेल्थ वार सिमेट्री। 
पुणे शहर से मुंबई जाने के रास्ते में खड़की वार सिमेट्री दिखाई देती है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान मारे गए 1668 सैनिकों की समाधि है खड़की वार मेमोरियल में। इसकी देखभाल कामनवेल्थ वार मेमोरियल करता है। यहां पश्चिम और केंद्रीय भारत में मारे गए सैनिकों की समाधि है। इस तरह की समाधि कोहिमा, इंफाल, रांची जैसे शहरों में भी है। यहां 629 सैनिक पहले विश्वयुद्ध के फौजियों की भी कब्रें हैं। वार सिमेट्री का निर्माण सड़क से 4 मीटर गहराई में किया गया। पूणे से मुंबई जाते समय खड़की कैंटोनमेंट एरिया मे ये वार सिमेट्री स्थित है।
इस तरह की समाधि नागालैंड के कोहिमा, मणिपुर के इंफाल और झारखंड के रांची जैसे शहरों में भी है। पुणे के वार मेमोरियल में  629 सैनिकों की कब्र है जो पहले विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हो गए थे।  वार सिमेट्री का निर्माण सड़क से 4 मीटर गहराई में किया गया है। पूणे से मुंबई जाते समय खड़की कैंटोनमेंट एरिया मे ये वार सिमेट्री स्थित है। दुनिया के कई देशों में इस तरह का वार मेमोरियल बनाया गया है। ज्यादातर वार मेमोरियल बहुत ही बेहतरीन रखरखाव में दिखाई देते हैं। मैंने इससे पहले कोहिमा, इंफाल के वार मेमोरियल देखे थे। अब पुणे का देख रहा हूं। सवाल यह नहीं है कि वे फौजी कौन थे। किसके लिए लड़े। सबसे बड़ी बात ये है कि एक  फौजी अपने देश के लिए लड़ता है। हमें उन्हे बेहतर  तरीके से याद तो करना ही चाहिए। प्रसिद्ध कवि माखन लाल चतुर्वेदी की कविता पुष्प की अभिलाषा की ये पंक्ति बरबस याद आती हैं।
मुझे तोड़ लेना वनमाली , देना उस पथ में फेंक।
राष्ट्र निर्माण के लिए जिस पथ जाएं वीर अनेक।    

...तो उन अनाम फौजियों को मन ही मन नमन करके हम अपने आगे के सफर पर चल पड़ते हैं। 


-  vidyutp@gmail.com
(PUNE, MAHARASTRA, WAR MEMORIAL) 

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