Sunday, May 31, 2015

लिंगराज मंदिर - अद्भुत रचना, सौंदर्य और शोभा का संगम

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है लिंगराज मंदिर। यह इस शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। उत्तर भारत में प्रसिद्ध मन्दिर रचना, सौंदर्य और शोभा और अलंकरण की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह कलिंग वास्तुकला का सुंदर नमूना है। लिंगराज मन्दिर में प्रत्येक शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला का चमत्कार देखने को मिलता है। मुख्य मंदिर में आठ फीट मोटा और करीब एक फीट ऊंचा ग्रेनाइट पत्थर का स्वयंभू शिव लिंग स्थित है।
तीनों लोकों के स्वामी भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1090 से 1104 के मध्य में बना है। इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा जजाति केशरि ने 11वीं सदी में करवाया था। उसने तभी अपनी राजधानी को जाजपुर से भुवनेश्वर में स्थानांतरिक किया था। मंदिर का प्रांगण 150 मीटर वर्गाकार रुप में है। मंदिर के कलश की ऊंचाई 54 मीटर है। मंदिर के कुछ हिस्से 1400 वर्ष से भी ज्यादा पुराने हैं। इस मंदिर का वर्णन छठी शताब्दी के लेखों में भी आता है। यह भुवनेश्वर का मुख्य मन्दिर हैजिसे ललाटेडु केशरी ने 617-657 ई. में बनवाया था। लिट्टी तथा वसा नाम के दो भयंकर राक्षसों का वध देवी पार्वती ने यहीं पर किया था। संग्राम के बाद पार्वती जी को प्यास लगीतो शिवजी ने कूप बनाकर सभी पवित्र नदियों को योगदान के लिए बुलाया। यहीं पर बिन्दूसागर सरोवर है। बिंदुसागर सरोवर में भारत के प्रत्येक झरने तथा तालाब का जल संग्रहित है। कहा जाता है कि इसमें स्नान से पाप का नाश होता है।

पूजा पद्धति – लिंगराज आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले बिन्दुसरोवर में स्नान करते हैं। फिर क्षेत्रपति अनंत वासुदेव के दर्शन किए जाते हैंजिनका निर्माणकाल नवीं से दसवीं सदी का है।। गणेश पूजा के बाद गोपालनी देवीफिर शिवजी के वाहन नंदी की पूजा के बाद लिंगराज के दर्शन के लिए मुख्य द्वार में प्रवेश करते हैं। हर साल अप्रैल महीने में यहां रथयात्रा का आयोजन होता है। मंदिर सुबह साढे छह बजे खुलता है। गैर-हिंदू को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है।


कैसे पहुंचे – मंदिर भुवनेश्वर को ओल्ड टाउन में स्थित है। रेलवे स्टेशन से दूरी 5 किलोमीटर है। बस स्टैंड से भी दूरी 5 किलोमीटर है। भुवनेश्वर पुरी मार्ग से मंदिर आधे किलोमीटर की दूरी पर है। आप मंदिर पहुंचने के लिए सिटी बस का सहारा ले सकते हैं या फिर आटोरिक्शा भी कर सकते हैं।
हमने 1991 में पूरे परिवार के साथ भुवनेश्वर की यात्रा की थी।इस दौरान हमारे गाइड ने हमें बताया कि भुवनेश्वर शहर में 500 छोटे बड़े मंदिर हैं। यह भी कहा जाता है कि इस क्षेत्र में कभी 7000 मंदिर थे। यह एक तरह से छोटी काशी है। मंदिरों के कारण भुवनेश्वर को देवताओं का घर भी कहा जाता है। पुरी से आने वाली पर्यटक बसें भी लोगों को लिंगराज मंदिर लेकर आती हैं।

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