Friday, May 15, 2015

मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे यानी रफ्तार का आनंद

देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक शहर पुणे को जोड़ता है मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे। ये देश का पहला एक्सप्रेस वे है। इसके चालू होने के बाद मुंबई और पुणे का सफर सुहाना हो गया साथ ही समय की भी काफी बचत होने लगी। 

अपनी गाड़ी हो तो आप डेढ़ घंटे में मुंबई से पुणे पहुंच सकते हैं। हमें पुणे से मुंबई की ओर इस एक्सप्रेस पर सफर का मौका मिला 2015 के अप्रैल में। शानदार सड़क और आसपास में दिलकश नजारे। कब पुणे से मुंबई पहुंच गए पता भी नही चलता। 
आधिकारिक तौर पर यह 'यशवंतराव चौहान मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे' के रूप में जाना जाता है। अगर बारिश का मौसम हो तब मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे पर ड्राइविंग बहुत बहुत खूबसूरत अनुभव है। दोनों तरफ पर पहाड़ों के साथ सुंदर नजारों के एक नए पुणे को देखा जा सकता है।

देश का पहला तीव्रगामी मार्ग - महाराष्ट्र सरकार द्वारा सबसे महत्वाकांक्षी परिवहन परियोजना 'मुंबई - पुणे एक्सप्रेस वे' 5 अप्रैल 2000 को यातायात के लिए खोला गया था। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार से पर्यावरणीय मंजूरी अक्तूबर 1997 में प्राप्त की गई थी। नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए 'मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे' और 55 फ्लाई ओवर बनाकर मुंबई  को एशिया के प्रमुख शहरों के मुकाबले में खड़ा किया। इसका श्रेय उन्हें मिलता है।

सफर का समय हुआ आधा - पुराने समय में मुंबईसे पुणे सफर करने के मुकाबले एक्सप्रेस वे से 2 घंटे में आप मंजिल तक पहुंच जाते हैं। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग 4 से जाने पर 4-5 घंटे का समय लग जाता है। इस तरह दो महत्त्वपूर्ण शहरों के बीच यात्रा के समय में काफ़ी बचत हो जाती है। एक्सप्रेस वे के दोनों ओर कई जगह बाड़ लगाई है ताकि जंगल के जानवर वाहनों की गति में कोई बाधा पैदा न करें। इस एक्सप्रेस वे पर दो पहिया वाहन, तिपहिया और ट्रैक्टर की अनुमति नहीं है। जगह-जगह पेट्रोल पंप, ढाबे,  शौचालय, आपातकालीन फोन, प्राथमिक चिकित्सा, सीसी टीवी आदि के इंतजाम हैं। मुंबई और पुणे के बीच रास्ते में तीन टोल पड़ते हैं। मुंबई के पास पनवेल में ये एक्सप्रेस वे खत्म हो जाता है और आप मुंबई में प्रवेश कर जाते हैं।

कोंकण रेल कारपोरेशन ने बनवाई सुंरगे –  मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे में कई सुरंगे भी आती हैं। ये सुंरगे ऊंचे पहाड़ों के अंदर से निकलती हैं। इन सुंरगों के निर्माण में कोंकण रेल कारपोरेशन की भूमिका है। रास्त में कुल पांच सुरंगे हैं जिनका कुल दूरी साढ़े पांच किलोमीटर की है। इनके निर्माण में 200 करोड़ रुपये खर्च आया था। इन सुरंगों में रोशनी का इंतजाम किया गया है साथ ही हवा का भी इंतजाम है। कोंकण रेल के लिए सुंरगे बनाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल हुआ उसका लाभ मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे को मिला।
-vidyutp@gmail.com
( MUMBAI PUNE EXPRESS WAY ) 


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