Wednesday, April 29, 2015

ओझर के विघ्नहर गणपति (अष्टविनायक)

महाराष्ट्र के अष्ट विनायक मंदिर में सबसे लोकप्रिय मंदिरों में है ओझर के गणपति। इन्हें विघ्नहर के नाम से पुकारा जाता है। ये मंदिर ककड़ी नदी के सुरम्य तट पर स्थित है। मंदिर के आसपास सालों भर मेले जैसा माहौल बना रहता है। पहले ओझर जाना हमारी सूची में नहीं था,पर हमारे एसयूवी के ड्राईवर साहब आखिरी पड़ाव में हमें यहां लेकर आ गए।

ओझर के विघ्नहर गणपति का मंदिर का सभागृह 10 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा है। जबकि सभागृह 20 फीट लंबा है। अन्य मंदिरों की तरह यहां भी विघ्नेश्वर का मंदिर भी पूर्वमुखी है। 

यहां एक दीपमाला भी है जिसके पास द्वारपाल खड़े हैं। विघ्नेश्वर की मूर्ति पूर्वमुखी है और साथ ही साथ सिन्दूर औए तेल से संलेपित है। इनकी आंखों और नाभि में हीरा जड़ा है जो गणपति को और भी सुंदर बनाता है। मूर्ति के पीछे रिद्धी और सिद्धी की मूर्तियां देखी जा सकती हैं। ये मंदिर 1833 का बना हुआ है।

कथा - मंदिरों की तरह इस मंदिर के पीछे भी एक मनोरंजक पौराणिक कथा है। कहा जाता है राजा अभिनंदन ने त्रिलोक का राजा होने के लिए यज्ञ शुरू किया। इस दौरान विध्नासुर राक्षस काफी उत्पात मचा रहा था। ऋषि मुनियों ने विघ्नासुर के वध के लिए तब गणेश जी से विनती की। विध्नासुर डर कर गणपति के शरण में गया और उसने अपनी हार मानते हुए आग्रह किया कि यहां जब आपकी पूजा हो तो आपके साथ मेरा भी नाम लिया जाए। 1785 में इस मंदिर में चिमाजी अप्पा ने सोने का कलश चढ़वाया।
नारियल फोड़ने के लिए बिजली से चलने वाली मशीन
मंदिर परिसर में पूजा के लिए हाइटेक इंतजाम है। पहली  बार मैंने यहां नारियल फोड़ने के लिए बिजली से चलने वाली मशीन देखी। ये मशीन मंदिर के पीछे परिक्रमा मार्ग पर लगाई गई है। मंदिर के आसपास छोटा सा सुंदर बाजार भी है। यहां खाने पीने की अच्छी  दुकाने हैं। आप महाराष्ट्रियन थाली के अलावा दक्षिण भारतीय व्यंजन का भी आनंद ले सकते हैं।

रहने का सुंदर इंतजाम - ओझर में श्रद्धालुओं के रहने का सुंदर इंतजाम है। यहां एक समय में 3000 लोगों के रहने का इंतजाम किया गया है। सबसे कम महज 35 रुपये में श्रद्धालु डारमेटरी सिस्टम में ठहर सकते हैं। वहीं 250 से लेकर 350 रुपये में आप डबल बेड के बेहतर कमरों में ठहर सकते हैं।

महा प्रसाद योजना -  मंदिर ट्रस्ट की ओर से रियायती दर पर प्रसाद ( भोजन) का भी इंतजाम है। ये योजना 2004 से चल रही है।इसका समय – 10 से 1 शाम 7.30 से 10.30 तक है। आने वाले श्रद्धालु इसका लाभ उठा सकते हैं।

अष्ट विनायक के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु के रात्रि ओझर में विश्राम जरूर करते हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु रंग बिरंगे सजे हुए वाहन में यहां पहुंचते हैं। ऐसा ही बिजली से झालरों से सजा हुआ एक बस हमें यहां मंदिर परिसर में दिखाई दिया। मंदिर के बगल में बहने वाली नदी सुंदर जलाशय का निर्माण करती है। इस जलाशय के निर्मल जल में बोटिंग का भी इंतजाम है।

कैसे पहुंचे -  ओझर पुणे जिले की जुन्नर तहसील में पड़ता है। ये मंदिर ककड़ी नदी के मनोरम तट के किनारे स्थित है। नासिक रोड पर जुन्नर से पहले नारायण गांव से ओझर की दूरी 12 किलोमीटर है। नारायण गांव या जुन्नर तक बस से पहुंचे। वहां से निजी ये शेयरिंग वाहनों से ओझर पहुंचा जा सकता है।  ओझर अष्ट विनायक मंदिर की वेबसाइट -  http://shrivighnaharganpatiozar.org/home.html

http://www.varadvinayak.com/Ashtavinayak_Temples_Vigneshwar_Ozhar.aspx
 
ओझर में ककड़ी नदी का किनारा। 

( OZHAR, GANPATI, VIGHNAHAR ) 

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