Saturday, May 16, 2015

शिव की अनूठी मूर्ति देखिए एलीफैंटा में

मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एलीफैंटा की गुफाएं दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। एलीफैंटा की गुफाएं मुम्‍बई महानगर के पास होने के कारण पर्यटकों के लिए बड़े आकर्षण केन्‍द्र हैं।

 एलीफैंटा हिंदू और बौद्ध गुफाओं का संगम है। अरब सागर के टापू पर स्थित एलिफेंटा में कुल सात गुफाएं हैं जिनमे पांच हिन्दू और दो बौद्ध हैं। एलीफैंटा की सबसे महत्वपूर्ण शिव की त्रिमूर्ति है। एलीफैंटा महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के उरण तालुका में पहाड़ियों पर स्थित है। इस गुफा संकुल को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत का दर्जा 1987 में दिया गया।

एलिफैंटा में शिव के तीन सिरों वाली प्रतिमा। 
इसका एलीफैंटा नाम पुर्तगालियों द्वारा यहां पर बने पत्थर के हाथी के कारण दिया गया था। यहां हिन्दू धर्म के अनेक देवी देवताओं कि मूर्तियाँ हैं। ये मंदिर पहाड़ियों को काटकर बनाए गए हैं। यहां भगवान शंकर की नौ बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं। किंवदंतियों के अनुसार जिसका कालखंड महाभारत काल तक आंका गया है ।

अनूठे महादेव -  यहां शिव की कई मूर्तियां नृत्य मुद्रा में है। एलीफैंटा का पुराना नाम घारापुरी था। यह कोंकणी मौर्य की द्वीप राजधानी थी। यह तीन शीर्ष वाली महेश यानी शिव की मूर्ति की भव्‍यता के लिए भी जाना जाता है, इसमें से प्रत्‍येक में एक अलग रूप नजर आता है।  गुफा में बने भगवान शिव को समर्पित मंदिर को राष्‍ट्रकूट राजाओं द्वारा लगभग आठवीं शताब्‍दी के आसपास खोज कर निकाला गया था।

राष्ट्रकूट राजाओं ने 757 ईश्वी से  973 ईश्वी के बीच इस क्षेत्र पर राज्‍य किया।एलिफेंटा की गुफाएं सात गुफाओं में से सबसे महत्‍वपूर्ण मानी जाती है महेश मूर्ति गुफा। गुफा के मुख्‍य हिस्‍से में पोर्टिकों के अलावा तीन ओर से खुले सिरे हैं और इसके पिछली ओर 27 मीटर का चौकोर स्‍थान है और इसे 6 खम्‍भों की कतार से सहारा दिया जाता है। गुफा के बाहर द्वार पाल की विशाल मूर्तियां भी अत्‍यंत प्रभावशाली हैं। इस गुफा में शिल्‍प कला के कक्षो में अर्धनारीश्‍वर, कल्‍याण सुंदर शिव, रावण द्वारा कैलाश पर्वत को ले जाने, अंधकारी मूर्ति और नटराज शिव की छवियां भी दिखाई गई हैं।

कैसे पहुंचे - एलीफैंटा द्वीप महाराष्‍ट्र राज्‍य के मुम्‍बई में गेटवे ऑफ इंडिया से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गेटवे आफ इंडिया से एलीफैंटा के लिए स्टीमर सेवा चलती है। इसका जाने और आने का किराया 180 रुपये प्रति व्यक्ति है। स्टीमर एक घंटे समय लगाती है। ( साल 2016 का किराया) 

 समुद्र में ये सफर बड़ा ही रोमांचकारी होता है। धीरे आप अरब सागर में मुंबसे दूर चलते जाते हैं। इसी तरह वापसी में भी काफी आनंद आता है जब आप गेट वे आफ इंडिया की ओर आ रहे होते हैं। एलीफैंटा टापू पर पहुंचने के बाद समुद्र तट से गुफा तक जाने के लिए टाय ट्रेन सेवा चलाई गई है। आप इसका आनंद ले सकते हैं या फिर पैदल भी जा सकते हैं।
बंदी का दिन - हर सोमवार को एलिफैंटा की गुफाएं बंद रहती है।


2 comments:

  1. एलीफैंटा में शिव की अनूठी मूर्ति के बारे में जानकारी प्रस्तुति हेतु धन्यवाद। .
    जय शिव शंकर भोले नाथ

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    1. कविता जी धन्यवाद

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