Thursday, May 7, 2015

शिवनेरी - यहां हुआ था शिवाजी का जन्म

हमलोग भीमाशंकर के बाद पहुंचे हैं शिवनेरी किले में। यह किला महान योद्धा शिवाजी से जुड़ा हुआ है। छत्रपति शिवाजी यानी महाप्रतापी हिंदू सम्राट। शिवाजी का जन्म हुआ था महाराष्ट्र के शिवनेरी के किले में। शिवाजी के पिता शाहू जी महाराज बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह की फौज में जनरल थे। उन्हें हमेशा युद्ध पर रहना पड़ता था, लिहाजा उन्होंने गर्भ के दौरान अपनी पत्नी जीजाबाई को सुरक्षित स्थल पर रखने का इंतजाम किया।  इसके लिए सबसे मुफीद जगह शिवनेरी का किला था। यहां पर शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को हुआ। एक ऐसा प्रतापी सम्राट जिसने अपने जीवन काल में दक्षिण पश्चिम भारत के 40 किलों को जीता।

कहा जाता है कि शाहू जी महाराज ने शिवनेरी के किले मे सात दरवाजों का निर्माण कराया। शिवनेरी के किले में ही शिवाजी का बचपन गुजरा। किले के अंदर ही खेलते कूदते शिवाजी बड़े हुए। अपने जीवन का जो भी सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान था उन्होंने यहीं पर प्राप्त किया। 

अपनी माताजी से और अपने प्रशिक्षकों से। किले के अंदर शिवाई देवी का मंदिर है। इस देवी के नाम पर शिवाजी का नाम बचपन में शिवाबा रखा गया। किले के मध्य में एक तालाब है जिसका नाम बादामी तालाब है। किले के  मध्य में अंबरखाना नामक जगह है जहां कभी अनाज का भंडार हुआ करता था।

किले का इंतजाम महाराष्ट्र पर्यटन देखता है। किले के अंदर जगह जगह हरियाली से भरे उद्यान बनाए गए हैं। मार्ग में पेयजल का इंतजाम किया गया है। किले के अंदर गर्मी में आपको नींबू पानी बेचने वाले भी मिल जाएंगे। पर किले पर चढ़ाई का मार्ग आसान नहीं है। कहीं सीढ़ियां तो कहीं उबड़ खाबड़ रास्ते। सबसे ऊपरी स्थान पर पहुंचने का रास्ता थोड़ा मुश्किल भरा है। यहां तक पहुंचते हुए समान्य आदमी की सांसे फूलने लगती हैं। 

 पुणे शहर से 85 किलोमीटर दूर इस किले की ऊंचाई 300 मीटर है। किला एक त्रिकोणात्म पहाड़ी पर स्थित है। किले में सुरक्षा के लिए सात दरवाजे बनाए गए हैं। इन द्वारों के नाम देखिए- हत्ती दरवाजा, गणेश दरवाजा, पिराचा दरवाजा, मैणा दरवाजा आदि। पांचवे दरवाजे में हाथियों को रोकने के लिए नुकीली कीलें लगाई गई हैं। किले के अंदर दो तालाब हैं जिनके नाम गंगा और यमुना हैं। हालांकि किले में अब कुछ ही इमारतें बची हैं। एक अस्तबल और टूटी फूटी मस्जिद देखी जा सकती है। पर किले को देखकर ये अंदाजा लगाया जा सकता है, कि ये इमारत कभी कितनी सुरक्षित और बुलंद रही होगी।

कभी ये किला सातवाहन राजाओं के अधीन था। शिवनेरी पहली से तीसरी शताब्दी के दौरान बड़ा बौद्ध केंद्र  था। शिवनेरी के तीनों तरफ पहाड़ में गुफाओं के अवशेष मिलते हैं। सातवहान के बाद ये किला यादव (शीलाहर्ष) और बहमनी और  मुगलों के अधीन रहा। 1599 में किला शिवाजी के दादा मालोजी भोसलें को दिया गया। शिवाजी को अपने शासन काल के दौरान ये किला मुगलों को दे देना पड़ा, जिसे वे अपने जीवन में वापस नहीं ले सके।

कैसे पहुंचे – शिवनेरी पहुंचने के लिए पुणे से बस या अपने वाहन द्वारा जुन्नर पहुंचे। शिवनेरी का किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में जुन्नर कस्बे से दो किलोमीटर की दूरी पर है।

किले के मुख्य द्वार के पास वाहन पार्क करके आप किले पर चढाई कर सकते हैं। शिवनेरी के विशाल किले में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है, पर सभी आगंतुकों के नाम पते दर्ज किए जाते हैं। यह किला महाराष्ट्र के राज्य सरकार के पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित है। जिन लोगों की इतिहास में रुचि है और ट्रैकिंग के शौकीन हैं उन्हें यहां आकर जरूर मजा आएगा। किले के अंदर खाने पीने को कुछ नहीं मिलता। अपना पानी और कुछ पेट पूजा की सामग्री साथ रखें तो अच्छा रहेगा। 
शिवनेरी - शिवाजी का किला । 


( SHIVNERI, SHIVAJEE, PUNE, MANCHAR ) 


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