Tuesday, April 14, 2015

गीत गाया पत्थरों ने - अजंता


यहां पत्थरों में सुनाई देता है संगीत। अनवरत संगीत। प्राणों को झंकृत कर देने वाला संगीत। जो अन्यत्र दुर्लभ है। सैकड़ो साल हजारों कलाकारों की अनवरत तपस्या की परिणति है अजंता की गुफाएं।

अजंता की गुफाओं में बनी कलाकृतियों में हजारों शिल्पियों के श्रम और साधना को महसूस किया जा सकता है। यहां पत्थरों से निकलने वाले संगीत को तो यहां पहुंचकर ही महसूस किया जा सकता है। तभी तो अजंता की गुफाएं विश्व के सर्वश्रेष्ठ दर्शनीय स्थलों में एक हैं। दुनिया भर से लाखों सैलानी हर साल अजंता की गुफाओं में शांति
, आध्यात्म और ज्ञान की तलाश में पहुंचते हैं।आप जिस नजरिए से भी देखें आपको कुछ अदभुत दिखाई देगा यहां....  




काफी लोग ताजमहल को देखकर अद्भुत कहते हैं, पर अजंता की गुफाओं को देखने के बाद ये लगता है कि देश का दुनिया में ऐसी नायाब कृति कहीं नहीं हो सकती। वर्गुना नदी के तीन तरफ पहाड़ों की 20 मीटर गहराई तक काट कर गुफाएं बनाई गई हैं जिसमें गौतम बुद्ध का जीवन दर्शन कलाकृतियों और मूर्ति शिल्प में उतारा गया है। ऐसा लगता है मानो पत्थर गीत गा रहे हों। सारी गुफाएं देखते देखते आप आनंदित होते हैं, रोमांचित होते हैं, अचरज करते हैं, कब शाम ढलने लगती है पता भी नहीं चलता। अजंता की 30 गुफाओं का निर्माण पहली शताब्दी से सातवीं शताब्दी के बीच हुआ है। सह्याद्रि की पहाडि़यों पर स्थित इन 30 गुफाओं में लगभग 5 प्रार्थना भवन और 25 बौद्ध मठ हैं। 1819 से पहले ये गुफाएं सैकड़ो साल तक लोगों की नजरों से ओझल रही हैं।

इन गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ व उनके दल द्वारा सन् 1819 में की गई थी। वे यहाँ शिकार करने आए थे, तभी उन्हें कतारबद्ध 29 गुफाओं की एक शृंखला नज़र आई और इस तरह ये गुफाएँ प्रसिद्ध हो गई। घोड़े की नाल के आकार में निर्मित ये गुफाएं अत्यन्त ही प्राचीन व ऐतिहासिक महत्त्व की है।


अजंता - गुफा नंबर 21 के इन स्तंभों पर थपकी देने से निकलता है संगीत। 

गीत गाया पत्थरों ने  इऩ गुफाओं का इस्तेमाल भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का अध्‍ययन करने के लिए किया जाता था। एक गुफा ऐसी है जिसके स्तंभ को थपकाने पर संगीत की धुन निकलती है। गुफाओं की दीवारों तथा छतों पर बनाई गई ये तस्‍वीरें भगवान बुद्ध के जीवन की विभिन्‍न घटनाओं और विभिन्‍न बौद्ध देवत्‍व की घटनाओं का चित्रण करती हैं। इसमें से सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण चित्रों में जातक कथाएं हैं, जो बोधिसत्व के रूप में बुद्ध के पिछले जन्‍म से संबंधित विविध कहानियों का चित्रण करते हैं। यूनेस्‍को द्वारा 1983 में अजंता को विश्‍व विरासत स्‍थल घोषित किया गया। यह देश का पहला विश्व विरासत स्थल है।

कैसे पहुंचे  औरंगाबाद से अजंता की दूरी 110 किलोमीटर है। औरंगाबाद सेंट्रल बस स्टैंड से नियमित तौर पर जलगांव की तरफ जाने वाली बसें अजंता में रूकती हैं। पर अगर आपको सिर्फ अजंता जाना हो तो जलगांव में रूक कर भी जा सकते हैं। जलगांव से अजंता की दूरी महज 65 किलोमीटर है। अजंता की गुफाओं से पहले अजंता नामक एक गांव आता है। यहां पर एक दो गेस्ट हाउस बने हैं। इस गांव में भी एक किला नजर आता है।


बारिश में जाएं आनंद आएगा  बारिश के दिनों में अजंता का सौंदर्य बढ़ जाता है। आसपास के पहाड़ों से लगातार झरने बह रहे होते हैं। पहाड़ों की हरियाली कई गुना बढ़ जाती है। आप अपने साथ छाता रखें। गुफा के अंदर तो वैसे भी बारिश से बचाव होगा। बाहर का नजारा नयनाभिराम होगा।
अजंता के प्रवेश द्वार के पास सड़क पर कोई मार्क नहीं बना हुआ है। पर जलगांव औरंगाबाद के बीच चलने वाली बसें यहां रूक जाती हैं। गुफा का स्वागत कक्ष शानदार बना है। यहां पर 15 रुपये का शुल्क देना पड़ता है। यहां एक छोटा सा सुंदर सा बाजार है। जहां खाने पीने और उपहार खरीदने की सुविधा है। इस बाजार को पार करने के बाद एक बस स्टैंड आता है। यहां से अजंता के दूसरे प्रवेश द्वार के लिए बसें चलती हैं। 4 किलोमीटर की दूरी का किराया 15 रुपये है। एसी बस का किराया 20 रुपये है। मुख्य द्वार पर दुबारा प्रवेश का टिकट खरीदना पड़ता है। भारतीय लोगों का टिकट 10 रुपये का है। समूह में 5 रुपये का लाइटिंग का टिकट अलग से लेना पड़ता है। गुफाओं के बीच में जगह जगह पेयजल का इंतजाम किया गया है। 
vidyutp@gmail.com
अजंता में बुद्ध। 
अजंता में एमटीडीसी का रेस्टोरेंट 

तो लो हम पहुंच गए हैं अजंता....

     
चलते चलते कुछ खरीददारी हो जाए....

 आगे पढ़िए - अजंता - 26 गुफाओं में गौतम बुद्ध के दर्शन 


   ( AJANTA, AURANGABAD, BUDDHA, CAVES, WORLD HERITAGE SITE)  


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