Sunday, May 3, 2015

माथेरन में चलता है कोलकाता की तरह हाथ रिक्शा

पूरे देश में सिर्फ कोलकाता ऐसा शहर है जहां हाथ रिक्शा चलता है। पर दूसरा शहर है माथेरन जहां इस तरह का रिक्शा संचालन में है। ऐसे रिक्शा में दो पहिए होते हैं। तीसरे पहिए की जगह एक इंसान इस रिक्शा को लेकर दौड़ता है। चूंकि माथेरन में कोई डीजल वाहन नहीं चलता इसलिए जो लोग पैदल नहीं चल सकते उनके लिए हाथ रिक्शा या घोड़ा विकल्प है।

वास्तव में माथेरन में घूमने के तरीके तीन हैं। घोडे सेहाथ रिक्शा से या फिर पैदल। माथेरन में 450 घोड़े संचालन में हैं और 94 हाथ रिक्शा को लाइसेंस मिला हुआ है। कोलकाता के बाद माथेरन वह दूसरा शहर है जहां आदमी रिक्शा लेकर दौड़ता है। पर हमने माथेरन में पैदल ट्रैक करना तय किया। यहां सुनने में आया कि एक विदेशी सैलानी लड़की कुछ दिन पहले घोड़े से गिर गई और उसका प्राणांत हो गया। अब प्रकृति के नजारे लेने हैं तो पैदल चलने से बेहतर क्या हो सकता है।
पहले दिन शाम हो चुकी थी। लोगों से पूछकर हमलोग शाम को खाने के लिए  रामकृष्ण भोजनालय पहुंचे। गुजराती प्रोपराइटर के इस भोजनालय का खाना सुस्वादु है। हमने यहां पर आर्डर किया पसंदीदा पनीर बटर मसाला और चपाती। सबको पसंद आया।
पर सुबह के नास्ते के लिए हमने केतकर भोजनालय को चुना। यह भी गुजराती भोजनालय है। यहां का मालपुआ बेटे के इतना पसंद आया कि हम हर रोज खाते रहे। चलते समय मालपुआ पैक कराकर भी ले चले। संयोग रहा कि हमारे माथेरन प्रवास के दौरान दो अप्रैल  की तारीख भी आई जो माधवी का जन्मदिन है। तो यहीं पर सेलेब्रेट किया गया जन्मदिन।
नहीं भाया मिसल पाव - पर माथेरन का मिसल पाव मुझे नुकसान कर गया। इसमें मिर्च मसाला ज्यादा होता है। इससे पेट खराब हो गया, जो अगले कई दिन तक परेशान करता रहा। माथेरन शहर का पानी हमने पहाड़ो का पानी अच्छा होगा समझ कर पी लिया। पर शायद पानी ने भी अपना कमाल दिखाया। बाद में एक जगह पढ़ने को मिला कि बापू को भी माथेरन में आकर मुश्किल हुई थी। पर कई लोगों को माथेरन इतना पसंद आता है कि साल में कई बार आते हैं। खास कर मुंबई वाले। ऐसे ही एक परिवार से हमारी यहां पार्क में मुलाकात हुई। 

यहां लोगों ने बताया कि एक आर्किटेक्ट महोदय तो माथेरन के एक भवन में सालों भर रहते हैं और अपने विदेशी क्लाएंट को यहीं से नक्शे बनाकर भेजते हैं। वे माथेरन से बाहर कम ही निकलते हैं। 

शापिंग में खरीदें चप्पलें -  आप माथेरन शहर से कुछ शापिंग करना चाहें तो यहां से चप्पले खरीद कर ले जा सकते हैं। खास तौर पर महिलाओं की चप्पलें यहां स्थानीय तौर पर बनती हैं।
होम स्टे में ठहरें - यहां माथेरन में रहने के लिए होटल के अलावा बड़ी संख्या में होम स्टे भी हैं। काफी लोग अपने घरों में लोगों को ठहराते हैं हालांकि इनका किराया तय नहीं होता। इसमें सीजन के हिसाब से उतार चढ़ाव आता रहता है।

आ अब लौट चलें - तीसरे दिन दोपहर में हमारी माथेरन से वापसी थी। पर टॉय ट्रेन का टिकट पाने के लिए लंबी लाइन लगी थी। लाइन में लगा टिकट के लिए पर लग रहा था कि हमें तीन टिकटें नहीं मिल पाएंगी। टॉय ट्रेन में जितनी सीटें हो उतनी ही टिकटें बिकती हैं। हमें दो टिकट अपने प्रयास से मिल गईं। इसी बीच एक रेलवे कर्मचारी हमारे मददगार बनकर आए। उनसे हमें एक और टिकट मिल सका। उनका बहुत बहुत धन्यवाद। ट्रेन धीरे धीरे नेरल की ओर उतर रही थी। एक बार फिर वही अनुभव जो चढा़ई करते समय हुए थे। पर इस बार हमारे जेहन में माथेरन की भी ढेर सारी मीठी मीठी यादें थीं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MATHERAN, MAHARASTRA, NERAL, MALPUA, KETKAR, GUJRATI FOOD ) 


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