Wednesday, April 8, 2015

बावन दरवाजों वाला शहर - औरंगाबाद

नांदेड़ से चली तपोवन एक्सप्रेस दोपहर ढाई बजे औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पर दस्तक दे देती है। रेलवे स्टेशन की बाहरी साज सज्जा देखकर ही लग जाता है कि हम किसी ऐतिहासिक शहर में आ गए हैं। रेलवे स्टेशन से आधे किलोमीटर की दूरी पर बंसीलाल नगर में हमारा होटल है श्रीमाया। सुंदर वातानुकूलित कमरे वाजिब दाम पर। अगले चार दिन यहीं पर रहना है। रेलवे स्टेशन से उतर कर होटल वाले को फोन किया था उन्होंने बताया कि आप टहलते हुए होटल तक पहुंच सकते हैं। सो हम पहुंच गए।

शाम को हमलोग औरगांबाद शहर घूमने निकले। महाराष्ट्र के मराठवाडा इलाके का सबसे बड़ा शहर है औरंगाबाद। आबादी 20 लाख से ज्यादा हो चुकी है। शहर में एयरपोर्ट भी है। दिल्ली से सीधी फ्लाइटें हैं।  कई बड़े उद्योग लगे हैं वीडियोकान समूह के उत्पाद यहां बनते हैं। इसके अलावा केनस्टार होम अप्लाएंसेज,  सीमेंस, बजाज, कोलगेट पामोलिव, गरवारे, जांसन एंड जानसन, विप्रो जैसी तमाम बड़ी कंपनियां यहां से उत्पादन करती हैं।
औरंगाबाद शहर का एक गेट। 

किसी जमाने में औरंगाबाद 52 दरवाजों वाला शहर हुआ करता था। पूरा शहर एक बाउंड्री के अंदर था। ये दीवार अभी भी जगह जगह दिखाई देती है। इन 52 दरवाजों में से 18 अभी भी अस्तित्व में हैं।

दिल्ली की तरफ जाने वाली सड़क पर दिल्ली गेट है। इसके अलावा पैठण गेट, नौबत गेट, मकई गेट, जाफर गेट जैसे द्वार मजबूती से खड़े हैं। इन गेटों के अलावा दीवार में कई जगह खिड़कियां भी थीं। 

बताते हैं कुल 24 खिड़कियां थीं। गेट बंद होने के बाद बाहर से आनेवाले मुसाफिर इन खिड़कियों से रक्षकों से संवाद कर सकते थे। अभी भी 4 खिड़कियों का अस्तित्व बचा हुआ है। रात 8 बजे शहर के सभी गेट बंद कर दिए जाते थे। बाद में आने वाले मुसाफिर की जांच पड़ताल करने के बाद ही प्रवेश दिया जाता था। कभी पुरानी दिल्ली शहर  में भी सात दरवाजे हुआ करते थे। पर ये तो 52 दरवाजों का शहर था। यानी दिल्ली से ज्यादा व्यवस्थित।

मलिक अंबर ने की स्थापना -  इस नगर की स्थापना 1610 में मलिक अंबर ने की थी। मलिक अंबर के बेटे ने नगर का नाम फतेहनगर रखा था। पर मुगलशासक औरंगंजेब के अधीन आने पर 1653 में इसका नाम बदलकर औरंगाबाद हो गया। बाद में ये शहर हैदराबाद के निजाम के अधीन हो गया, लिहाजा इसका ज्यादा विकास नहीं हो सका। औरंगाबाद कलात्मक रेशमी शॉल के लिए प्रसिद्ध है।

शहर में बीबी का मकबरा, पानी चक्की देखने लायक है तो आसपास में एलोरा की गुफाएं, दौलताबाद का किला, खुल्ताबाद में औरंगंजेब की मजार, घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग, अंजता की गुफाएं देखी जा सकती हैं।
 ये सब कुछ तो देखेंगे पहले जरा बाजार का चक्कर लगा लें।

तो हमलोग निकल पड़े बाजार की सैर करने। शहर का शापिंग एरिया गुल मंडी है जो पैठण गेट से आरंभ होता है। इसके आगे औरंगपुरा में भी बाजार है। फूले चौक, क्रांति चौक,बाबा पेट्रोल पंप चौक शहर के मुख्य चौराहे हैं। औरंगाबाद शहर की एक खास बात है कि यहां पर पानी की कमी होने के बावजूद पानी नहीं बिकता। शहर में हर मुहल्ले में प्याउ लगे हुए हैं। वहां पर आप निःशुल्क पानी पी सकते हैं।
शहर का एक बड़ा हिस्सा सेना का कैंटोनमेंट एरिया है। शहर के बीचो बीच सेंट्रल बस स्टैंड है जहां से सभी जगह के लिए बसें मिलती हैं। शहर से कई मराठी अखबारों के अलावा हिंदी में दैनिक भास्कर और लोकमत समाचार का प्रकाशन होता है।
vidyutp@gmail.com
औरंगाबाद शहर की एक सुबह। 
(AURANGABAD CITY, MARATHWADA, HOTEL SRI MAYA, BANSHILAL NAGAR  )

No comments:

Post a Comment