Friday, April 17, 2015

माथेरन में हर सैलानी को देना पड़ता है प्रवेश शुल्क

पहले टैक्स दें फिर आगे जाएं ...
माथेरन देश में एक ऐसा पहाड़ी शहर है जहां हर आने वाले सैलानी को प्रवेश शुल्क देना पड़ता है। आजकल हर बाहरी वयस्क के लिए 50 रुपये और बच्चों के लिए 25 रुपये लिए जाते हैं। ये कर माथेरन गिरिस्थान नगर परिषद वसूलती है। इसके वसूली काउंटर रेलवे स्टेशन और अमन लाज के पास टैक्सी स्टैंड में बने हुए हैं। टैक्स देने के बाद आप अगले कुछ दिन यहां निवास करने के अधिकारी बन जाते हैं। इस कर की राशि को शहर के ररखाव में खर्च किया जाता है। 

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित माथेरन 800 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर है। शहर की आबादी महज 7000 है। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम लोग हैं। कई पारसियों की कोठियां भी माथेरन में है जो विरान पड़ी रहती हैं। कभी माथेरन मुंबई के अमीर पारसी लोगों का पसंदीदा हिल स्टेशन हुआ करता था। आजकल हर मुंबई वासी यहां सुकुन के कुछ दिन बीताने के लिए आना चाहता है। इसलिए शनिवार और रविवार को यहां खासी भीड़ हो जाती है। तो कभी माथेरन में प्रवेश का कर दो रुपये था जो बढ़ते हुए 50 रुपये हो गया। वैसे महाराष्ट्र के एक और हिल स्टेशन महाबलेश्वर में भी 20 रुपये का प्रवेश कर लगता है।


हमारा ठिकाना हुंजर हाउस - माथेरन में हमारा ठिकाना पहले से ही तय था। स्टेजिला डाट काम से हमने ऑनलाइन बुकिंग करा रखी थी। रेलवे स्टेशन के बगल में ही है हुंजर हाउस। रंगोली होटल के ठीक सामने। यह माथेरन का एक किफायती होटल है। यहां बाकी ज्यादातर होटल महंगे हैं। रेल से उतर कर हमलोग लोगों से रास्ता पूछकर टहलते हुए होटल पहुंचे तो होटल के प्रोपराइटर हमारा इंतजार कर रहे थे। यहां कई होटलों में खाना नास्ता के पैकेज के साथ बुकिंग होती है। पर हमारा हुंजर हाउस किफायती होने के बावजूद बेहतर है। इस होटल के कमरे से खिलौना ट्रेन हमेशा आती जाती दिखाई देती है। होटल के लान में दो झूले भी लगे हैं। यहां अनादि देर तक झूले पर झूलते रहे। होटल में कैंटीन नहीं है पर आप आसपास में निकट के रेस्टोरेंट में खाने के लिए जा सकते हैं। पहले दिन शाम ढल चुकी है इसलिए हमलोग एक रेस्टोरेंट में जाकर खाने के बाद सो गए। 


माथेरन में क्या देखें - छोटे से हिल स्टेशन माथेरन में घूमने लिए कई प्वाइंट हैं। माथेरन बाजार में राम मंदिर और माधवजी पार्क है। इसके अलावा एलेक्जेंडर प्वाइंट, खंडाला प्वाइंट, पिसरनाथ मंदिर, शॉरलेट लेक, लार्ड प्वाइंट, इको प्वाइंट, सनसेट प्वाइंट जा सकते हैं।
अगले दिन की सुबह से ही हमने माथेरन में घूमना शुरू कर दिया। माधव जी पार्क में हमें  फोटोग्राफर मुकीम शेख मिले जिन्होने अपने निकॉन कैमरे से हमारी तस्वीरें उतारी। ( फोन – 9423806509) मुकीम लखनऊ के हैं पर माथेरन को अपना ठिकाना बना लिया है। इस पार्क में ढेर से झूले हैं सो अनादि तो यहीं जमे रहना चाहते थे। पर हमलोग आगे चले। खंडाला प्वाइंट 

एलेक्जेंडर होटल के पास एलेक्जेंडर प्वाइंट। जंगलों के बीच से पदयात्रा करते हुए हमलोग पहुंच गए प्राचीन पिसरनाथ मंदिर। शिव का सुंदर सा मंदिर है झील के किनारे। रास्ते में बंदर बहुत हैं सो उनसे बचने के लिए हमने डंडे रख लिए थे। मंदिर के बगल में शॉरलेट लेक है। बारिश में ये झील और सुंदर हो जाती है। इसके बगल में हैं लार्ड प्वाइंट। झील से थोड़ा आगे चलने पर आ जाता है इको प्वाइंट। यहां पर क्रास द वैली के लिए रोपवे लगा है। किराया 300 रुपये प्रति फेरी। हम आगे बढ़ चले। भूख लगी थी सो जंगल में कच्ची कैरी और बड़ा पाव खाया। इसके बाद आइसक्रीम। दोपहर में होटल वापस।




शाम को सनसेट प्वाइंट जाने का कार्यक्रम बना। हां तो सन सेट तो शाम को ही देखेंगे न.. जाने के लिए तीन किलोमीटर जंगलों से पैदल रास्ता। रेलवे स्टेशन के बगल में दिवादकर होटल से सनसेट प्लाइंट के लिए रास्ता जाता है।

रास्ते में स्टेट बैंक होलीडे होम और अशोक होटल आते हैं। यहां भी खूब बंदर दिखाई देते हैं। पास में मंकी प्वाइंट भी है।
पर सनसेट प्वाइंट पर शाम को सैकड़ो सैलानी जुटते हैं। डूबते हुए सूर्य के सौंदर्य को निहारने। और ये बन जाती है माथेरन की यादगार शाम। अनादि को गोविंद जैसे दोस्त मिल गए। लौटते हुए रात हो जाती है पर जंगलों में रोशन का इंतजाम है। हमें लगा कि माथेरन में प्रवेश के लिए दिए गए 50 रुपये टैक्स का सदुपयोग हो रहा है।

vidyutp@gmail.com
( NERAL MATHERAN RAIL, SUNSET POINT, )

No comments:

Post a Comment