Saturday, March 7, 2015

वनों और उद्यानों का शहर सिलवासा

सिलवासा मतलब वनों और उद्यानों का शहर। एक दिन का पिकनिक मनाने के लिए आदर्श जगह हो सकती है सिलवासा। पर्यटन के नजरिए से बात करें तो  दादरा नगर हवेली में ताड़केश्वर शिव मंदिर, वृंदावन, खानवेल का हिरण पार्क, वनगंगा झील और द्वीप उद्यान (दादरा) हिरवा वन विहार उद्यान, लघु प्राणी विहार, बाल उद्यान, आदिवासी संग्रहालय के नाम प्रमुख हैं।

दादरा नगर हवेली के प्रवेश द्वार से एक किलोमीटर आगे जाने पर ही आता है वन गंगा उद्यान। सुंदर झील के आसपास बने इस उद्यान में नौकायान का आनंद उठाया जा सकता है। वन गंगा दादर और नगर हवेली संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रवेश द्वार के पास ही दादरा में स्थित है। इस उद्यान तक सिलवासा से 6 किलोमीटर चलकर पहुंचा जा सकता है।

हर सोमवार को उद्यान बंद रहता है। उद्यान में प्रवेश के लिए 20 रुपये का टिकट है। यह 7.58 हेक्‍टेयर के क्षेत्रफल में फैला है। यह उद्यान द्वीप के केन्‍द्र में बनाया गया है जो जापानी शैली के फूलों की क्यारियों से सजाया गया है। यहां का मुख्‍य आकर्षण पेड़ों की कतारों, नावों, झरनों, रेस्‍तरां और जॉगिंग पार्क है। कुछ रुपये खर्च करके यहां आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं। बोटिंग के लिए आधे घंटे वक्त का 90 रुपये देना पड़ता है।

यहां आप बत्तखों और कछुओं को दाना भी डाल सकते हैं। निहायत गर्म मौसम में भी बाग में आकर शीतलता का एहसास होता है। यहां औसतन 4 लाख सैलानी को हर साल पहुंचते हैं। वन गंगा उद्यान हिंदी फिल्‍म के निर्माताओं के बीच अत्‍यंत लोकप्रिय है और यहां 40 से अधिक हिन्‍दी फिल्‍मों के गानों की शूटिंग हो चुकी है।
सिलवासा की तरफ थोडा आगे चलें तो बायीं तरफ ही आता है हिरवा वन उद्यान। प्राकृतिक वन को यहां संरक्षित किया गया है। वन में कई तरह के पेड़ देखे जा सकते हैं। यहां तेज आवाज करते हुए झरने हैं जो सैलानियों का मनमोह लेते हैं।

शिशु उद्यान - सिलवासा के ऐतिहासिक टाउन हॉल के बगल में बच्चों के लिए शिशु उद्यान बना है। सचदेव बाल उद्यान दोपहर में 12 से 3 बजे तक बंद रहता है। उद्यान बहुत बड़ा नहीं हैं। बच्चों को लुभाने जैसा कुछ खास नहीं है इस उद्यान में। शिशु उद्यान के पास ही एक नया नक्षत्र उद्यान बनाया गया है। इसमें कई तरह के औषधीय वनस्पतियों को देखा जा सकता है। दादरा नगर हवेली के सभी उद्यानों की रखरखाव वन विभाग करता है।

जनजातीय संग्रहालय – सिलवासा मुख्य बाजार में जनजातीय संग्रहालय स्थित है। इसमें दादरा नगर हवेली के जनतातियों के बारे में उनके पहनावे और रहन सहन के बारे में जानकारी ली जा सकती है। दो कमरे का छोटा सा संग्रहालय है जो आधे घंटे में घूमा जा सकता है। हर सोमवार को ये संग्रहालय बंद रहता है। सिलवासा की तकरीबन 80 फीसदी आबादी जन जातियों की है। हालांकि राज्य में लगातार बाहरी लोगों की आवक के बाद जनजातीय लोगों की संख्या कम होती जा रही है।

दादरा और नगर हवेली में मुख्‍यत: जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। यहां के संग्रहालय में सजावटी गहने, संगीत वाद्य, मछली पकड़ने और शिकार करने के औजार, खेती तथा घरेलू कार्य की वस्‍तुएं और अन्‍य अनेक वस्‍तुएं रखी गई हैं। जीवन का जनजातीय चित्रण इनके वास्‍तविक आकार के मॉडल, विवाह की पोशाक और रंग बिरंगे कार्यक्रमों की तस्‍वीरों द्वारा किया गया है। यह संग्रहालय पर्यटकों के बीच अत्‍यंत लोकप्रिय है और यहां मूल जनजातियों के साथ उनकी संस्‍कृति की झलक एक ही स्थान पर मिलती है।


कब जाएं – दादरा नगर हवेली में नवंबर से मार्च तक बहुत ही सुहावना मौसम होता है और यह समय यहां घूमने आने का सबसे अच्छा समय है। वैसे आप सिलवासा जाने का कार्यक्रम सालों भर कभी भी बना सकते हैं।

समुद्र से नजदीकी के कारण गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा नहीं होता और रातें बहुत सुहावनी होती हैं। 

vidyutp@gmail.com ( DNH 2) 

( DADRA NAGAR HAWELI, SILWASA )

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