Friday, March 6, 2015

नन्हा सा राज्य - दादरा अणि नगर हवेली

भारत के एक केंद्र शासित राज्य दादरा नगर हवेली की राजधानी है सिलवासा। राजधानी सिलवासा के आसपास ही फैला हुआ है पूरा दादरा नगर हवेली राज्य। ये समुद्र तटीय राज्य मुंबई बड़ौदा लाइन पर वापी रेलवे स्टेशन से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर है। वापी रेलवे स्टेशन से सिलवासा जाने के लिए हमेशा शेयरिंग आटो रिक्शा मिलते हैं। गुजरात के कुछ शहरों से सीधे बसें भी सिलवासा जाती हैं। कुछ किलोमीटर चलने पर दादरा नगर हवेली का प्रवेश द्वार आता है। यहां बड़े अक्षरों मे लिखा है कि केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में आपका स्वागत है। इस गेट से सिलवासा शहर की दूरी कोई 7 किलोमीटर के आसपास है। 

सिलवासा टाउन हाल के पास ही नगर का छोटा सा बस स्टैंड है। सारे आटो रिक्शा भी बस स्टैंड तक जाते हैं। दादरा नगर हवेली में स्थानीय परिवहन के लिए नगर बस सेवा चलती है। मिनी बसों की खेप सारथी बस सेवा स्थानीय लोगों मे काफी लोकप्रिय है। पर इसमें ज्यादा भीड़ नहीं होती। वैसे सिलवासा वापी और मुंबई के बीच स्थित भिलड रेलवे स्टेशन से भी पहुंचा जा सकता है। भिलड से सिलवासा की दूरी सिर्फ 13 किलोमीटर है। राज्य की सीमा गुजरात के वलसाड और महाराष्ट्र के नासिक जिले से लगती है। राज्य का लंबा इलाका अरब सागर से भी लगा हुआ है।

दादरा नगर हवेली का विस्तार मात्र 491 वर्ग किलोमीटर में है। 2011 में राज्य की आबादी 3 लाख 42 हजार थी। यानी यह देश के कई राज्यों के एक जिले से भी छोटा राज्य है। मराठी में इस राज्य को दादरा अणि नगर हवेली कहते हैं। अरब सागर के किनारे स्थित ये राज्य 1779 तक मराठा शासकों के कब्जे में था। 

पर 17 दिसंबर 1779 को इस प्रदेश के 79 गांव पुर्तगालियों के कब्जे में चले गए। उसके बाद 1954 तक पुर्तगालियों के कब्जे में रहा। यानी देश आजाद होने के कई साल बाद ये भारत का हिस्सा बना। 1954 से 1961 तक ये प्रदेश लगभग आजाद हाल में रहा। 11 अगस्त 1961 को दादरा नगर हवेली संघीय भारत का हिस्सा बना। हर साल 2 अगस्त को यहां मुक्ति दिवस मनाया जाता है। इसी दिन सिलवासा को आजाद कराया गया था। यहां के निवासियों में 79 फीसदी लोग आदिवासी हैं जिनकी परंपराएं आज भी बची हुई हैं।

पर्यटन स्थल होने के साथ साथ दादरा नगर हवेली महत्वपूर्ण ओद्योगिक केंद्र भी है। टैक्स फ्री जोन होने के कारण यहां उद्योग खूब लगे हैं। इस छोटे से प्रदेश में कुल तीन उद्योगिक व्ययस्थापन क्षेत्र हैं जिनमें 300 के आसपास प्लांट हैं।
 पिछले कुछ सालों से यहां गन्ने की खेती में वृद्धि हुई है। सिंचित क्षेत्रों में बहु-फसल पद्दति के उपाय किए जा रहे हैं। राज्य के दुधानी तथा मंडोनी में ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने की भी कोशिश की जा रही है।

घने जंगल तथा अनुकूल जलवायु को देखते हुए दादरा नगर हवेली में पर्यटन क्षेत्र को उच्‍च प्राथमिकता दी गई है। यहां मुंबई से बड़ी संख्या में सैलानी हमेशा घूमने के लिए आते हैं। अगर आप देश के किसी कोने से भी सिलवासा पहुंचते हैं तो यहां की रंगीनियां आपका स्वागत करने को तैयार हैं।

दादरा नगर हवेली मे सैलानियों के ठहरने के लिए यहां बड़ी संख्या में होटल्स और रेसोर्ट्स मौजूद हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर साल तारपा उत्सव, पतंग उत्सव और विश्व पर्यटन दिवस आदि आयोजन किए जाते हैं।

1 comment:

  1. रोचक और सूचनापरक मैं ईश्‍वर से कामना करता हूं कि आप इसी तरह भ्रमण करते रहें और हमारी जानकारी बढाते रहें

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