Sunday, March 22, 2015

ऐसा हो नास्ता - हरित ज्वार की चाट या भेलपुरी

बड़ौदा रेलवे स्टेशन के बाहर से गुजरते हुए हल्की सी भूख लगी थी। देखा एक महिला भेलपुरी बेच रही है। ज्वार की भेलपुरी। हरे रंग का ज्वार। भला उसकी भेलपुरी कैसी लगती होगी। मैंने ज्वार यानी रागी की इडली तो खूब खाई है, जो मुझे काफी पसंद भी है। इसके पोषक तत्वों के बारे में भी काफी सुना है। पर हरा ज्वार और उसकी भेलपुरी खाने का कैसा अनुभव हो सकता है। मैंने कहा 10 रुपये की बना दो। अम्मा ने फटाफट बनाकर पेश कर दिया। यकीन मानिए खाकर दिल खुश हो हो गया। नींबू, नमक, काली मिर्च, टमाटर, कटे आम के टुकड़े। हरा ज्वार खाने में अच्छा लगता है। न मीठा न खट्टा। पर फिर भी इसका एक स्वाद है।

भारतीय व्यंजन में ज्वार का बहुत पहले से महत्व है। अलग-अलग तरह से और नए-नए स्वाद से खाने का जायका बदला जा सकता है। इसमें एक है ज्वार का चाट। इसे बनाना आसान है। यह सुपाच्यसरलसस्ता और सुंदर है। कच्चे सलाद जैसे ककड़ीगाजरकच्ची कैरीभुट्टे के दाने से इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। बच्चे चाट के नाम से इसे शौक से खाते हैं।

तो आइए जानते हैं कैसे बनती है ज्वार की चाट या भेलपुरी। तो तैयार हो जाइए। सबसे पहले लें एक कप ज्वार।  बारीक कटा प्याज, हरी चटनी, बारीक कटी हरी मिर्च, बारीक कटा टमाटर, इमली की चटनी, नींबू का रस, बारीक कटा आम, हरा धनिया, सेव,  भुना हुआ जीरा पाउडर, चाट मसाला। ज्वार पचने में हल्की और पौष्टिक होती है। और यह सबसे सस्ता धान्य है। सेहत के लिए उत्तम है।

रागी यानी मड़ुआ अफ्रीका और एशिया के सूखे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अन्न है। यह एक साल में पक कर तैयार हो जाता है। यह मूल रूप से इथियोपिया के उच्च इलाकों का पौधा है। इसे भारत में कोई चार हजार साल पहले लाया गया। ज्वार दुनिया में पांचवें नम्बर पर उगाया जाने वाला खाद्यान है। ये करीब तीस देशों के 50 करोड़ से ज्यादा लोगों का भोजन है।

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