Sunday, February 8, 2015

रायपुर राजिम - बंगाल-नागपुर रेलवे की पहली नैरो गेज रेल ((03))

रायपुर धमतरी खंड बंगाल नागपुर रेलवे की ओर से संचालित पहली नैरो गेज रेलवे लाइन थी। 1887 में बंगाल नागपुर रेलवे की स्थापना हुई तभी इस क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाने की योजना बनी। रायपुर राजिम धमतरी खंड के लिए ढाई फीट चौड़ाई वाली नैरोगेज रेलवे तकनीक का चयन किया गया।

1901 में रायपुर से धमतरी के बीच 45.7 मील और अभनपुर से राजिम 10.50 मील की नैरोगेज रेलवे लाइन आम जनता के लिए खोला गया। 14 अप्रैल 1952 को रायपुर धमतरी रेल खंड पूर्व रेलवे के अधीन आ गया। इससे पूर्व एक अक्तूबर 1944 में ही बंगाल नागपुर रेलवे का प्रबंधन भारतीय रेलवे के अधीन हो चुका था। सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। इस तरह से ये रेल मार्ग भारतीय रेलवे के प्रबंधन में आ गया।



उस समय 66 लाख रुपए में बनी थी पूरी लाइन 
रायपुर-धमतरी नैरोगेज लाइन बनाने की योजना उन्नीसवीं सदी के आखिरी दौर में बनी। स्थानीय परिवहन की जरूरतों को देखते हुए बेंगाल नागपुर रेलवे ने 17 अप्रैल 1886 को रायपुर-राजिम-धमतरी रेल खण्ड पर स्टीम ट्राम वे निर्माण की स्वीकृति दी थी। सन 1891-92 में रायपुर से धमतरी के बीच 44 मील लाइन के लिए सर्वे शुरू हुआ। करीब पांच साल बाद बेंगाल-नागपुर रेलवे के पहले नैरागेज के लिए अक्टूबर 1896 में पटरियां बिछाने का काम शुरू हुआ। तब इस प्रोजेक्ट की लागत 65 हजार स्टर्लिंग पाउंड ( करीब 66 लाख रुपये लागात आई थी)
सितंबर 1900 में पहला खंड चालू हुआ - रायपुर से कुरुद तक के 49 किलोमीटर के इस लाइन के पहले खंड को 10 सितंबर 1900 को आवाजाही के लिए खोला गया। वहीं कुरुद से धमतरी के 14 मील के खंड को 17 दिसंबर 1900 को आवाजाही के लिए खोल दिया गया। वहीं अभनपुर जंक्शन से राजिम के 16 किलोमीटर के खंड को 15 अक्तूबर 1900 को आवाजाही के लिए खोला गया। बाद इस खंड का राजिम से राजिम टाउन तक एक मील का और विस्तार दिया गया। इस विस्तार को 13 मई 1906 को आम जनता के लिए खोला गया।



गुजराती ठेकेदारों ने बनवाई लाइन - रायपुर धमतरी रेल खंड के निर्माण का ठेका गुजराती ठेकेदार राजा रुद्रा ने लिया था। दिलचस्प बात ये है कि देश भर में रेल लाइनों के बिछाने का ज्यादातर काम गुजरात के ठेकेदारों ने किया है। इसमें भी कच्छ के गुर्जर क्षत्रिय बिरादरी के ठेकेदारों की खास भूमिका रही है। इस बिरादरी से रेलवे के ठेकेदार बड़ी संख्या में हुए, जिन्होंने देश भर में रेल लाइनें बिछाने के लिए ठेका लिया।

गुजरात के गुर्जर क्षत्रिय ठेकेदारों ने 1850 से ही देश के अलग अलग हिस्सों में रेल लाइनें बिछाने के काम में हिस्सेदारी की। राजा रुद्रा ने 1898 में रायपुर धमतरी रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू किया। रिकार्ड दो सालों में इस लाइन पर काम चालू कर दिया गया। ब्रिटिश राज में हम तमाम रेल लाइनों के बिछाए जाने की गति को देखते हैं तो लगता है कि तब काम पूरा करने की गति बहुत तेज थी।

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( RAIPUR RAJIM DHAMTARI NARROW GAUGE  RAIL-3 )


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