Saturday, February 7, 2015

तेलीबांधा से धमतरी और राजिम का सफर ((02))


मैदानी इलाकों की रायपुर राजिम नैरो गेज ट्रेन का सफर बड़ा रोमांचक है। तेलीबंधा के बाद माना हाल्ट, भाटगांव, केंद्री और इसके बाद अभनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन आते हैं। अभनपुर जंक्शन से राजिम के लिए बाईं तरफ दूसरी लाइन चली जाती है। अभनपुर में हर ट्रेन कम से कम 10 मिनट रुकती है।

अभनपुर से राजिम के मार्ग पर मानिक चौरी हाल्ट के बाद राजिम आखिरी रेलवे स्टेशन आ जाता है। ये रेलमार्ग बिल्कुल समतल इलाके से गुजरता है। दोनों तरफ धान के खेत लहलहाते नजर आते हैं।
अभनपुर से आगे धमतरी लाइन पर चटौद, सिरी, कुरुद, सरसोंपुरी, सांकरा के बाद धमतरी रेलवे स्टेशन आता है। तेलीबंधा से धमतरी के लिए 68 किलोमीटर की दूरी का पैसेंजर किराया महज 20 रुपये है। जबकि इतनी दूरी बस से तय करने पर 60 रुपये तक लग जाते हैं। लिहाजा बड़ी संख्या में धमतरी मार्ग पर जाने वाले लोग ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं। वहीं अभनपुर, सिर्री तक का किराया सिर्फ 10 रुपये है। 2014 में इस रेल मार्ग पर सफर के दौरान मैंने देखा कि इस मार्ग पर चलने वाली सभी ट्रेनें पैसेंजर हैं। इनमें सारे डिब्बे द्वितीय श्रेणी के हैं। कोई आरक्षित डिब्बा नहीं है।




तेलीबंधा धमतरी नैरोगेज का लोको
इस मार्ग पर सवारी गाडियों को खिंचने के लिए जेडडीएम सीरीज के पांच लोको (इंजन) मौजूद हैं। मैंने तेलीबंधा से अभनपुर तक जिस पैसेंजर ट्रेन में सफर किया उस ट्रेन को जेडडीएम4ए 232 लोको खींच रहा था। तेलीबंधा में इंजन के रखरखाव का कोई इंतजाम नहीं है। अभी भी इंजन को मरम्मत और मेनटेंनेंस के लिए रायपुर जंक्शन ही लाना पड़ता है। रायपुर जंक्शन से एक किलोमीटर आगे नैरो गेज का यार्ड बना है। सिग्नल के लिए मैनुअल सिस्टम चलाया जा रहा है। पटरियों को जोड़ने के लिए लकड़ी फिश प्लेटें लोहे की हैं। पर अभी भी कई जगह लकड़ी की फिश प्लेंटे लगी हुई दिखाई देती हैं। गार्ड के हाथ में वाकी टाकी और मोबाइल फोन दिखाई दे रहे हैं।



ट्रेन के सवारी डिब्बे 1990 से 1996 के बीच के बने हुए हैं। इन डिब्बों में 44 लोगों के बैठने की जगह है। सभ डिब्बों में टायलेट भी हैं। पंखे लगे हुए हैं। ये गर्मियों में चलते भी हैं। तेलीबंधा रेलवे स्टेशन पर नैरोगेज के कोच को ट्रैक के साथ ताले लगाकर सुरक्षित रखा हुआ देखा। शायद स्थानीय लोगों की कोच के साथ छेड़छाड़ को रोकने के लिए ऐसा किया गया होगा। वास्तव में नन्ही ट्रेन के कोच इतने हल्के हैं कि कुछ लोग मिलकर उसे धक्का देकर सरका सकते हैं। तेलीबंधा स्टेशन पर बड़े बडे बोर्ड लगे हैं। स्टेशन पर साइकिल चलाना मना है। पर प्लेटफार्म तक लोग साइकिल और मोटरसाइकिल लेकर आ जाते हैं।


अभनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन पर उदघोषणा के लिए माइक लगे हुए दिखाई दिए। आमतौर इस ट्रेन में ज्यादातर लोग टिकट खरीदकर सफर करते दिखाई देते हैं। लोग बताते हैं कि कभी कभी इस मार्ग पर मजिस्ट्रेट चेकिंग भी हो जाती है। हमारी एक सहयात्री महिला बताती हैं कि शाम को तेलीबंधा से खुलने वाली ट्रेन में कम लोग ही टिकट खरीदते हैं, क्योंकि शाम वाली ट्रेन में चेकिंग नहीं होती है।  


तेलीबंधा से पहली ट्रेन -  58711 तेलीबंधा धमतरी पैसेंजर सुबह 7 बजे रवाना होती है। इसके बाद दोपहर में 58713 तेलीबंधा धमतरी पैसेंजर दोपहर 12.40 बजे रवाना होती है। 58715 धमतरी पैसेंजर शाम को 6.35 बजे चलती है। शाम को 4.35 बजे राजिम के लिए 58717 पैसेंजर रवाना होती है। आमतौर पर सभी ट्रेनें समय से खुलती हैं।

राजिम रेलवे स्टेशन राजिम के पहले नयापारा बाजार से एक किलोमीटर आगे है। ये रेलवे स्टेशन महानदी के बिल्कुल तट पर बना है। स्टेशन प्लेटफार्म के पास स्टेशन की 100 साल से ज्यादा पुरानी इमारत दिखाई देती है। हालांकि अब ज्यादातर स्टेशनों की नई इमारतें बन चुकी हैं। 
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( RAIPUR RAJIM DHAMTARI NARROW GAUGE  RAIL-2 )


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