Saturday, January 31, 2015

ऊंचे पहाड़ों पर बसती हैं डोंगरगढ़ की मां बमलेश्वरी देवी

देश भर में देवियां पहाड़ो पर बसती हैं जिनके दर्शन के लिए आपको सैकड़ो सीढ़िया चढ़नी पड़ती है। इनमें हिमाचल की नैना देवी और मध्य प्रदेश की मैहर देवी प्रसिद्ध हैं। पर छत्तीसगढ़ की बमलेश्वरी देवी के दर्शन के लिए एक हजार से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन के पास मां बमलेश्वरी देवी मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यह बड़ी बमलेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। बमलेश्वरी देवी 1600 फीट की चोटी पर माता बमलेश्वरी विराजमान हैं। देवी के दर्शन के लिए लोगों को 1100 से ज्यादा सीढियां चढ़ के जाना पड़ता है। छोटी बमलेश्वरी मंदिर नीचे भू-तल पर ही स्थित है।

मां का मंदिर प्राकृति के अदभुत खूबसूरत नजारों के बीच है। पहाडिय़ों पर घुमावदार सीढियां चढ़ के रोज के श्रद्धालु देवी बमलेश्वरी के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं। पहले मंदिर तक पहुंचने का रास्ता दुर्गम था। 1964 में खैरागढ़ राजपरिवार ने बमलेश्वरी देवी ट्रस्ट समिति बनाई जिसके बाद मंदिर तक जाने के लिए व्यवस्थित सीढियां बनाई गई। रास्ते में भक्तों के लिए पानी की व्यवस्था की गई।

मंदिर की कथा - कहा जाता है कि 2200 साल पहले डोंगरगढ़ कामाख्या नगरी के तौर पर जाना जाता था। मां बम्लेश्वरी देवी शक्तिपीठ का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। डोंगरगढ़ से प्राप्त भग्रावेशों से प्राचीन कामावती नगरी होने के प्रमाण मिले हैं। पूर्व में डोंगरगढ़ ही वैभवशाली कामाख्या नगरी कहलाती थी। एक स्थानीय राजा वीरसेन  निःसंतान था और कहा जाता है। उसने  अपने शाही पुजारियों के सुझावों से  देवताओं को पूजा कर विशेष  रूप से शिव पारवती जी की  करके मनौती मानी एक साल के भीतर, रानी वे मदनसेन  नाम एक पुत्र को जन्म दिया। राजा वीरसेन   ने इसे  भगवान शिव और पार्वती की एक वरदान मान उनकी  सम्मान में  मां बमलेश्वरी का मंदिर बनवाया

अब शानदार रोपवे – अब मां बमलेश्वरी तक जाने के लिए रोप वे की व्यवस्था भी की गई है। 2 अक्तूबर 2005 में यहां रोपवे की सुविधा आरंभ हुई। रोपवे सुबह 8 बजे से 1 बजे तक और शाम 3 से 6 बजे के बीच खुला रहता है। ये बंद रोपवे है जिसके हर कार में 4 लोग बैठ सकते हैं। इसलिए ये राजगीर के रोपवे की तरह खतरनाक नहीं है। ये छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र रोपवे है। रोपवे से चढाई करते समय आसपास के प्राकृतिक नजारे मनमोह लेते हैं। रोपवे का आने जाने का किराया 43 रुपये है। ( रोपवे पूछताछ - 0783-232993)  


नवरात्र में मेला - वैसे तो मंदिर में साल भर दर्शनार्थी पहुंचते हैं। पर यहां दशहरा और रामनवमी के त्योहार पर राज्य भर से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवविवाहित जोड़े,  नवजात बच्चों को लेकर देवी का आशीर्वाद दिलाने साल भर यहां आते हैं। दोनों नवरात्र में पहाड़ी के नीचे मेला लगता है, नवरात्र में लाखों श्रद्धालु बमलेश्वरी के दर्शन के लिए आते हैं।

पदयात्रा कर मां के दरबार में - नवरात्रि के समय तो मीलों पैदल चलकर मां के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रदेश के प्राय: सभी क्षेत्रों से लोग नवरात्र शुरू होते ही पैदल डोंगरगढ़ तक की यात्रा करते हैं।

मंदिर सुबह 4.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक और दोपहर 2.30 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर परिसर में छिरपानी कैंटीन के पास श्रद्धालुओं के रहने के लिए बमलेश्वरी ट्रस्ट की ओर से निर्मित धर्मशाला उपलब्ध है। इसमें समान्य कमरे से लेकर वातानुकूलित और कूलर वाले कमरे रियायती दरों पर उपलब्ध हैं।

कैसे पहुंचे - मां बमलेश्वरी के दरबार से सबसे निकट का रेलवे स्टेशन डोंगरगढ़ है। यह छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 106 किलोमीटर है। यह नागपुर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव आदि शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। अलावा रायपुर से डोंगरगढ़ सड़क मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। मां बमलेश्वरी ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाएं। आप इस मंदिर के एचडीएफसी बैंक की साइट से  ऑनलाइन भी दान कर सकते हैं। 



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