Thursday, January 8, 2015

बंगाल की कटवा-बलगोना नैरोगेज लाइन हुई बंद

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के अलावा पश्चिम बंगाल में बलगोना और कटवा के बीच 28 किलोमीटर लंबी नैरोगेज सेवा 2014 तक संचालन में थी। 99 साल के सफर के बाद ये रेलवे लाइन इतिहास के पन्नों में समा गई। 30 नवंबर 2014 को इस रेलवे लाइन ने अपना आखिरी सफर पूरा किया। 1 दिसंबर 1915 को इस लाइट रेलवे की शुरुआत मैकलोड लाइट रेलवे कंपनी ने की थी। ये कंपनी लंदन के मैकलोड रसेल एंड कंपनी की सहायक कंपनी थी। इसने बर्दवान कटवा के बीच 53 किलोमीटर ( 33 मील) लाइन का निर्माण किया था।


 इसी कंपनी ने तीन और नैरोगेज लाइनें देश में बिछाई थीं। ये लाइनें थीं- बांकुड़ा दामोदर रेलवे, कालीघाट फालटा रेलवे और अहमदपुर कटवा रेलवे। पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में बर्दवान और कटवा के बीच नैरोगेज लाइन पर रेलगाड़ियों का संचालन 1 दिसंबर 1915 को आरंभ हुआ था। 1966 तक ये रेलवे लाइन निजी कंपनी द्वारा ही संचालित की जा रही थी। 1966 में यह पूर्व रेलवे का हिस्सा बन गई। 2014 तक चल रही बलगोना और कटवा के बीच नैरोगेज अधिकतम 30 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चलती थी। दोनों ही स्टेशन ब्राडगेज के प्वाइंट थे। पर इन दोनों शहरों को जोडने वाली ये नैरोगेज लाइन भारतीय रेल के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही थी। अब इस मार्ग पर भारतीय रेलवे ब्राडगेज लाइन का निर्माण करेगी।

कुछ सालों पहले ये बर्दवान से कटवा की बीच संचालित हो रही लाइन को बीके रेलवे के नाम से पुकारा जाता था। बाद में इसे बालगोना से कटवा के बीच ही सीमित कर दिया गया। यह लाइन 2 फीट 6 इंच ( 762 एमएम)  चौड़ाई वाली हुआ करती थी। आखिरी दौर में इस डीजल लोको से संचालित किया जा रहा था। कटवा और बालगोना के बीच का किराया 10 रुपये हुआ करता था। कटवा बलगोना मार्ग पर परिचालन बंद किए जाने का नोटिस जब इस मार्ग के रेलवे स्टेशनों पर चिपकाया गया तब आसपास के लोगों ने इस ट्रेन पर खूब सफर करना शुरू किया। सभी एक इतिहास बनने जा रही ट्रेन पर आखिरी सफर कर लेना चाहते थे। इस मार्ग पर छात्र शिक्षक और दैनिक यात्रा करने वाले लोगों रोज सफर किया करते थे।

बंगाल के लोग बांग्ला में इस रेलवे लाइन को बीके लाइन ( बर्दवान कटवा) की जगह बड़ो कष्टेर ( बहुत कष्ट वाला) लाइन कहकर पुकारते थे।  ऐसा इसलिए क्योंकि इस लाइन पर ट्रेन 15 किलोमीटर प्रति घंटेकी रफ्तार से चलती थी। भले ही इसे कष्ट का सफर माना जाता हो पर 80 के दशक तक इस रेलवे लाइन पर चलने वाली ट्रेनों में प्रथम श्रेणी, दूसरी श्रेणी, तीसरी श्रेणी के कोच हुआ करते थे। किसी जमाने में ये ट्रेन 30 किलोमीटर प्रतिघंटे के अधिकतम रफ्तार से चलती थी। पर बाद में इसकी गति घटकर 15 किलोमीटर प्रति घंटे ही रह गई।

2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बर्दवान से बलगोना तक के रेलमार्ग को बड़ी रेलवे लाइन में बदलने के काम शिलान्यास किया था। 2012 में ये रेलवे लाइन बड़ी लाइन में बदल दी गई। तब से बलगोना से कटवा तक ही नैरोगेज सिमट कर रह गई थी। अब 2014 में नैरोगेज लाइन बंद होने के बाद बड़ी लाइन बनने का मार्ग प्रशस्त है। कटवा में नेशनल थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट स्थापित होने जा रही है। लिहाज इस लाइन को बड़ी लाइन बनाने के लिए एनटीपीसी भी भारतीय रेलवे को 112 करोड़ 57 लाख रुपये का सहयोग दे रही है।

-vidyutp@gmail.com

( BENGAL, NARROW GAUGE, KATWA, BALGONA, BARDHAMAN  ) 

1 comment:

  1. भाई ये सूचनाएं ग़ज़ब की हैं। पुस्‍तक के रूप में प्रकाशित कराइये

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