Saturday, February 21, 2015

जनशताब्दी एक्सप्रेस का सुहाना सफर – जबलपुर से इटारसी

मध्य प्रदेश का शहर जबलपुर। इसे मध्य प्रदेश के लोग संस्कार धानी कहते हैं। पर रेलवे स्टेशन के दोनों तरफ मुआयना करने पर कोई ऐसी बात नजर नहीं आती। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक की तरफ बाहर निकलो तो काफी दूर जाकर बाजार है। वहीं प्लेटफार्म नंबर छह के बाहर की सड़क पर गंदगी का आलम है।

 दोनों तरफ शराब की दुकानें और टूटी फूटी सड़के शहर को लेकर प्रथम दृष्टया प्रभाव को खराब करती हैं। रेलवे स्टेशन दोनों तरफ कोई आवासीय होटल लाज आदि नहीं है। अगर आपको शहर में रात गुजारनी है तो बस स्टैंड जाना होगा। बड़ी मुश्किल से प्लेटफार्म नंबर छह की तरफ बाहर आने पर होटल विक्रम नजर आया। पर होटल के कमरे बुरी हालत में थे। सुबह सुबह ट्रेन पकड़नी थी इसलिए इसी में ठिकाना बनाना पड़ा।

सुबह जबलपुर से भोपाल जनशताब्दी एक्सप्रेस की टिकट लेने पहुंचा। एक खास काउंटर पर पीले रंगे के पुराने गत्ते वाले टिकट के दर्शन हुए। सबसे अच्छी बात की टिकट के पीछे कोच नंबर और बर्थ नंबर लिख कर दिया जा रहा था। पता चला कि एक कोच की पूरी टिकटें रेलवे स्टेशन से करंट में मैनुअल तरीके से बुक की जाती हैं। ये बड़ी अच्छी बात रही मेरे हक में। मुझे इटारसी जाने के लिए तुरंत फुरंत आरक्षित टिकट मिल गया।

जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 5 से समय पर खुली। ट्रेन के आगे बढ़ने पर उगते हुए सूर्य के दर्शन हुए। नरसिंहपुर के पास सुहानी सुबह देखने को मिली।
उगता सूरज...नरसिंहपुर मध्य प्रदेश - फोटो - विद्युत 

थोडी देर बाद पिपरिया स्टेशन आया। पिपरिया मध्य प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन पचमढ़ी जाने के लिए सबसे निकट का रेलवे स्टेशन है। यहां से पचमढी 55 किलोमीटर है। ट्रेन ने सही समय पर इटारसी पहुंचा दिया। इटारसी वह स्टेशन है जहां से मैं अनगिनत बार गुजर चुका हूं। सबसे अच्छा लगता है इस स्टेशन पर मिलने वाला सस्ता और अच्छा खाना। कभी यहां मैंने खाई थी 30 पैसे की रोटियां। अभी भी यहां 20 रुपये का खाना मिल जाता है।

इस बार मैं इटारसी स्टेशन से बाहर निकला। नास्त में लिया पोहा और जलेबी। मध्य प्रदेश का सदाबहार नास्ता। 15 रुपये में। वैसे यहां कई जगह 5 रुपये का पोहा भी मिलता है। मुझे लगता है ये देश का सबसे सस्ता और अच्छा नास्ता है।

मुझे जाना है बैतूल। पर वहां के लिए जाने वाली ट्रेन देर से है। मैंने इस सफर बस से करने की सोची। इटारसी रेलवे स्टेशन के बगल में ही बस स्टैंड है। मध्य प्रदेश में तो सरकारी बसें चलती ही नहीं है। बैतूल के लिए निजी बस जाने को तैयार थी। मिनी बस थी। जगह मिल गई।

हालांकि बस में काफी भीड़ थी, पर रास्ते में लोग उतरते जा रहे थे। 90 किलोमीटर का सफर। कसला, सुखतवा, भौरा, शाहपुर, बरठा, नीमपानी पाढर के बाद आ गया बैतूल। अब बैतूल की बातें अगले अध्याय में।



( JABALPUR TO ITARSI, JAN SHATABDI EX.  ) 

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