Friday, January 30, 2015

घड़ी चौक से धड़कता है रायपुर का दिल

रायपुर रेलवे स्टेशन की बाह्य नजारा काफी खूबसूरत दिखाई देता है। स्टील के फ्रेम से सजी स्टेशन की इमारत इस बात का संदेश देती है कि राज्य में बड़े स्टील प्लांट हैं। स्टेशन परिसर से शहर के कोने कोने में जाने के लिए सिटी बसें और आटो रिक्शा मिलते हैं। स्टेशन के बाहर देर रात तक चहल पहल रहती है। वहीं स्टेशन के प्लेट फार्म नंबर के एक के आसपास कई अच्छे फूट ज्वाएंट्स भी बन गए हैं। पर शहर का दिल धड़कता है घड़ी चौक से। रायपुर शहर के बीचों बीच स्थित है नगर घड़ी चौक। शहर के हर इलाके से घड़ी चौक के लिए आटो रिक्शा मिलते हैं। इसी तरह घड़ी चौक से शहर के दूसरे सभी कोनों के लिए वाहन मिल जाते हैं।

घड़ी चौक चौक पर कोने में विशाल घड़ी लगी है जिसके चारों तरफ समय देखा जा सकता है। इस घडी की खास बात ये है कि हर घंटे पर जो ध्वनि सुनाई देती है उसमें छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खूशबु महसूस की जा सकती है। घंटे के साथ लोकसंगीत की धुन सुनाई दे जाती है। ये है इस घड़ी की खास बात। रायपुर शहर के लोगों के लिए घड़ी चौक उनके जीवन में रचा बसा है पर बाहर से आए लोगों के लिए ये कौतूहल की बात हो सकती है। घड़ी चौक से थोड़ी दूरी पर ही राज्यपाल का निवास है।

रायपुर शहर के पुराने मुहल्लों के नाम में पारा लगा हुआ है। बंगाल के शहरों  पाड़ा लगता रहता है। रायपुर के पुराने मुहल्लों में है रामसागर पारा जहां लोकप्रिय समाचार पत्र देशबंधु का दफ्तर है। इसके अलावा नर्मदा पारा,  लोधी पारा , नवा पारा जैसे मुहल्ले शहर में हैं।

अब रायपुर शहर से बाहर राजिम मार्ग पर नई राजधानी बसाई गई है। रायपुर से 25 किलोमीटर आगे बस रही नई राजधानी का का नाम नया रायपुर दिया गया है। इसे चंडीगढ़ और गांधीनगर की तरह प्लांड सिटी के तौर पर बसाया जा रहा है। शहर को जोड़ने के लिए अच्छी सड़कें और रेलवे लाइन भी बिछाई जाने वाली है।

पांच रुपये में दाल भात
रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर है रायपुर की सेंट्रल जेल। जेल के मुख्य द्वार के पास माता का मंदिर है। वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर चलाया जाने वाला एक फूड स्टाल है। दाल भात का स्टाल। यहां पांच रुपये में दाल भात मिलती है। सबके लिए। मुझे तमिलनाडु में चलाए जाने वाले अम्मा किचेन की याद आ गई जहां सबके लिए इडली सांभर और चावल रियायती मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है। तो छत्तीसगढ़ में चाउर वाले बाबा रमन सिंह की योजना है पांच रुपये में दाल भात। हालांकि ये भरपेट नहीं है, फिर भी गरीबों को राहत तो देती है। हालांकि राज्य के कई इलाके में शुरू किए गए अन्नपूर्णा दाल भात सेंटर बंद हो चुके हैं। कई जगह योजना लोकप्रिय नहीं हो सकी। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2005 में ये योजना आरंभ की थी। थोड़ी मात्रा में दाल भात को काफी लोगों ने पसंद नहीं किया। वहीं राज्य सरकार की दो रुपये किलो की दर से बीपीएल परिवार को चावल देने की योजना के कारण भी ये सेंटर ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सके।
झारखंड में अर्जुन मुंडा की सरकार ने भी 5 रुपये में दाल भात की योजना शुरू की थी। पर हेमंत सोरन की सरकार ने ऐसे सेंटरों को चावल उपलब्ध कराना बंद कर दिया। लिहाजा वहां भी योजना दम तोड़ रही है। 

-    -  विद्युत प्रकाश मौर्य





1 comment:

  1. यह दालभात सेंटर छत्तीसगढ का सबसे अच्छा चलने वाला सेंटर है।पूरी तरह से सुसज्जित,और स्वच्छ है।इसकी दीवारों में सेरामिक टाइल्स,फर्श में विट्री फाइड टाइल्स और ग्रेनाइट लगे हुए हैं।
    खाने के लिए टेबल कुर्सी की व्यवस्था है।पंखे कूलर और वाटर कूलर भी लगे हुए हैं।
    5 र् में भरपेट दाल भात मिलता है।रूचि के अनुसार रोटी सब्जी अचार पापड़ भी कम दाम में उपलब्ध है।
    रोज लगभग 800 से 1000 आदमी खाना खाते हैं।
    जेल परिसर में होने से कैदियों के और सामने अंबेडकर आल होने से मरीजों के परिजन इसका लाभ उठाते हैं।इसके अतिरिक्त राहगीर,वाहन चालक,मजदूर वर्ग भी यहाँ आते हैं।व्यवस्था से प्रभावित माध्यम आमदानी के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं।
    मैं मोहन चोपड़ा इसका संचालन विगत 12 वर्षों से कर रहा हूँ।
    अवलोकनार्थ आप आमत्रित हैं।

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