Thursday, February 19, 2015

इतिहास के पन्नों में समा गया सतपुड़ा नैरो गेज

नागपुर से छिंदवाड़ा की इस ऐतिहासिक नैरो गेज रेलवे लाइन को ब्राडगेज में परिवर्तित करने का फैसला इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में लिया गया।  इसमें कुछ रेलवे स्टेशनों का स्थान बदला भी जा रहा है। 2007-08 में इस लाइन को ब्राडगेज में बदलने का काम शुरू हुआ था।

इसका लक्ष्य 2011 में इसे पूरा कर लेने का था। पर काम धीमी गति से चलता रहा। इससे प्रोजेक्ट की लागात में भी इजाफा हुआ। इस लाइन पर सौंसर के पास 69वें किलोमीटर पर एक सुरंग का भी निर्माण किया जा रहा है। इस मार्ग पर भिमालगोंडी और भंडाराकुंड के बीच काफी घने जंगल और घाटियां हैं। 

निर्माण में आ रही मुश्किलों और चुनौतियों के कारण इस परियोजना में कई साल की देरी हुई। इस मार्ग पर रामाकोना के पास कानहन नदी पर नए पुल का निर्माण किया गया है। जब 2007 में इस आमान परिवर्तन परियोजना की शुरुआत हुई तो इसकी लागात 663.66 करोड़ रुपये आंकी गई थी, पर अब देरी के कारण इसके लागात में इजाफा होता जा रहा है।

 इसी तरह जबलपुर से बालाघाट तक 177 किलोमीटर के मार्ग को ब्राडगेज में बदलने का काम जारी है। पर यह काम भी धीमी गति से चल रहा है। साल 2015 तक जबलपुर से नैनपुर रेल खंड पर शुरुआत के 40 किलोमीटर तक तो ब्राडगेज लाइन बिछाई भी जा चुकी थी।


इस रेल मार्ग में कई जगह पुराने मार्ग में बदलाव किया गया है। जबलपुर से आगे नर्मदा नदी के तट पर ग्वारीघाट का नया स्टेशन पुराने स्टेशन से एक किलोमीटर आगे बनाया गया है। इस मार्ग पर ब्राडगेज परिवर्तन के दौरान रेलवे को जमीन अधिग्रहण और वन विभाग से क्लियरेंस लेने में भी दिक्कते आईं। इन सब कारणों से परियोजना का समय आगे बढ़ता जा रहा है। इस मार्ग पर ब्राडगेज बनने के बाद जबलपुर और गोंदिया के बीच पुराने 29 रेलवे स्टेशनों की जगह 31 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें निधानी और गढ़ा दो नए स्टेशन बनाए गए हैं।
सतपुड़ा के जंगलों से होकर गुजरने वाले इस रेल मार्ग को ब्राडगेज करने में कई जगह पर वन विभाग से क्लियरेंस प्राप्त करने में दिक्कतें आने के कारण प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। पर इस रेलवे लाइन का सामरिक महत्व है। इस लाइन के ब्राडगेज हो जाने से उत्तर भारत से दक्षिण भारत की दूरी में 200 किलोमीटर से ज्यादा की कमी आ जाएगी, ऐसा रेलवे की योजना में है। जबलपुर से इटारसी होकर नागपुर जाने के बजाय जबलपुर-नैनपुर-बालाघाट गोंदिया होकर बल्लारशाह पहुंचा जा सकता है।
-vidyutp@gmail.com



No comments:

Post a Comment