Thursday, January 29, 2015

बिलासपुर वाली भौजी...

बिलासपुर यानी छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा शहर। छत्तीसगढ़ में इसे न्यायधानी कहते हैं क्योंकि यहां राज्य का हाईकोर्ट स्थित है। ये राज्य का चाकचिक्य वाला शहर है। रेलवे स्टेशन अति व्यस्त है। बिलासपुर में मेरे कालेज के दिनों के दोस्त रहते हैं असुरारि प्रसाद। पर समय के अभाव के कारण मैं उनसे मिलने नहीं जा पाया। शाम को हमने यहां से कोरबा मेमू पकड़ी। मेमू ने या मेन लाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट। ऐसी ट्रेन बड़े शहर से आसपास के शहरों को जोडने के लिए चलाई जाती हैं। इसके डिब्बे आपस में जुड़े होते हैं। साथ ही इसमें टायलेट भी होता है। ट्रेन अपने समय से चल पड़ी। हमारे आसपास कई देवर भौजाई सफर कर रहे थे। सो सफर के साथ उनकी चुहलबाजी भी जारी थी। भौजाई बड़ी शोख थीं। वे देवर जी के साथ कोई परीक्षा देकर लौट रही हैं। उन्हें पूरी उम्मीद थी इस सरकारी नौकरी को लेकर। भैया दुखी हो रहे थे जब से शादी हुई है बीवी का हुकुम बजा रहा हूं। अपने मन की बात नहीं कर पाता। इससे तो कुआंरा ही भला था। भौजाई तो ऐसा पति पाकर पुलकित थीं। मुझे याद आया हमारी भी एक भारी बिलासपुर वाली हैं। बड़ी चंचल और शोख। पर अब ले कलकतिया भौजाई बन गई हैं। बातों बातों में चांपा जंक्शन या हमारी मंजिल आ गई। चांपा जंक्शन पर रेलवे बुक स्टाल चलाने वाले सज्जन आरा ( बिहार) के रहने वाले हैं।

बात बिलासपुर की कर रहा था। मुझे याद आता है जब 2007 में मैं ईटीवी के मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ चैनल में हुआ करता था तब बिलासुपुर की खबरें रोज मिलती थीं। बड़ा जिंदादिल शहर है बिलासपुर। वैसे देश में दो और बिलासपुर हैं। एक तो हिमाचल प्रदेश का जिला है बिलासपुर। दूसरा बिलासपुर उत्तर प्रदेश में रामपुर के पास है। छत्तीसगढ़ का बिलासपुर इतिहास में कलचुरि शासकों के अधीन आता था जिनकी राजधानी रतनपुर में थी। शहर में गुरुघासीदास विश्वविद्यालय है। अभी सुंदरलाल शर्मा खुला विश्वविद्यालय की स्थापना भी शहर में हुई है। बिलासपुर अब साउथ इस्ट सेंट्रल रेलवे यानी रेलवे के एक जोन का मुख्यालय भी है।

 इस जोन में छत्तीसगढ, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के स्टेशन आते हैं। बिलासपुर में मुझे रेलवे की उदघोषणा सुनकर सुखद अचरज हुआ। यहां अंग्रेजी हिंदी के अलावा छतीसगढ़ी जुबान में भी आने जाने वाली ट्रेनों की जानकारी दी जाती है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी दुग्ध उत्पादक ब्रांड भी पेड़े का निर्माण करता है। इसके पेड़े के ब्रांड का नाम देवभोग है। 160 रुपये में आधा किलो पेड़ा। छत्तीसगढ़ के ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर देवभोग पेडे के स्टाल दिखाई दे जाते हैं। अगर आप छत्तीसगढ़ में हैं इन पेडे का स्वाद जरूर लें।

--- विद्युत प्रकाश मौर्य
बिलासपुर पर केंद्रित एक वेबसाइट - http://www.merabsp.com/


No comments:

Post a Comment