Sunday, January 25, 2015

अमरकंटक के प्राचीन मंदिर

अमरकंटक में नर्मदा कुंड के ठीक सामने अति सुंदर मंदिरों का समूह दिखाई देता है। यह एक प्राचीन मंदिर समूह का परिसर है। इस परिसर की देखरेख भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के अधीन है। सुबके सूर्य की पहली किरण के साथ ये मंदिर समूह दमकते हुए दिखाई देते हैं।

इस परिसर में स्थित मंदिरों का निर्माण कलचुरि शासन काल में दसवीं से 12वीं सदी के बीच हुआ है। इन मंदिरों को देखकर लगता है कि उस काल खंड में अमरकंट अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक क्षेत्र रहा होगा। इन मंदिरों को देखने के लिए सुबह 6 बजे से सूर्यास्त तक देखा जा सकता है। यह पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इस परिसर में सबसे प्रमुख मंदिर है पतालेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव का मंदिर है। 



इन मंदिरों का निर्माण कलचुरि शासक कर्णदेव ने कराया था। कर्णदेव का काल 1041 से 1073 ईश्वी का रहा है। मंदिर के निर्माण में बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। कलचुरि शासक कर्णदेव के काल को स्थापत्य कला की दृष्टि से समृद्ध काल माना जाता है। मुखमंडप, मंडप और गृभगृहों का बनावट अदभुत है। मंडप की बाहरी दीवारें खुली हुई हैं और छतें अलंकृत स्तंभों पर खड़ी हैं।

पतालेश्वर मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण मूल रूप से शंकराचार्य ने आठवीं सदी में कराया था। बाद में राजा कर्णदेव ने उसे शानदार वास्तुकला का रूप प्रदान किया। इस मंदिर में शिवलिंग धरती से 10 फीट नीचे स्थापित है। कहा जाता है कि श्रावण मास के अंतिम सोमवार को शिवलिंग के ऊपर तक जल भर जाता है। कहा जाता है मां नर्मदा खुद भगवान शिव को तब स्नान कराने आती हैं।

यहां दूसरा प्रमुख मंदिर रंग महला है कहा जाता है मां नर्मदा के जब शिशु रूप में थी तब उनके आमोद प्रमोद और खेलने के लिए रंग महल का निर्माण कराया गया। इन मंदिरों को संयुक्त तौर पर कर्ण मठ के नाम से भी जाना जाता है। वैसे पूरे अमरकंटक में नए पुराने मिलाकर कुल 30 मंदिर हैं। 



नर्मदा कुंड से थोड़ी दूरी पर मार्कंडेय आश्रम, गायत्री शक्तिपीठ भी स्थित है। नर्मदा मंदिर से एक किलोमीटर आगे सोनमुडा के रास्ते में शुकदेवानंद जी द्वारा निर्मित श्रीयंत्र महामेरू मंदिर स्थित है। मंदिर का गुंबद 52 फीट ऊंचा है। हालांकि इस मंदिर में जाने पर वीरानगी नजर आती है। मंदिर के अंदर फोटोग्राफी निषेध, मूर्तियों को छूना मना है जैसे कई बोर्ड लगे हुए हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य  

(AMARKANTAK, OLD TEMPLE, RANG MAHLA, KALCHURI EMPIRE ) 




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