Thursday, January 22, 2015

पेंड्रा रोड से अमरकंटक का सफर

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से अमरकंटक जाने का रास्ता बिल्कुल ग्रामीण माहौल का आभास देता है। सड़कें महज 12 फीट चौड़ी हैं जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई हैं। कई जगह सड़के टूटी हैं तो कई जगह बारिश के कारण भू स्खल हो गया है। आप छतीसगढ़ से मध्य प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अमरकंटक के मध्य प्रदेश में होने के कारण छतीसगढ़ सरकार संपर्क सड़क बनवाने  को लेकर उदासीन है। हालांकि अमरकंटक में मध्य प्रदेश से ज्यादा छतीसगढ़ के लोग रोज भ्रमण करने आते हैं।

पेंड्रा से अमरकंटक की दूरी 45 किलोमीटर है। जलेश्वर महादेव के बाद मध्य प्रदेश का हाईवे आ जाता है, जो अपेक्षाकृत चौड़ी सड़क है। वैसे पेंड्रा से अमरकंटक जाने के तीन रास्ते हैं। दूसरा रास्ता पाकरिया होकर जाता है। रास्ते गंवई हैं पर मनोरम हैं। आसपास में देखकर आनंद आता है। सुकुन मिलता है।

मैं एक शेयरिंग जीप में हूं। शहर से पांच किलोमीटर बाहर निकलने के बाद हमारी जीप रूक जाती है क्योंकि दो यात्रियों का सामान इस जीप में रह गया है और वे यात्री वहीं छूट गए हैं। अब उऩका इंतजार हो रहा है। वे दूसरे टैक्सी वालों की मदद से लिफ्ट लेकर आते हैं। पता चला कि दोनों अमरकंटक में फोटोग्राफी का काम करते हैं। आधे घंटे के बाद फिर से आगे का सफर आरंभ हुआ। 

समुद्र तल से 1065 मीटर ऊंचाई पर स्थित अमरकंटक में मध्‍य भारत के विंध्य और सतपुड़ा की पहाडि़यों का मेल होता है। सर्दियों में अमरकंटक का तापमान कई बार शून्य डिग्री तक गिर जाता है। यहां के लोग बताते हैं कि किसी जमाने में यहां गर्मियों में भी पंखे नहीं चलाने पड़ते थे। पर अब जंगलों को कटाव के कारण तापमान बढ़ा है। फिर भी ये धार्मिक स्थल होने के साथ मध्य प्रदेश का लोकप्रिय हिल स्टेशन है। सात हजार के आसपास आबादी वाले अमरकंटक तक पहुंचने के लिए सड़क धीरे धीरे ऊपर की ओर चढ़ती नजर आती है। यहां की सरकार को आखिर पेंड्रा रोड से अमरकंटक तक नैरो गेज रेल लाइन बिछाने का ख्याल क्यों नहीं आया।

अमरकंटक में सुबह की चाय...
इस खूबसूरत हिल स्टेशन पर अमरकंटक सालों भर पहुंचा जा सकता है। चाहे आप धार्मिक भावना से आएं या फिर एक सैलानी की तरह प्राकृतिक नजारों को देखने, निराश नहीं होंगे। ये न सिर्फ हिंदू बल्कि जैन, सिक्ख और कबीरपंथी मतावलंबियों की आस्था का भी बड़ा केंद्र है। अमरकंटक में नर्मदा सोन और जोहिला नदी का उद्गम स्थान है। तो यहां गुरुनानक देवजी की याद में गुरूद्वारा और प्रसिद्ध जैन मंदिर है। यहां के खूबसूरत झरने, पवित्र तालाब, ऊंची पहाडि़यों और शांत वातावरण सैलानियों को मंत्रमुग्‍ध कर देते हैं। अमरकंटक बहुत से आयुर्वेदिक पौधों मे लिए भी प्रसिद्ध है‍, जिन्‍हें किंवदंतियों के अनुसार जीवनदायी गुणों से भरपूर माना जाता है।

अमरकंटक- बर्फानी आश्रम। 
अमरकंटक जाने वाली टैक्सियां नर्मदा कुंड के पास पहुंचती हैं तो बस स्टैंड यहां से एक किलोमीटर आगे है। अमरकंटक में रहने के लिए नर्मदा कुंड के कई विकल्प मौजूद हैं। मैंने अपना ठिकाना बनाया कुंड के ठीक पीछे बर्फानी आश्रम में।
( बर्फानी आश्रम का संपर्क - 9425344759) इस विशाल आश्रम में रहने के लिए बड़ी संख्या में किफायती कमरे मौजूद हैं। चारों तरफ कमरे। बीच में विशाल आंगन। हालांकि रात में खूब ठंड लगी। इस आश्रम में मंदिर भी है। साथ ही यहां कई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण भी होता है। यहां ठहरने वालों के लिए कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध है। अगर कम लोग हों तो आपको खाने के लिए पहले से कहना होगा। वैसे यहां जैन धर्मशाला, गुरुद्वारा गुरुनानक समेत कई और आश्रमों में ठहरा जा सकता है। अमरकंटक में शाकाहारी खाने की थाली 60 से 80 रुपये में उपलब्ध है।

-    ----  विद्युत प्रकाश मौर्य

( PENDRA ROAD, AMARKANTAK, MADHYA PRADESH, BARFANI ASHRAM  )



4 comments:

  1. सुन्दर !
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है !
    पोस्ट्स पसंद आये तो कृपया फॉलोवर बनकर हमारा मार्गदर्शन करे

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