Monday, December 22, 2014

शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान जलालउद्दीन मोहम्मद अकबर सो रहे हैं यहां

आपने दिल्ली में हुमायूं का मकबरा देखा होगा। आगरा के ताजमहल को उसकी प्रतिकृति माना जाता है। पर हुमायूं के बेटे और मध्यकालीन भारत के सबसे महान शासक की मजार है आगरा के सिकंदरा में। हालांकि आगारा में ताजमहल देखने पहुंचने वाले सैलानियों में से कम ही लोग होते हैं जो सिकंदरा में इस महान शासक की मजार को देखने पहुंचते हैं। अपने मकबरे निर्माण खुद अकबर ने शुरू करवाया था। 119 एकड़ में फैला हुआ ये मकबरा 8 साल में बनकर तैयार हुआ। ताजमहल और हुमायूं के मकबरे की तरह ही ये चार बाग शैली में बना है।

यह मकबरा हिंदू, ईसाई, इस्‍लामिक, बौद्ध और जैन कला का सर्वोत्‍तम मिश्रण है। लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही अकबर की मृत्‍यु हो गई। बाद में उनके पुत्र जहांगीर ने इसे पूरा करवाया। जहांगीर ने मूल वास्तु योजना में कई बदलाव करवाए। इस इमारत को देखकर पता चलता है कि मुगल वास्तु कला कैसे विकसित हुई।

पांच मंजिला है मकबरे की मुख्य इमारत - वर्गाकार योजना का यह मकबरा पांच तल ऊंचा है जिसका प्रत्येक तल क्रमशः छोटा होता जाता है जो इसे पिरामिडनुमा आकार देता है। अकबर के मकबरे पास खड़े होकर जब आप किसी शब्द का उच्चारण करते हैं तो 30 सकेंड तक प्रतिध्वनित होता रहता है।

मकबरे के चारों कोनों पर तीन मंजिला चार मीनारें हैं। ये मीनारें लाल पत्‍थरों से बनी हैं जिन पर संगमरमर का सुंदर काम किया गया है। मकबरे के चारों ओर खूबसूरत बगीचे हैं। मुख्य दरवाजा जिससे आप प्रवेश करते हैं उसका नाम जहांगीरी दरवाजा है। मकबरे के बीच में बरादी महल है जिसका निर्माण सिकंदर लोदी ने करवाया था। सिकंदरा से आगरा के बीच में अनेक मकबरे हैं। पांच मंजिला इस मकबरे की खूबसूरती आज भी बरकरार है। सिकंदरा का नाम सिकंदर लोदी के नाम पर पड़ा।

नसीरुद्दीन हुमायूं और हमीदा बानो के पुत्र जलालउद्दीन मोहम्मद अकबर का जन्म 15 अक्तूबर 1542 को पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए उनका नाम बदरुद्दीन मोहम्मद अकबर रखा गया था। बद्र का अर्थ होता है पूर्ण चंद्रमा और अकबर उनके नाना शेख अली अकबर जामी के नाम से लिया गया था। हर साल उसके जन्मदिन पर मकबरे में उर्स लगता है। उसकी मृत्यु 27 अक्तूबर 1605 को आगरा में हुई। मात्र 14 साल की उम्र में 1556 में वे शासक बन गए। अकबर के राजनीतिक गुरु सूफी संत सलीम चिश्ती थे जिनकी मजार फतेहपुर सीकरी में है।

उत्तरी और मध्य भारत के सभी क्षेत्रों को एकछत्र अधिकार में लाने में अकबर को दो दशक लग गये थे। उसका प्रभाव लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर था और इस क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर सम्राट के रूप में उसने शासन किया।

दीन ए इलाही का संस्थापक -  कहा जाता है अकबर की रूचि पढ़ने में ज्यादा नहीं थी। उसकी रूचि कबूतरबाजी, घुड़सवारी, और कुत्ते पालने में अधिक थी।  किन्तु ज्ञानोपार्जन में उसकी रुचि थी। कहा जाता है, कि जब वह सोने जाता था, एक व्यक्ति उसे कुछ पढ़ कर सुनाता रह्ता था।  अकबर ने एक नए धर्म दीन-ए- इलाही की भी स्थापना की, जिसमें विश्व के सभी प्रधान धर्मों की नीतियों व शिक्षाओं का समावेश था।


कैसे पहुंचे- आगरा मथुरा मार्ग पर सिकंदरा में स्थित है अकबर का मकबरा। बस स्टैंड से महज 5 किलोमीटर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मकबरे की देखभाल करता है।

पदयात्रियों से टोल टैक्स -  भारतीय लोगों के लिए प्रवेश टिकट 10 रुपये है। 5 रुपये प्रवेश के लिए 5 रुपये टोल टैक्स है मकबरे के अंदर पदयात्रा के लिए जो आगरा विकास प्राधिकरण के खाते में जाता है। शुक्रवार को ये एडीए ये टोल नहीं वसूलता। 15 साल तक के बच्चों का प्रवेश निःशुल्क है। निजी वाहनों से आने वालों के लिए यहां पार्किंग का इंतजाम है।

vidyutp@gmail.com



1 comment:

  1. बढ़िया ज्ञानवर्धक ऐतिहासिक जानकारी प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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