Thursday, December 25, 2014

जोगिंदरनगर से मनाली वाया मंडी

कांगड़ा के मंदिरों के दर्शन के बाद हमारा सफर शुरू हुआ मनाली के लिए। हमने बैजनाथ पपरोला से मनाली के लिए बस पकड़ी। पता चला कि ये बस मंडी होकर जाती है। कैसा और कितने घंटे का सफर होगा इसको लेकर हम अनजान थे। जुलाई 2001 का समय कभी भी कहीं भी पहाड़ों में बारिश हो सकती है। हालांकि मनाली तक बारिश नहीं हुई। नेशनल हाईवे नंबर 20 पर मंडी तक का सफर 77 किलोमीटर का है। हम हिमाचल रोडवेज की समान्य किस्म की बस में हैं। बस पीछे पठानकोट से आ रही है। सुबह के दस बजे हैं। जोगिंदरनगर जो कांगड़ा घाटी रेलवे का आखिरी रेलवे स्टेशन है वहां से आगे निकलने के बाद बस एक लाइन होटल पर खाने के लिए रूक गई। मैं, मम्मी, पापा, स्वंय प्रकाश और मेरी एक बहन सभी पेट पूजा में लग गए। दोपहर थी, भूख थी खाना अच्छा था सो टूट पड़े। हालांकि भरपेट खाने के  बाद बस का सफर ठीक नहीं होता।
जोगिंदर नगर से मंडी के बीच हाईवे का सफर खतरनाक माना जाता है। रास्ते में कई तीखे मोड़ आते हैं। मोड पर सामने से आ रही गाड़ी को पास देने के लिए बस को कई बार रुकना पड़ता था। कहने का मतलब है मार्ग इतना चौड़ा नहीं था। रास्ते में मंडी से पहले कोई बड़ा बाजार नहीं आता। मंडी पहुंचने पर पता चला कि ये रास्ता अत्यंत खतरनाक पहाड़ी रास्तों में शुमार किया जाता है। इसमें चलने वाले ट्रक का एक पहिया तो हमेशा हवा में ही टंगा रहता है। खैर हम संकट पार कर चुके थे। बस मंडी बस डिपो में थोड़ी देर रूकी रही। मंडी वही शहर है जिसके नाम पर दिल्ली में मंडी हाउस है जिसमें आजकल दूरदर्शन का मुख्यालय है। मंडी कभी हिमाचल का प्रमुख राजघराना हुआ करता था।


पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी हाईवे से धर्मशाला, योल कैंट, लेह-लद्दाख, पालमपुर होल्टा कैंप को सेना के सामान की आपूर्ति होती है। वहीं हजारों की तादाद में मंडी, मनाली, मैक्लोडगंज, कांगड़ा मंदिर, ज्वालामुखी व चामुंडा देवी में देश और विदेशी से पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं।

मंडी से चलने पर बस ने व्यास दरिया का पुल पार किया और व्यास नदी के समांतर चलने लगी। एक तरफ व्यास दरिया की तेज धार तो दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़। रास्ता मनोरम होने के साथ डरवाना भी लगता है। रास्ते में एक सुरंग भी आती है। 
कुछ घंटे बाद हम कुल्लू शहर में थे। पर हमे कुल्लू  में रुकना नहीं था। शाम गहराने से पहले हमारी बस मनाली में प्रवेश कर गई। मनाली यानी हमारी ड्रिम डेस्टिनेशन। हम उछल पड़े। बस स्टैंड में उतरते ही तमाम एजेंटों ने हमें घेर लिया। पर हमें किसी ऐसे किफायती होटल की तलाश थी जिसमें दो कमरे साथ मिल जाएं। मैं और भाई साथ चले होटल ढूंढने। थोड़ी खोजबीन के बाद हमें मिल गया होटल ल्हासा में फेमिली सूट। होटल के कमरे से पहाड़ों की रंग बिरंगी रोशनी दिखाई दे रही थी। अगले तीन दिन हम इसी होटल में रहे। वैसे मनाली में 300 से ज्यादा होटल हैं। आप अपने बजट और पसंद के अनुसार होटल चुन सकते हैं।

-        -  विद्युत प्रकाश मौर्य ( जुलाई 2001) 

HOTEL LHASA 
Near telephone exchange,Model Town, Manali 
Phone no. : 01902-252134

(MANALI, HIMACHAL, KULLU, VYAS RIVER, HIDIMBA DEVI )


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