Wednesday, December 24, 2014

आबाद कर दो मेरे दिल की दुनिया... सलीम चिश्ती

फतेहपुर सीकरी के महल का बुलंद दरवाजा। 
महान सूफी संत हज़रत सलीम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह  समाधि आगरा शहर से 35 किलोमीटर दूर फतेहपुर सीकरी में स्थित है। 1580 -81 में बना ये मजार मुगल वास्तु कला का सुंदर नमूना है। यहां नि:संतान महिलाएं दुआ मांगने आती हैं। मन्नत मांगने वाले यहां के धागा बांधते हैं। मन्नत पूरी हो जाने का बाद लोग धागा खोलने भी आते हैं। उनकी मजार ज़नाना रौजा के निकट, दक्षिण में बुलन्द दरवाजे़ की ओर मुख किए हुए जामी मस्जिद की भीतर स्थित है। शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे।  वे अजमेर के ख्वाज़ा मुईनुद्दीन् चिश्ती के पौत्र थे।

अकबर को अपनी तीन बेगमो से भी कोई औलाद न हुई। एक दिन उन्हें सपना आया कि ख्वाजा की दरगाह पर मन्नत मांगने से औलाद होगी। तो वह स्वप्न में आए निर्देश के मुताबिक चल पड़े। कहते है बादशाह अकबर संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने अजमेर के ख्वाजा  मोईनुद्दीन चिश्ती के दरगाह के लिए पैदल ही निकल पड़ा था। रास्ते में ही सीकरी पड़ता था। वहां एक सूफी फ़कीर शेख सलीम चिश्ती से मुलाकात हुई।


फकीर ने अकबर को आशीर्वाद दिया तेरी मुराद पूरी होगी। कुछ समय पश्चात् अकबर की हिन्दू बेगम जोधाबाई गर्भवती भी हो गई। कहा जाता है कि अकबर ने जोधाबाई को डिलिवरी के लिए मायके  भेजने के बदले सीकरी के सलीम चिश्ती के पास ही भिजवा दिया।  1569  में वहीं एक पुत्र का जन्म हुआ।
सलीम चिश्ती को इज्जत बख्शने के लिए बालक का नाम सलीम ही रख दिया गया जो बाद में जाकर जहांगीर कहलाया। अकबर ने निश्चय कर लिया था कि जहां बालक पैदा हुआ वहां एक सुन्दर शहर बसायेंगे जिसका नाम था फ़तहबाद जिसे आज हम फतेहपुर सीकरी के नाम से जान रहे हैं। मुगल शासनकाल का यह प्रथम योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया एक वैभवशाली नगर था।

देश विदेश से बड़ी संख्या में लोग इस महान सूफी संत की दरगाह पर जियारत के लिए आते हैं। पांच दिसंबर 2010 को फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोजी और उनकी पत्नी कार्ला ब्रूनी फतेहपुर सीकरी पहुंचे, जो शहंशाह अकबर की राजधानी रह चुकी है। 

फ्रांस के राष्ट्रपति सार्कोजी और कार्ला ब्रूनी ने शेख सलीम बिन चिश्ती की दरगाह पर जियारत की। तो कैटरीना कैफ अपनी फिल्म के लिए मन्नत मांगने पहुंची। राजकुमार की एक पुरानी हिंदी फिल्म लाल पत्थर को याद करें। उस फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग इसी फतेहपुर सीकरी के महलों में हुई है। सलीम चिश्ती की दरगाह पर हर साल उर्स मनाया जाता है। यहां सूफी संत की शान में कव्वाली गाई जाती है...
थामो मेरा हाथ मौला सलीम चिश्ती, आका सलीम चिश्ती 
आबाद कर दो मेरे दिल की दुनिया... सलीम चिश्ती ....
-    विद्युत प्रकाश मौर्य

( IT IS A WORLD HERITAGE SITE LISTED IN 1986  ) 

No comments:

Post a Comment