Tuesday, December 23, 2014

आह ताज वाह ताज

एक ताजमहल और हजार अफसाने। कोई इसे मुहब्बत की निशानी कहता है तो कोई गरीबों की गरीबी का मजाक। देश का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला पर्यटक स्थल। मुहब्बत करने वाले ताज के साथ तस्वीरें खींचवाते हैं। तो बीवी बच्चों और कुनबे के साथ पहुंचने वाले भी तस्वीरें खींचवाते हैं। यहां आने वाले अपने साथ स्मृति के तौर पर छोटे छोटे ताज लेकर जाते हैं।

बदरंग होता ताज- भारतीय एवं अमेरिकी अनुसंधानकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया है कि हवा में तैरते कार्बन कणों एवं धूलकणों के चलते ताजमहल बदरंग होता जा रहा है और उसका चमचमाता सफेद रंग भूरा होता जा रहा है। जार्जिया इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नॉलोजी के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एटमोसफेरिक साइंसेज के प्रोफेसर माइकल बर्गिन की टीम ने यह पाया है कि ताजमहल को बदरंग कर रहे प्रदूषक बायोमास, अपशिष्ट, जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाले कार्बन कण और धूलकण हैं। अबतक माना जा रहा था कि बदरंग होने के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है लेकिन उसके लिए कोई व्यवस्थित अध्ययन नहीं किया गया था। अनुसंधानकर्ताओं को उपकरण के फिल्टर और मार्बल सैम्पलों पर भूरे आर्गेनिक कार्बन और काले कार्बन के कण मिले। बदरंग होने की वजह जानने के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने नवंबर, 2011 से जून, 2012 के बीच एयर सैम्पलिंग उपकरण का इस्तेमाल किया ताकि यह पता चल पाया कि ताजमहल परिसर के वायु में क्या है।

बेपनाह मुहब्बत की इस निशानी को सोलहवीं शताब्दी में मुगल शासक शाहजहां ने अपनी तीसरी बीवी मुमताज महल की याद में 1632 में बनवाया। संगमरमर का ताज 115 फीट उंचा है। इसके चारों तरफ 130 फीट उंचे चार मीनार हैं। कहते हैं कि उसने इसके मुख्य शिल्पी मुहम्मद ईशा खां के हाथ इसलिए कटवा लिए थे कि कोई दूसरा ताज कहीं और जाकर न बनवा दे। पर औरंगाबाद स्थित बीवी का मकबरा भी इसी की नकल लगता है। 1983 में यूनेस्को ने ताज को वैश्विक धरोहर स्थलों में शामिल किया।  ताज मुगल शैली  में चार बाग की डिजाइन में बना है। यानी इमारत के चारों तरफ बाग हैं।

तुमने जब भी पुकारा हमको आना पड़ेगा - कहते हैं शाहजहां को उसके बेटे जहांगीर ने बुढापे में कैद कर दिया और सल्तनत की गद्दी हथिया ली। पिता ने बेटे से इल्तिजा की ऐसी जगह कैद रखो जहां से हमेशा ताज दिखाई दे। तो शाहजहां ने आखिरी दिन कैद में मुमताज के ताज के देखते हुए गुजारे। उनकी कथा पर बनी फिल्म का गीत प्रसिद्ध है- जो वादा किया निभाना पडेगा...तुमने जब भी पुकारा हमें आना पड़ेगा। कहते हैं शाहजहां और मुमताज के बीच अमर प्रेम था। मुमताज शाहजहां की यादों में हमेशा रची बसी थी। मुमताज की मौत पर शाहजहां अर्धविक्षिप्त-सा हो गया था। वह सफ़ेद कपड़े पहनने लगा था। उसने तब ताज बनवाने का प्रण किया। कहते हैं कि मुहब्बत के प्रतीक विश्व विख्यात ताजमहल में मुमताज की कब्र पर आज भी शाहजहां के आंसू गिरते हैं। अब शाहजहां की कब्र भी ताजमहल में मुमताज के बगल में ही है।

ताज के साथ फोटो - हर किसी की तमन्ना ताज के साथ फोटो खिंचवाने की की होती है। मैं 1991 के सितंबर में पहली बार ताज महल पहुंचा। तह हम अलीगढ़ के राष्ट्रीय युवा योजना के शिविरार्थियों के साथ थे। तब ताज के साथ तस्वीर नहीं खिंचवा सका। गर्मी भीषण थी हमारे पैसा कैमरा भी नहीं था। तब मन मसोस कर रह गया। दुबारा मौका आया 2008 के मार्च में तब मेरी जीवन संगिनी और बाल गोपाल भी साथ थे। तब तो फोटो बनती ही थी न...
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ताज की आफिशियल वेबसाइट-  http://www.tajmahal.gov.in/



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