Saturday, November 29, 2014

दिल का लिए लाभकारी बुरांश का जूस

उत्तराखंड की हसीन वादियों में खिलने वाला चमकदार और खूबसूरत बुरांश का फूल सुस्वादु तो होता ही है, दिल के बीमारी की अचूक दवा भी है। यह अप्रैल और मई के दौरान खिलता है। बुरांश फूलों की कम से कम 24 विभिन्न किस्में मौजूद हैं। शिव के शृंगार के लिए प्रयुक्त होने वाला बुरांश उत्तराखंड की सामाजिक सांस्कृतिक जनजीवन में रचा बसा है। इसे राज्य वृक्ष का गौरव प्राप्त है।

कहां होता है बुरांश - 1400 से 3300 मीटर से अधिक ऊंचे स्थानों में पाये जाने वाले सुन्दर फूलों बुरुंश या बुरांश भी एक है जिसे नेपाली में गुरांस, अंग्रेज़ी में रोडोडेंड्रोन (Rhododendron) और एज़लीया (Azalea) भी कहते हैं। साल 2006 में नेपाल के राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के तौर पर लाली गुरांस को स्थान मिला है। रोडोडैंड्रोन की इस लाली गुरांस प्रजाति का बॉटैनिकल नाम रोडोडैंड्रोन आर्बोरियम (Rhododendron Arboreum) है।
बुरांश के फूल खूबसूरत होने के साथ औषधीय महत्व का है। इसके जूस का सेवन ह्दय संबंधी बीमारियों से बचा ही सकता है साथ ही शरीर में खून की कमी और लीवर संबंधी बीमारियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद है। इसके फूल से बना जूस ह्दय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए रामवाण है। यह हाई ब्लड प्रेशर में भी यह अचूक दवा है। बुरांश के जूस में पोली फैटी एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसके कारण यह शरीर में कॉलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता है। जो ह्दय संबंधी बीमारियां का खतरा कम हो कर देता है। बुरांश के फूलों से तैयार जूस व अन्य उत्पादों के सेवन से हृदय रोग नियंत्रण, खून बढ़ने के साथ शारीरिक विकास होता है। । हृदय रोग से पीड़ित लोग यदि प्रतिदिन एक गिलास बुरांश का जूस पिएं तो रोग जड़मुक्त हो जाएगा। जबकि शारीरिक विकास व खूनी की कमी में बुरांश का जूस व इससे तैयार उत्पाद अचूक औषधि का काम करती है।
प्राचीन काल से ही बुरांश को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बुरांश में लाल, सफेद, नीले फूल लगते हैं। लाल फूल औषधीय गुणों से भरपूर हैं। 
विटामिन बी कॉम्पलैक्स व खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में भी बुरांश का जूस दवा का काम करता है। इस बार जमकर हुई बर्फबारी व बारिश ने बुरांश के जंगलों में वर्षो पुरानी रौनक लौटा दी है। पहाड़ी क्षेत्रों के अनुकूल वातावरण में उगने वाला बुरांश की पत्ती, लकड़ी भी बहुउपयोगी है। इसकी पत्तियां जैविक खाद बनाने में उपयोग होती है जबकि लकड़ियां फर्नीचर बनाने में काम आती है।
उत्तराखंड के रीतिका मधुमक्खी पालन उद्योग से जुडे अशोक रावत ( 9411712603, 0135-2417287) बुरांश के जूस का निर्माण करते हैं। प्रगति मैदान में सरस मेले में अपना स्टाल लेकर आए अशोक रावत बताते हैं कि वे स्क्वैश बोतल की तरह बुरांश के जूस तैयार करते हैं। 90 रुपये की बोतल से 25 ग्लास जूस तैयार किया जा सकता है। उनकापता है बसंत निवास, बडकोट, डांडी देहरादून।

-          -  विद्युत प्रकाश मौर्य 

1 comment:

  1. वाह मन खुश हो गया बुरांस के बारे में उपयोगी जानकारी पढ़के.. हमारे गावं के जंगल में भी बुरांश के फूल होते हैं ...
    आभार आपका

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