Saturday, November 22, 2014

सोनवा के कटोरिया में दूध भात

नन्हे मुन्ने बच्चे जिनके दूध के दांत अभी नहीं टूटे वे बच्चे दूध भात ही खाते हैं और उनकी माताएं उन्हें लोरी गाकर खिलाती और सुलाती हैं। भोजपुरी समाज की अति प्रसिद्ध लोरी है चंदा मामा आरे आव पारे आव...लाखों माताओं ने अपने बच्चों को ये लोरी सुनाई होगी। पर ये लोरी वास्तव में एक फिल्म से ली गई है। 

1953 में आई फिल्म भौजी में लता मंगेशकर ने इस प्यारी सी भोजपुरी लोरी को गाया था। इसे संगीतबद्ध करा था चित्रगुप्तने। चित्रगुप्त का संबंध बिहार के छपरा शहर से था। यानी खांटी भोजपुरिया। तो इस गाने के बोल लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरीने। मजरूह साहब उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर से आते थे। उनके रगों में भी भोजपुरी रक्त दौड़ता था। और ये लोरी अमर हो गई। गीत बोल कुछ इस प्रकार हैं-

चंदा मामा आरे आव.. पारे आव
नदिया किनारे आव.. ।
सोनवा के कटोरिया में दूध भात ले ले आव...
बबुआ के मुंहवा में घुटूं ।।

आव हो उतरी आव हमारी मुंडेर
 कब से पुकारिले भईल बड़ी देर ।
भईल बड़ी देर हां बाबू के लागल भूख ।
ऐ चंदा मामा ।।

मनवा हमार अब लागे कहीं ना
रहिले देख घड़ी बाबू के बिना
एक घड़ी हमरा के लागे सौ जून ।
ऐ चंदा मामा ।।

यू ट्यूब पर मौजूद इस गाने का लिंक - https://www.youtube.com/watch?v=R7zBQmlKb60

हालांकि भौजी हिंदी फिल्म थी पर इस लोरी के बोल विशुद्ध भोजपुरी में हैं। एक शब्द में भी कोई बनावटीपन नहीं है। लता जी की मीठी आवाज में ये लोरी दिल को छू जाती है। बार बार सुनो..बार बार गुनगुनाओ तो भी जी नहीं भरता। इस गीत संवेदनाओं को अदभुत वेग है।

अब बात चंदा मामा की ही हो रही है त चंदा मामा पर एक लोरी फिल्म वचन में भी है। 1955 में आई इस फिल्म गीता बाली और बलराज सहनी थे। गीत के बोल हैं चंदा मामा दूर के पुए पकाएं गुर के...आप खाएं थाली में...मुन्ने को दें प्याली मे...प्याली गई टूट मुन्ना गया रूठ। दोनों ही गीतों में चंदा मामा हैं। यहां खाने में पूए हैं तो दूध भात। बच्चों को ये दोनों गीत खूब पसंद आते हैं।

-          विद्युत प्रकाश मौर्य


No comments:

Post a Comment