Wednesday, November 26, 2014

प्रभु यीशू यहां भोजपुरी में सुनते हैं प्रार्थना

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में सौ साल से ज्यादा पुराना एक ऐसा गिरिजाघर है जहां प्रभु ईसा की प्रार्थना भोजपुरी में की जाती है। वाराणसी के छावनी क्षेत्र में लाल गिरिजाघर ( C.N.I . LAL GIRJA VARANASI 1879 )   की स्थापना सन् 1879 में रेव्हटन एलबर्ट ने की थी। 18वीं सदी के यूरोपीय शैली में बने गिरिजाघरों की तर्ज पर इस वेस्लेयन मेथोडिस्ट चर्च (Wesleyan Methodist church ) को बाद में चर्च नॉर्थ ऑफ इंडिया गिरजाघरों में शामिल किया गया। लाल रंग से रंगे होने के कारण इसका नाम लाल गिरजा पड़ा। हर साल गिरिजाघर की क्रिसमस के पहले लाल रंग से पुताई की जाती है।

लाल गिरिजाघर में आसपास के गांवों के लोगों को सहजता से समझाने के लिए सरल भोजपुरी भाषा में प्रार्थना की जाती है। फादर ने दलितों और समाज के पिछड़े लोगों के साथ काम करते हुए भोजपुरी भाषा अपना कर उनको मुख्य धारा से जोडऩे के लिए ये कदम उठाया था। हर रविवार को भोजपुरी में प्रार्थना सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। इस गिरिजाघर के स्थापना के बाद से ही प्रार्थना तथा अन्य आयोजन भोजपुरी भाषा में ही किए जाते रहे। हर रविवार को ईसाई समुदाय के लोग यहां प्रार्थना के लिए आते हैं। रविवार को यहां प्रार्थना सुनने स्थानीय लोग भी जुटते हैं। प्रार्थना कुछ इस तरह से की जाती हैः 

प्रभु जी हम बेसराहा हंई,
हमनी का सहारा देई,
संसार में हमनी के लोग निर्बल समझेला,
 तोहार दृष्टि में हमनी के मूल्य अधिक होला..।

भले ही दुनिया भर में काशी की पहचान महादेव की नगरी के रूप में हो लेकिन अपने घाटों, पंडों,गलियों और अल्हड़ मस्ती के लिए मशहूर वाराणसी में यीशु के भक्तों के लिए कुछ न कुछ खास जरूर है। यहां का लाल गिरिजाघर वाराणसी के तमाम विशेषताओं में एक और अध्याय जोड़ता है।

हालांकि एक दौर ऐसा भी आया था जब लाल गिरिजाघर में भोजपुरी का चलन कम होने लगा था। चर्च की स्थापना के बाद से ही प्रार्थना और अन्य आयोजन भोजपुरी भाषा में ही किए जाते रहे थे। मगर बाद में बीच के दौर में लोगों का विरोध बढ़ा तो भोजपुरी का चलन भी कम होता गया। मगर 1991 में चर्च की 112 वीं सालगिरह के बाद फादर सैम जोशुआ सिंह के कार्यभार ग्रहण करते ही यहां हर रविवार और विशेष अवसर पर भोजपुरी कलीसिया (प्रार्थना) का आयोजन फिर से किया जाने लगा। फादर मानते हैं भोजपुरी में प्रार्थना के आयोजन से स्थानीय लोगों का जुड़ाव बढ़ता है।
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----विद्युत प्रकाश मौर्य

http://cniredchurch.com/about-us
( VARANASI, BANARAS, UTTRAR PRADESH)

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