Wednesday, October 15, 2014

ठप्प हो गई पूरे शहर की संचार प्रणाली

( जन्नत में जल प्रलय - 30 )
किसी राज्य की राजधानी की तमाम मोबाइल सेवाएं हफ्ते भर से ज्यादा बंद हों। लैंडलाइन फोन भी काम नहीं कर रहे हों। शायद आजाद भारत में ऐसा पहली बार हुआ हो। सात सितंबर की सुबह से ही जम्मू एंव कश्मीर की राजधानी की सारी संचार प्रणाली ठप्प थी। इसके जल्द शुरू होने के कोई आसार नहीं थे। संचार प्रणाली ठप्प होने के कारण लोग लाचार थे। सरकारी प्रशासन पंगु हो चुका था। किसी से किसी की बात नहीं हो पा रही थी। ये आलम अगले कई दिनों तक बना रहा। एक हफ्ते से ज्यादा वक्त तक। जम्मू श्रीनगर हाईवे 3 सितंबर से ही बंद था जो 14 दिनों के बाद जाकर खुल सका।

सात सितंबर की सुबह झेलम दरिया का पानी शहर के कई इलाकों को डूबो चुका था। पानी बढ़ने के साथ ही ज्यादातर बिजली के ट्रांसफारमर डूब गए। पूरे शहर की बिजली काटनी पड़ी। बिजली कटने के साथ ही सभी कंपनियों के मोबाइल टावर ने काम करना बंद कर दिया। सभी मोबाइल फोन खिलौना बनकर रह गए। इंटरनेट सेवाएं बंद हो गईं। सरकारी दूर संचार सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल की सेवाएं भी बंद हो गईं।
बिजली कटने का साइड इफेक्ट पड़ा। सभी बैंकों के सर्वर भी बैठ गए। सभी एटीएम बंद हो गए। ज्यादातर एटीएम और बैंक की शाखाएं डूब चुकी थीं। शहर की 12 लाख आबादी हर तरीके से लाचार हो चुकी थी। न किसी को फोन करके अपनी वास्तविक स्थित बयां कर सकते थे नही किसी सहायता की गुहार कर सकते थे। अगर जेब में पैसे न हों तो एटीएम से धन की निकासी भी संभव नहीं थी। श्रीनगर शहर में तब 50 हजार से ज्यादा देशी-विदेशी सैलानी मौजूद थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा वक्त कभी नहीं देखा था।

मीडिया भी हुआ लाचार - पांच-छह दिनों तक श्रीनगर शहर के इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के ज्यादातर पत्रकार भी संचार व्यवस्था से कटे रहे। वे अपने मुख्यालय को खबरें नहीं भेज पा रहे थे। सरकारी प्रसारक आकाशवाणी और दूरदर्शन की सेवाएं ठप्प हो गई थीं। श्रीनगर शहर में दो एफएम रेडियो चैनल चलते हैं। पर इनका प्रसारण ठप्प हो गया। संकट की इस घड़ी में एफएम रेडियो मददगार साबित हो सकता था। आजकल ज्यादातर सस्ते मोबाइल फोन में भी एफएम रेडियो होता है। इससे लोगों के लिए जरूरी उदघोषणाएं की जा सकती थी। पर एआईआर एफएम और बिग एफएम की सेवाएं भी बंद हो गई थीं। क्योंकि इनके स्टेशन डूब गए थे। इस सैलाब से सबक लेकर हमें रेडियो स्टेशन ऊंची जगहों पर स्थापित करने चाहिए। संकट काल में एम्येच्योर रेडियो हैम रेडियो भी काफी मददगार साबित होते हैं पर श्रीनगर शहर में ऐसी सेवाएं भी नहीं थीं।

उमर अब्दुल्ला का ट्वीटर खाता बंद -  हमेशा ट्विटर पर बयान जारी करने वाले जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का ट्विटर खाता 6 और 7 सितंबर को तो चलता रहा। पर सात के बाद उनका कोई ट्वीट पढ़ने में नहीं आया। वे सीधे 20 सितंबर को ट्विटर पर दुबारा अवतरित हुए। हालांकि इस दौरान वे ट्वीट कर भी पाते तो कश्मीर घाटी के लोग उन्हें पढ़ नहीं पाते।



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