Thursday, June 5, 2014

नहीं भूलता बनारस की लस्सी का स्वाद

भीषण गर्मी में तरावट के लिए लस्सी पीना किसे अच्छा नहीं लगता. लस्सी अगर मिट्टी के करूए (ग्लास) में पी जाए तो उसका स्वाद और  ही बढ़ जाता है। वह लस्सी बनारस की हो तो बात ही क्या। बनारस में भी घुघरानी गली के लस्सी का स्वाद और बढ़ जाता है।

वैसे तो उत्तर भारत के अधिकांश शहरों में लस्सी मिलती है। कई दुकानदार लस्सी बनाकर फ्रीज में रख देते हैं। मांग के हिसाब से दिन भर ग्राहकों को पेश करते हैं। पर लस्सी ताजी बनी हुई ही अच्छी लगती है। अब राजधानी दिल्ली के कई दुकानों में भी मिट्टी के ग्लास में लस्सी मिल जाती है। पर दिल्ली में लस्सी जरा महंगी है। दिल्ली में लस्सी 25 से 40 रुपये की ग्लास मिलती है। पर बनारस में अभी भी लस्सी 10, 15 और 20 में बिकती है।
बनारस में पांच साल गुजराने के दौरान हम लंका पर लस्सी और मैंगो शेक के मजे लेते थे। कभी कभी साइकिल दौड़ाई और बांस फाटक के पास घुघरानी गली पहुंच गए। 2014 के मई की दोपहरी में भी घुघरानी गली की लस्सी की स्वाद राहत देता है।

छोटा, मध्यम या बड़ा जो आर्डर करें लस्सी बनारसी अंदाज में तैयार होकर मिलेगी। बनारसी बाबू अपने अंदाज में लस्सी घोंटते हैं। दही, चीनी, बर्फ तो हर जगह होती है पर उसके ऊपर मलाई की परत उसका स्वाद और बढ़ा देती है। महानगरों में प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास आ गए हैं। पर बनारस में लस्सी पेश करने का अंदाज वही है। कई शहरों में लस्सी के साथ रूह अफजा का स्वाद मिलाया जाता है। पर बनारसी अंदाज इनसे जुदा है। वैसे बनारस के हर चौक चौराहे पर लस्सी की दुकानें मिल जाएंगी। पर अगर आप बनारस में गौदौलिया चौराहे की तरफ से गुजर रहे हों तो लस्सी का स्वाद लेना नहीं भूलें।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
(VARANASI, LASSI, GHUGHRANI GALI ) 

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