Saturday, June 7, 2014

ग्वालियर का विवस्वान सूर्य मंदिर

वैसे तो देश में कई सूर्य मंदिर हैं पर ग्वालियर के सूर्य मंदिर की भव्यता अनूठी है। शहर के मुरार इलाके में स्थित विवस्वान सूर्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 23 जनवरी 1988 को की गई। मंदिर का उदघाटन बसंत कुमार बिड़ला द्वारा किया गया। इस पूरब रूख के मंदिर में सात घोड़ों पर सवार सूर्य के दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर का रूख पूरब की ओर होने के कारण सुबह के सूर्य की पहली किरणें जब मंदिर के प्रवेश द्वार को चूमती हैं मंदिर का अनूठा सौंदर्य दिखाई देता है।

बाहर से बलुआ पत्थर ( रेड स्टोन) से बने पूरे मंदिर की आकृति किसी भव्य रथ के जैसी है जिसमें दोनों तरफ 16 पहिए लगे हुए हैं। मंदिर की प्रतिकृति ओडिशा के कोणार्क में स्थित सूर्य मंदिर से काफी कुछ मिलती जुलती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर साथ घोड़ों की आकृति बनी हुई है जो सूर्य के रथ को खींचते हुए प्रतीत होते हैं। कहा जाता है कि सूर्य हर सुबह सात घोड़ों पर सवार होकर जगत को देदीप्यमान करने के लिए निकलते हैं। मंदिर के आंतरिक सज्जा में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। अंदर जगह जगह कई देवी देवताओं की मूर्तियां भी दीवारों पर उकेरी गई है।
सूर्य मंदिर अब ग्वालियर शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल हो चुका है। आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सूर्योदय लेकर सूर्यास्त तक खुला रहता है। दोपहर 12 से 1 बजे तक मंदिर बंद होता है। जबकि शनिवार और रविवार को सूर्य मंदिर शाम 7.30 बजे तक खुला रहता है।
कई एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में हरियाली ऐसी है कि यहां से जल्दी बाहर निकलने का दिल ही नहीं करता। मंदिर परिसर में घनश्याम दास बिड़ला का लोगों के लिए संदेश लिखा गया है – मैं यही कहना चाहता हूंकि सत्कर्म कीजिए और भगवान का नाम लीजिए। ईश्वर आपका मंगल करेगा।


कैसे पहुंचे - ग्वालियर शहर के प्रसिद्ध गोला का मंदिर चौराहा से सूर्य मंदिर की दूरी 10 मिनट पैदल चलने भर की है। यह शहर का बाइपास इलाका है जहां से मुरैना और शिवपुरी के लिए रास्ते बदलते हैं। सूर्य मंदिर रेसीडेंसी क्षेत्र में है। मंदिर के पास महाराजपुर एयर स्टेशन स्थित है।
  -    माधवी रंजना

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