Wednesday, October 22, 2014

भीड़ का रेला आया और हम दब गए

( जन्नत में जल प्रलय - 37 )
लंबी पदयात्रा के बाद हमारी टांगे दर्द से कराहने लगी थीं। पर रास्ते और भीड़ हमारा साथ दे रही थी। चारों तरफ दिलकश हरियाली और पहाड़ियां...पर इनका सौंदर्य हमें रास नहीं आ रहा था। जब आप भूखे हों तो कुछ अच्छा लगता है क्या..श्रीनगर का राज्यपाल निवास कई किलोमीटर में फैला हुआ है। राज निवास की सीमा आरंभ हो चुकी है। मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करने के बाद ज्येष्ठा माता का मंदिर आता है। यह श्रीनगर के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। हमलोग आगे बढ़ते जाते हैं।

राजभवन के हेलीपैड क्षेत्र में प्रवेश करने के दो रास्ते हैं। एक समान्य द्वार और दूसरा वीआईपी गेट। वीआईपी गेट से वाहनों का प्रवेश होता है। गेट पर अनियंत्रित बड़ी भीड़ जमा थी। वहां सुरक्षा में मौजूद एक जवान ने अनादि को एक सेब दिया। अनादि ने ले लिया। तभी गेट से अंदर से एक वाहन निकलने वाला था। इसके लिए गेट खोल दिया गया। हमलोग गुलाम रसूल वानी साहब की अगुवाई में गेट से अंदर घुसने की कोशिश में लग गए। हमें सफलता को मिल गई। पर पीछे से आ रही भीड़ ने तेजी से धक्का मारा। बहुत सारे लोग एक दूसरे के ऊपर गिरने लगे। मैं अनादि का हाथ जोर से पकड़े हुए था। पर माधवी भीड़ से आए धक्के से नीचे गिर पड़ी। हमलोग कोशिश करके माधवी को उठाने लगे। इस दौरान एक फौजी ने मुझे मारने की कोशिश की...मैंने उसे समझाया मैं अपनी पत्नी को उठाने कोशिश कर रहा हूं। उसने मुझे झिड़की दी..अपनी पत्नी को भी नहीं संभाल सकता।

राजभवन के हेलीपैड पर, एक और इंतजार...
खैर हमलोग राजभवन के अंदर प्रवेश कर चुके थे। कई एकड़ में फैले हेलीपैड क्षेत्र में बड़ा हेलीपैड। हेलीकॉप्टर रखने के लिए हैंगर। इंतजार करने के लिए बरामदे सहित दो बड़े कमरे बने हैं।

पूरा हेलीपैड़ पहाड़ों की तलहटी में बना है। हैंगर के ऊपर एक वीआईपी अतिथि गृह बना है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लिए आवास और हेलीपैड क्षेत्र में एक मंदिर भी है।

हमें यहां पर बीएसएफ, सीआरपीएफ और जम्मू एंड कश्मीर पुलिस के जवान चहल कदमी करते हुए दिखाई दिए। एक जगह एनडीआरएफ के जवानों की एक टुकड़ी अपने लाव लश्कर के साथ दिखाई दी। ये लोग किसी ऑपरेशन के बाद लौटकर यहां आए थे। अगले कुछ दिनों तक ये लोग कुछ यहां काम करते नहीं दिखे। बल्कि ये लोग शरणार्थी तरह यहां पड़े रहे।
शाम गहराने लगी थी। हमें आने वाला वक्त खुले आसमान के नीचे गुजारना था क्योंकि यहां जो कुछ कमरे थे वे हेलीकाप्टर लिफ्टिंग का इंतजार कर रहे महिलाओं और बच्चों के लिए ही कम थे। किसी तरह माधवी, अनादि, वानी परिवार की महिलाओं और दिल्ली की रिचा ने अपने लिए बमुश्किल एक कमरे के बाहर बरामदे में इतनी जगह बनाई जिसमें वे बैठ सकें।

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल का हेलीकाप्टर। 
शाम के 6 बज चुके थे। आज के लिए हेलीकाप्टर से लिफ्टिंग बंद हो गई थी। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोरा की सेवा में तैनात रहने वाले सफेद रंग का 4 सीटर हेलीकाप्टर हैलीपैड पर लैंड हुआ। दिन भर लोगों को ढोने में यह भी अपनी सेवाएं दे रहा था। एक बीएसएफ के जवान ने बताया कि इसमें भी अधिकतम 7 लोगों को ठूंस दिया जाता है। हमें पता चला कि आज दिन भर में  यानी 9 सितंबर को 700 लोगों को राज निवास के हेलीपैड से लिफ्ट करके श्रीनगर के मुख्य एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया है। हमें अब कल का इंतजार था।

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