Tuesday, October 21, 2014

सिर्फ राजभवन रोड ही बचा था महफूज ((36))

( जन्नत में जल प्रलय - 36)
सोनवारा। श्रीनगर का एक मुहल्ला। अपेक्षाकृत ऊंचाई पर है इसलिए यहां तक झेलम का पानी नहीं चढ़ पाया है। इस सड़क पर कई सरकारी भवन दिखाई दे रहे हैं। सड़क के आसपास के भवनों पर कड़ा पहरा है।

थोड़ी दूर चलने पर यूनाइटेड नेशंस का दफ्तर दिखाई देता है। यह यूनाइटेड नेशंस मिल्ट्री आब्जर्वर ग्रूप का श्रीनगर दफ्तर है। 24 जनवरी 1949 से ये दफ्तर यहां चल रहा है। ऐसा ही एक दफ्तर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में भी है। दोनों तरफ के कश्मीर में होने वाली गतिविधियों की संयुक्त राष्ट्र निगरानी करता है। श्रीनगर का ये यूएन चौराहा प्रसिद्ध है। अक्सर इस दफ्तर के बाहर धरने प्रदर्शन होते रहते हैं। कभी यहां कश्मीरी अलगाववादी संगठन तो कभी मानवाधिकार संगठन के लोग बाहर पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करते हैं। पर आज ये दफ्तर शांत है। इसके आगे से बाढ़ पीड़ितों की बड़ी भीड़ गुजर रही है।

गुपकर रोड वास्तव में श्रीनगर शहर की सबसे ऊंची और वीआईपी रोड है। इस रोड पर कई प्रमुख राजनेताओं और मंत्रियों के बंगले हैं। ये बंगले बाढ़ में महफूज रहे। क्योंकि इस ऊंचाई तक झेलम का पानी नहीं आया। हमें थोड़ो दूर आगे चलने पर फारूक अब्दुल्ला का बंग्ला दिखाई देता है। इस बंग्ले पर उनकी नेमप्लेट लगी है। इस बंग्ले में श्रीनगर में मौजूद रहने पर फारूक अब्दुल्ला का परिवार रहता है। 

उनके बेटे और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने फीडबैक के लिए ईमेल आईडी के तौर पर gupkar@gmail.com  का इस्तेमाल करते हैं। पर इस सैलाब में उनकी ईमेल आईडी भी लाचार है। थोड़ी दूर आगे चलने पर हमें हरिनिवास नामक विशाल बंग्ला दिखाई देता है। यह जम्मू कश्मीर के राजघराने के परिवार से आने वाले डाक्टर कर्ण सिंह का खानदानी बंग्ला है। मौसम सुहाना होता जा रहा है। साफ सुथरी सड़क पर हमलोग आगे बढ़ते जा रहे हैं। हमारे आगे पीछे हजारों की भीड़ है।

हालांकि माधवी के लिए पीट्ठू बैग लेकर आठ किलोमीटर पैदल चलना मुश्किल होता जा रहा है। हामिद रसूल वानी साहब माधवी की मदद करते हैं। उसका बैग उठा लेते हैं। कोई तेज चल रहा है तो कोई धीरे धीरे। हम सब लोग एक दूसरे को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं। पर कई दिन से भूखे लोग कितनी तेज चल सकते हैं।
गुपकर रोड पर स्थित होटल ललित ग्रैंड का प्रवेश द्वार। 

हमें आगे चलते हुए होटल ललित ग्रैंड दिखाई देता है। ललित समूह का ये होटल वास्तव में कश्मीर के महाराजा हरि सिंह का गेस्ट हाउस हुआ करता था। इस ऐतिहासिक भवन में 1947 महात्मा गांधी और लार्ड माऊंट बेटन की मुलाकात हो चुकी है। होटल में वह चिनार का पेड़ अभी भी मौजूद है जिसके नीचे गांधी जी महाराजा हरि सिंह बैठे थे। कभी गुलाब भवन के नाम से मशहूर इस इमारत को महाजा प्रताप सिंह और उनके भतीजे हरि सिंह ने 1910 में बड़े दिल से बनवाया था। देश आजाद होने के बाद महाराजा हरि सिंह मुंबई में जाकर रहने लगे। 1956 में इस भवन को होटल में तब्दील कर दिया गया। यह तब ग्रैंड पैलेस के नाम से श्रीनगर शहर का एक मात्र पांच सितारा होटल था। इस होटल में कई बड़े फिल्मी सितारे और देशी विदेशी मेहमान ठहर चुके हैं। कई साल तक इस होटल का संचालन ओबराय समूह करता रहा। बताया जाता है कि फिल्म कभी कभी की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन और राखी इस होटल में ठहरे थे। आजकल 113 कमरों का यह होटल ललित सूरी के ललित समूह के स्वामित्व में है। कमरों का किराया 15 से 25 हजार रुपये प्रतिदिन के बीच है।

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