Thursday, October 9, 2014

मुश्किल घड़ियों में मुस्कुराती मीना

( जन्नत में जल प्रलय - 24 )

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले मे एक स्वंय सहायता समूह से जुड़ी दीपा शर्मा कई किस्म के अचार बनाती हैं। अत्यंत गरीबी और मुश्किलों से सफर करते हुए उन्होंने अपने व्यापार को आगे बढ़ाया है। दिल्ली के प्रगति मैदान में नवंबर में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला समेत देश के कईसरस मेले में हिस्सा ले चुकी दीपा शर्मा का अचार मेले में खूब बिकता है। कई अखबार उनकी संघर्ष गाथा प्रकाशित कर चुके हैं। अपने अचार के कारण गांव के कई परिवारों को उन्होंने रोजगार उपलब्ध कराया है। अपने अचार के इसी कारोबार के बदौलत उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाया है।

श्रीनगर के सरस मेले में वे दो लाख रुपये से ज्यादा का माल लेकर आईं थीं। पूरी उम्मीद थी कि हर मेले की तरह उनका अचार यहां भी खूब बिकेगा। भले ही उनका अचार महंगा होता है पर गुणवत्ता में खरा उतरने के कारण लोग उनका अचार खूब लेकर जाते हैं। पर अब पूरा स्टाक बाढ़ में फंस गया है। अपने अचार उद्योग के लिए उन्होंने बैंक से कर्ज भी ले रखा है। अब चिंता है कि माल नहीं बिका तो कर्ज कैसे चुकाया जाएगा।


श्रीनगर में दीपा शर्मा को अचार बेचने में सहयोग करने के लिए उनकी बेटी मीना शर्मा भी साथ आई हैं। पर बाढ़ के साथ उनके साथ एक और हादसा हो गया। श्रीनगर आने के रास्ते में लॉरी में बैठी मीना हाईवे पर चलती गाड़ी से नीचे गिर गईं। भगवान का शुक्र है चलती गाड़ी से गिरने के बावजूद कहीं कोई फ्रैक्चर तो नहीं हुआ पर लंबी दूरी तक घिसट जाने के कारण दोनों पांव बहुत बुरी तरह से छिल गए हैं। स्नातक अंतिम वर्ष में पढ़ाई करने वाली खूबसूरत मीना के आंखों में बड़े बड़े सपने हैं। पर इस हादसे के बाद वह अपने पांव से लाचार हो गई हैं। बिना किसी की सहायता के चल नहीं पातीं। पूरे पांव में पट्टियां लगीं हैं। लगातार दवाएं चलती हैं। समय समय पर पट्टियां बदलनी पड़ती हैं। हिमाचल के दूसरे साथी उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं। पर इस बाढ में होटल में फंसे मीना के लिए पट्टियां बदलने के लिए कंपाउडर कहां से आए। एजाज भाई शहर में जाकर जरूरी दवाएं और मरहम पट्टी का सामान तो ले आए। बाद में हमारे होटल में रह रहे वानी परिवार के बड़े भाई गुलाम रसूल वानी साहब ने उनकी पट्टियां बदली।

इतने बड़े संकट में फंसे हमलोगों के बीच दोनों पांव से लाचार मीना मुश्किल घड़ियों में भी मुस्कुराना जानती है। लोग पूछते हैं आपके साथ ये सब कैसे हुआ तो हंस कर जवाब देती है। अनादि दिन भर मीना शर्मा के साथ खेलता रहता है। बाढ़ से घिरे होटल रिट्ज की खुली छत पर वह मीना शर्मा को चुटकुले सुनाता है तो मीना उसे कहानियां सुनाती है। इस तरह दोनों का मनोरंजन होता है और समय थोड़ा थोड़ा आगे खिसकता जाता है। इस इंतजार में कि आगे हमारे हिस्से में थोडी सी धूप आएगी। कुछ अच्छी खबर आएगी और हम संकट से बाहर निकलकर भी यू हीं मुस्कुराएंगे।   

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

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