Thursday, October 16, 2014

त्रासदी से लें सबक – वैकल्पिक संचार प्रणाली

( जन्नत में जल प्रलय – 31)
कश्मीर घाटी इस त्रासदी से सबक लेते हुए हमें वैकल्पिक संचार प्रणाली विकसित करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। जैसे संवेदनशील जगहों पर सेटेलाइट फोन की उपलब्धता होनी चाहिए। राज्य सरकार का प्रशासन इस तरह के फोन से केंद्र सरकार और देश की दूसरी तमाम एजेंसियों से संपर्क बनाए रख सकता था। हैम रेडियो को बढ़ावा देने से बाढ़ में फंसे लोगों को मदद पहुंचाई जा सकती थी। हमें ऐसे एम्च्योर रेडियो संचालक समूहों को बढ़ावा देना चाहिए जो आपदा की घड़ियों में लोगों के लिए मददगार साबित हो सकें।


एफएम रेडियो को बढ़ावा – एफएम रेडियो स्टेशन के स्थापना और संचालन में कम खर्च आता है। इसे दो कमरे से भी संचालित किया जा सकता है। हमें श्रीनगर के मस्जिदों के इंतजाम से प्रेरणा लेकर एफएम रेडियो के स्टेशन भी ऊंची जगहों पर स्थापित करने चाहिए और वहां ऊर्जा का भी वैकल्पिक इंतजाम होना चाहिए। इससे संकट काल में एफएम रेडियो काम कर सकते थे। इससे लोगों को मदद पहुंचाई जा सकती थी।
सौर ऊर्जा हो सकता था विकल्प - अगर हमने श्रीनगर शहर में सौर ऊर्जा के  विकल्प पर काम किया होता तो सैलाब के वक्त भी रात में उजाला हो सकता था। क्योंकि भले ही पूरे शहर की बिजली चली गई थी पर बारिश बंद होने के बाद पर्याप्त धूप आ रही थी। सभी बड़े होटलों और बड़े आवासीय प्लाटों और सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा का इंतजाम होता तो शहर के बड़े इलाके इस आपदा की घड़ी में भी रोशन हो सकते थे। इससे टार्च और मोबाइल की बैटरियां चार्ज हो सकती थीं।

वाह एयरसेल वाह
श्रीनगर में आपदा की घड़ी में सभी मोबाइल कंपनियों का बाजा बज गया था। पर एक मोबाइल कंपनी ऐसी थी जिसके फोन आंशिक तौर पर काम कर रहे थे। वह कंपनी थी एयरसेल। जिन लोगों के पास एयरसेल का कश्मीर का पोस्टपेड या प्रीपेड नंबर था उससे कभी कभी कभी बात हो जाती थी। कभी कभी एसएमएस भी चला जाता था। एयरसेल अपेक्षाकृत तौर पर श्रीनगर क्षेत्र में मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली नई कंपनी है।
कंपनी के मुताबिक पूरे कश्मीर में उसके 21 लाख उपभोक्ता हैं। एयरसेल आपदा के दौरान लोगों का साथी बना। उसके मोबाइल फोन में अक्सर टावर के सिग्नल आ जाते थे। कई बार कोशिश करने पर बात भी हो जाती थी। एयरसेल मोबाइलधारी कई लोगों ने बातचीत में सफलता मिल जाने पर अपने प्रियजनों को अपने बारे में संदेश भेज दिया। कई लोग जो कश्मीर से बाहर के रहने वाले थे और अपने साथ पोस्टपेड मोबाइल लेकर आए थे उनके नंबर भी नहीं काम कर रहे थे। पर जिन पोस्टपेड मोबाइल कंपनियों का रोमिंग समझौता एयरसेल के साथ था वे कभी कभी काम कर जा रहे थे।

एयरसेल का दावा है कि उसके श्रीनगर शहर के आसपास के 12 3जी टावर निर्बाध तौर पर काम कर रहे थे। बताया जाता है कि एयरसेल कश्मीर घाटी में सेटेलाइट टर्मिनल स्थापित कर अपनी सेवाएं दे पा रहा है। इसलिए उसका नेटवर्क पूरी तरह नहीं ठप्प हुआ। आपदा आने पर बीएसएनएल ने भी आनन फानन में सेटेलाइट टर्मिनल भिजवाए। वहीं एयसेल के तकनीकी अधिकारी ने एक समाचार पत्र को बताया कि हमने श्रीनगर शहर में जितने भी टावर लगाए हैं वे सभी दूसरी कंपनियों की तुलना में ऊंचाई पर लगाए हैं इसलिए वहां पानी नहीं पहुंचा। जो टावर ऊंचाई पर थे और जिनके पास डीजल का स्टाक थे वे आपदा की घड़ी में भी काम करते रहे।
जिन लोगों को बात करने में सफलता मिल गई वे एयरसेल के नेटवर्क को बार बार धन्यवाद दे रहे थे। वाकई इस आपदा की घड़ी में हमें एयरसेल की तकनीक से भी सबक लेने की जरूरत है। बाकी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को भी इससे सीखना चाहिए। कश्मीर में कई मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां एक ही टावर को साझा करके अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसी साझेदारी वाले नेटवर्क पूरी तरह ठप्प हो गए थे। इस आपदा से तमाम मोबाइल कंपनियों ने अपने नेटवर्क को लेकर आगे के लिए सीख ली है।
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