Tuesday, November 11, 2014

बाहर निकलने के सारे रास्ते हो गए थे बंद

( जन्नत में जलप्रलय- 59 ) 

दिल्ली के रोहिणी इलाके में सेहतमंद बने रहने के लिए योगा क्लब चलाने वाले डीएके गुप्ता और उनके सात दोस्त साल में एक बार 4 दिनों के लिए कहीं साथ साथ बाहर घूमने जरूर जाते हैं। इस बार इन लोगों ने श्रीनगर जाने की योजना बनाई थी। वे लोग श्रीनगर के विश्वंभर नगर के होटल सेंट्रल प्वाइंट ( http://www.centrepointhotel.in/) में ठहरे थे।
तीन दिन श्रीनगर में गुजारने के बाद सात सितंबर को उन्हें वापस लौटना था। वे लोग एयरपोर्ट के लिए चल पड़े, रास्ते में पता चला कि पूरे शहर में सैलाब आने के कारण एयरपोर्ट जाने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।

अब कोई चारा नहीं था सिवाय की होटल की ओर वापस लौटा जाए। पर होटल वापस लौटने पर पता चला कि अब इस होटल में रहने का इंतजाम नहीं हो सकता। जब अपने ही होटल में जगह नहीं मिली तो शुरू हुई एक नए आशियाने की तलाश। ख्याम चौर पर अपना घर में जाकर सबके लिए जगह मिली। इस होटल के संचालक एक बंगाली बाबू थे। उनका व्यवहार काफी अच्छा था।

शाम को सात बजे अपना घर नामक होटल में जगह तो मिल गई। तीसरी मंजिल पर दो कमरे में सभी लोगों ने अपना सामान जमा लिया। गुप्ता जी के साथ बीपी ध्यानी, नैन सिंह रावत, आरके राणा, एससी गुप्ता, नंदन सिंह और रजनीश पांडे थे। ये सभी लोग दिल्ली में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत हैं। 

पर ख्याम चौक इलाके के अपना घर में रात को 12 बजे के बाद पानी आने लगा। आठ तारीख की सुबह तक होटल के चारों तरफ 4 फीट पानी जमा था। आठ को दिन भर सारे लोग इसी होटल में रहे। होटल प्रबंधन ने खाने का प्रबंध कर दिया। कुल 30 लोग इस होटल में थे। होटल प्रबंधन का कहना था कि उसके पास अगले बीस दिनों के लिए खाने का इंतजाम है। स्टाक में चावल आलू और दाल पड़ा हुआ है। यानी भूखे मरने का खतरा तो नहीं था। पर चारों तरफ से पानी से घिरे थे। यहां से बाहर निकलने की चिंता थी। अगले दिन 9 तारीख को दोपहर में तय किया कि खतरा बढ़ रहा है इसलिए होटल छोड़ देना चाहिए। होटल मालिक की भी यही सलाह थी। यह भी सूचना मिल गई थी राजभवन से सैलानियों की एयर लिफ्टिंग का इंतजाम है। गुप्ता जी बताते हैं कि हमलोग पैदल चलकर राजभवन पहुंच गए। अपना सारा लगेज होटल में ही छोड़ दिया था। 9 की शाम को किसी तरह अंदर पहुंच गए। पर यहां खाने पीने सोने का कोई इंतजाम नहीं था। लगा कि यहां बीमार पड़ जाएंगे। इसका अंदाजा भी नहीं ता लिफ्टिंग में कब नंबर आएगा।
10 को हमलोग राजभवन से एक बार फिर बार निकले और शहर में किसी होटल में आशियाना ढूंढने की कोशिश की। पर फाइव स्टार होटल ललित ग्रैंड ने अपने दरवाजे बंद कर रखे थे। गुपकर रोड पर यूएन दफ्तर के पास के होटल ने भी आसरा देने से इनकार कर दिया। सड़कों पर भटकते रहे पर शहर में कहीं कुछ खाने को भी नहीं मिला। लौटते समय सात लोगों में से दो लोग बिछुड गए। उनके पास सर्दियों के कपड़े नहीं थे।
गुप्ता जी और दोस्तो के होटल के आसपास जमा पानी। (फोटो - रजनीश पांडे)

 गुप्ता जी बताते हैं कि 10 सितंबर की शाम को वापस आने पर बड़ी मुश्किल से दुबारा हेलीपैड में इंट्री मिल सकी। इसमें भी सात में दो लोग बाहर ही रह गए। उन्हें 10 और 11 की रात सड़क पर गुजारनी पड़ी। 12 तारीख को दोपहर के बाद जाकर हमलोगों की एयरलिफ्टिंग हो सकी। 13 की शाम को गुप्ता जी और उनके दोस्त वायुसेना के विमान से चंडीगढ़ पहुंचे और वहां से टैक्सी बुक कर रोहिणी दिल्ली में अपने घर। 
-vidyutp@gmail.com 



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