Monday, October 13, 2014

कश्मीर में बाढ़ का पुराना इतिहास

( जन्नत में जल प्रलय - 28)

-    बार बार मची है घाटी में तबाही

-    फिर भी हमने नहीं लिया सबक

श्रीनगर शहर और कश्मीर की बात करें तो यहां जमकर होने वाली बारिश और उसके बाद आने वाले बाढ़ आने का पुराना इतिहास रहा है। इससे पहले 1959 में श्रीनगर शहर में बड़ा सैलाब आया था। पर 2014 में आया सैलाब 1959 से भी ज्यादा भयानक रहा। दरिया झेलम पहले भी कई बार खतरे के निशान को पार कर चुकी है। इस दौरान वह दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों को डूबोती है।


1895 में प्रकाशित रोपर लारेंस की पुस्तक वैली ऑफ कश्मीर के मुताबिक कश्मीर घाटी में 879 ई. में बारामूला इलाके बड़ा सैलाब आया था। तब झेलम का बहाव रुक जाने के कारण घाटी का बड़ा इलाका डूब गया था। कश्मीर घाटी में दूसरा बड़ा सैलाब 1841 में आया जब जान और माल का बड़ा नुकसान हुआ था।

1893 - आधी शताब्दी बाद 1893 में फिर घाटी में बड़ा सैलाब आया। 18 जुलाई को घाटी में बारिश शुरू हुई। 52 घंटे तक मूसलाधार बारिश होती रही। इस बारिश से 64804 रुपये की भू संपदा, 25426 एकड़ फसल तबाह हो गई। 2225 घर बह गए। वही 329 जानवरों की हानि हुई। 
1903 – 23 जुलाई को एक बार फिर श्रीनगर में बड़ा सैलाब आया जब पूरा श्रीनगर शहर किसी झील में तब्दील हो गया। इस बाढ़ में भी बड़े पैमाने पर धन और जन की हानि हुई।
1929 में कश्मीर घाटी में एक बार फिर बाढ़ आया, पर इस बार पाक अधिकृत कश्मीर वाले इलाके में ज्यादा तबाही मची। आजादी के बाद 1948 और 1950 में कश्मीर घाटी में सैलाब आया जिसमें काफी लोगों की जानें गईं।

1959 में आया बड़ा सैलाब - 1957 और 1959 में श्रीनगर शहर ने दुबारा बाढ़ का कहर देखा। 1959 में 5 जुलाई को झेलम का पानी 30.25 फीट की ऊंचाई पर बह रहा था। यह खतरे के निशान से काफी ऊपर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू वायुसेना के विमान से बाढ़ का हवाई सर्वे किया। उनका विमान 5 घंटे बाद पालम वापस लौटा। कई बुजुर्ग लोगों को 1959 के बाढ़ का मंजर याद है। पर वे लोग कहते हैं कि उस साल डल झील का स्तर इतना नहीं बढा था जितना साल 2014 में देखा गया। यानी इस बार का मंजर और भयावह है।

1992 – श्रीनगर ने 1992 में एक फिर बड़ा सैलाब देखा। इस दौरान पूरी घाटी में बड़ी तबाही का मंजर देखा गया। इसमें 200 लोगों की जान गई। वहीं पाक अधिकृत कश्मीर में तो 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।


2010 – साल 2010 में कश्मीर के लेह इलाके में पानी का कहर देखने को मिला। यहां बादल फटने से बड़ी तबाही मची। इस दौरान कई गांव तबाह हो गए। खूबसूरत लेह की सूरत बदरंग हो गई। हमने आमिर खान की हिंदी फिल्म थ्री इडियट्स का क्लाइमेक्स लेह में देखा था। जिस स्कूल में इस फिल्म की शूटिंग हुई थी वह स्कूल भी तबाह हो गया। इस तबाही में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य



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