Tuesday, October 14, 2014

कहानी झेलम की... यानी वितस्ता या व्यथ

( जन्नत में जल प्रलय - 29 )

कभी कश्मीर घाटी ऋषि मुनियों तपोस्थली हुआ करती थी। ऋगवेद में प्रसंग आता है कि मां पार्वती से कश्यप ऋषि ने प्रार्थना की, कश्मीर की धरती को पवित्र करें क्योंकि यहां बड़ी संख्या में पिशाच रहते हैं। कहा जाता है कि ऋषि की प्रार्थना पर पार्वती खुद नदी बन कर अवतरित हुईं। इस दरिया का पौराणिक नाम वितस्ता मिलता है। वहीं श्रीनगर के लोग इसका नाम व्यथ कहते हैं, जो वितस्ता का ही बदला हुआ रूप है। 

वास्तव में कश्मीरी भाषा संस्कृत और अरबी मिलकर बनी है। इसलिए कश्मीरी भाषा में तमाम ऐसे शब्द हैं जो संस्कृत के काफी करीब हैं जैसे घर को घरस्थ कहते हैं।
झेलम की गिनती हिंदू धर्म की 10 श्रेष्ठ नदियों में होती है। ऋग्वेद के नदी सूक्त (10/75)  में आर्य निवास में प्रवाहित होने वाली नदियों का वर्णन मिलता है। इनमें मुख्‍य हैं:  कुंभा ( काबुल नदी ), क्रुगु ( कुर्रम ),  गोमती ( गोमल ),  सिन्धु,  परुष्णी ( रावी ),  शुतुद्री ( सतलुज ),  वितस्ता ( झेलम ),  सरस्वती,  यमुना और गंगा। श्रीमदभागवत पुराण में भी वितस्ता नदी का जिक्र आता है।

वेरीनाग से निकलती है झेलम - झेलम नदी की कुल  लम्बाई  720 किलोमीटर है। इनमें बड़ा हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में भी है। वितस्ता का उद्गम स्थल शेषनाग है जिसका आजकल लोकप्रिय नाम वेरीनाग है। 1876 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस झील से ही झेलम का मुख्य स्रोत निकलता है। वेरीनाग की श्रीनगर शहर से दूरी 80 किलोमीटर है। यहां जाने में तीन घंटे का समय लगता है। मुगल शासक जहांगीर ने वेरीनाग झील के वास्तु में बदलाव लाने की कोशिश की थी।

मानसून के दिनों में पूरे कश्मीर घाटी के पहाड़ों का पानी झेलम नदी में ही आता है। झेलम की प्रमुख सहायक नदियां- किशनगंगा,  नीलम, पुंछ,  लिदार और करेवाल हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच झेलम नदी के पानी के बंटवारे को लेकर इंडस वाटर ट्रिटी हुई है।
श्रीनगर शहर के ऊपर छाया इंद्रधनुष।( 6 सितंबर 2014  की शाम) 

सिकंदर ने किया था इंतजार - विश्व विजय की तमन्ना लेकर भारत की ओर बढ़ रहे सिकंदर की पोरस से लड़ाई 326 ईश्वी पूर्व में इसी झेलम नदी के किनारे हुई थी। ग्रीक भाषा झेलम को हिडैप्सस कहा जाता है। इतिहास बताता है कि उफनती झेलम नदी के कारण सिकंदर को कई हफ्ते तक इसके तट पर ही रुकना पड़ा था। बाद में उसने नाव के पुल के सहारे झेलम को पार किया था। दरिया झेलम वेरीनाग से निकलने के बाद पुलवामा जिले को पारकर श्रीनगर शहर में आती है। यहां उसका संपर्क डल झील से होता है। 

आगे यह वूलर झील से भी मिलती है। पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद शहर में झेलम के साथ नीलम नदी का मिलन होता है। पाकिस्तान पंजाब के झेलम जिले में यह पाकिस्तान में प्रवेश करती है। पाकिस्तान के झांग जिले के त्रिमू में झेलम चिनाब नदी में जा मिलती है। इसके बाद रावी भी चिनाब में मिल जाती है। आगे जाकर चिनाब सतलुज में मिल जाती है।


तब इसका नाम पंचनद हो जाता है, क्योंकि पंजाब की पांच नदियां व्यास, सतलुज, रावी, झेलम, चिनाब सब इसमें समाहित हो चुकी हैं। आगे पंचनद पाकिस्तान में हैदराबाद से आगे सिंध नदी मिल जाती है। सभी नदियों का जल समाहित करने वाली सिंध नदी अरब सागर में मिल जाती है।

इन्साइक्लोपिडिया ब्रिटेनिका के मुताबिक झेलम नदी में मानसून के दिनों में 28,300 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड के दर से पानी का अधिकतम डिस्चार्ज होता है। इतना पानी सैलाब लाने के लिए काफी है। जब जब झेलम को गुस्सा आता है, कश्मीर घाटी, पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के कई इलाकों में सैलाब आ जाता है।

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