Thursday, November 13, 2014

सब कुछ बरबाद हो गया... शून्य से होगी शुरुआत

थाना मंडी राजौरी का एक नजारा ( फोटो सौ - हामिद आर वानी)
( जन्नत में जल प्रलय - 61 )
श्रीनगर के आपदा से बचकर दिल्ली लौटने के कई दिनों बाद एक दिन अचानक राजौरी से आफताब भाई का फोन आता है। आफताब भाई आपदा की घड़ियों में हमारे साथ थे। इनका पूरा परिवार मुगल रोड के रास्ते से बड़ी मुश्किलों वाला सफर करके अपने घर राजौरी लौटा था। मुश्किल घड़ियों में धैर्य नहीं खोने वाले आफताब भाई आपदा से बचकर लौटने के बाद अब दुखी थे। बताने लगे- सिर्फ श्रीनगर में ही कुदरत का कहर नहीं बरपा है बल्कि पूरे कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र का बड़ा इलाका भी सैलाब में प्रभावित हुआ है। 

राजौरी के थाना मंडी इलाके की एक नदी जिसे हम लगभग भूला चुके थे। वह नदी अब नाले का रूप ले चुकी थी। इस सैलाब में उस नदी ने विकराल रूप ले लिया। इस नदी में इतना पानी आया जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। ये पानी हमारी सारी जमा पूंजी बहा ले गया। आफताब भाई काष्ठ शिल्पी हैं। वे लकड़ी से कई तरह की कलाकृतियां बनाते हैं। जैसे किस्ती, जहाज, हाथी, घोड़े आदि। पर इस बाढ़ में उनके वर्कशाप का सारा तैयार माल बह गया। इतना ही नहीं वर्कशाप की सारी मशीनों को भी पानी बहा ले गया। अपने पूरे वर्कशाप की बरबादी देखकर आफताब भाई दुखी हो गए। अब उन्हें शून्य से एक नई शुरूआत करनी पडेगी।

उनके गांव में चलने वाले घर्राट ( पनचक्कियों) को भी ये सैलाब बहा ले गया। आसपास की कई सड़कें भी बह गई हैं। ये तबाही की एक बानगी भर है। कश्मीर के हर जिले में इसी तरह पानी ने अपना कहर दिखाया है। कुछ दिन बाद पिर वानी साहब से बात हुई, बोले सोच रहा हूं पंजाब के बटाला शहर जाऊं और वहां से फिर से वर्कशाप से जुड़ी सामग्री खरीद लाऊं और एक नई शुरूआत करूं।

छह करोड़ का इन्फ्रास्ट्रक्चर नुकसान
शुरूआती आकलन के अनुसार सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर का 6000 करोड़ का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार के राजस्व विभाग के सचिव विनोद कौल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि सरकारी भवनों जो बाढ़ में जमींदोज हुए हैं या दरक गए हैं उनको दुबारा बनाने के लिए कम से कम 5000 करोड की राशि की जरूरत होगी। श्रीनगर शहर के अलावा अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा, कुलगाम जैसे जिले में भी भारी बर्बादी हुई है।


विमान की खिड़की से श्रीनगर शहर ( 6 - 09 2014) 

एक लाख करोड़ का नुकसान – सैलाब के बाद जम्मू कश्मीर सरकार का आकलन है कि पूरे राज्य में इस सैलाब से एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। पूरे राज्य को दुबारा से पुरानी रौनक लौटाने और पुनर्निमाण में कई साल लग जाएंगे। कश्मीर चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज का आकलन है कि  60 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। केसीसीआई के चेयरमैन शेख आशिक अहमद कहते हैं कि अब तेजी पुनर्वास कार्य शुरू किए जाने की जरूरत है। सात सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के लिए 1000 करोड़ रुपये के फौरी राहत पैकेज का ऐलान किया था।
पर 29 सितंबर को राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य में सरकारी और निजी संपत्ति मिलाकर इस सैलाब से एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस नुकसान की बानगी देखिए...

112 साल में कश्मीर घाटी में आई सबसे बड़ी तबाही
3.5 लाख घर इस सैलाब में तबाह हुए
83 हजार पक्के घर गिरे
96089 घर आंशिक रूप से गिरे
21162 कच्चे घर क्षतिग्रस्त हुए
54264 कच्चे घर आंशिक तौर पर क्षतिग्रस्त
5611 करोड़ की फसल हुई स्वाहा
1568 करोड़ की बागवानी स्वाहा
10,000 दुधारू पशु सैलाब में लापता, मारे गए
33,000 भेड़े सैलाब में बहीं
5000 करोड़ की आवासीय कालोनियां बरबाद
6000 किलोमीटर राज्य की सड़के बहीं
3000 किलोमीटर वाटर सप्लाई पाइप स्वाहा
350 करोड़ का पुलिस का आधारभूत ढांचाखत्म हुआ।





No comments:

Post a Comment