Saturday, October 11, 2014

पचास साल में 50 फीसदी सिकुड़ी डल झील

 ( जन्नत में जल प्रलय - 26 )
श्रीनगर शहर का सबसे मुख्य आकर्षण डल झील। जब कभी आप कहीं पानी में चलते किसी शिकारे या हाउस बोट की तस्वीर देखते हैं तो उसका सीधा मतलब डल झील होता है। पर क्या डल झील आज अपने वास्तविक स्वरूप में है। जवाब है नहीं। हमने डल झील के सीने में अनगिनत खंजर घोंप डाले हैं।


बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक डल झील 50 फीसदी सिकुड़ चुकी है। झील का दायरा आज महज 1200 हेक्टेयर रह गया है। किसी जमाने में डल झील 24,00 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई थी। जाहिर है अब अगर झील आधी रह गई है तो उसके जलाशय में जल समाहित करने की क्षमता भी आधी है। अगर झील का दायरा इससे दुगुना बड़ा होता तो कल्पना करें कि झेलम दरिया टूटने के बाद आने वाला पानी बड़ी आसानी से इस झील में समाहित हो सकता था और श्रीनगर शहर को इतनी बड़ी तबाही नहीं झेलनी पड़ती।
श्रीनगर शहर का रैनावाड़ी जैसा पूरा मुहल्ला ही डल झील की जमीन पर कब्जा करके खड़ा किया गया है। जाहिर सी बात है कि पानी का स्तर बढ़ने पर इस इलाके को डूबना ही था।

खोना खान रोड स्थित पेसफिक होटल के मैनेजर नौजवान साथी मोहम्मद जुनैद बताते हैं – डल झील के दायरे में आधे से एक किलोमीटर तक अंदर जाकर सैकड़ों होटल बनाए जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर होटलों का निर्माण 1993 से 2003 के बीच हुआ। इस दौर में कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था। सैलानी बिल्कुल नहीं आते थे। पूरी होटल और टूरिज्म इंडस्ट्री ठप्प पड़ी थी। श्रीनगर शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित ज्यादातर बेहतरीन होटलों में सेना और पारा मिलिट्री फोर्स के शिविर दफ्तर चल रहे थे। होटलों के मालिक बेरोजगार थे। इस दौर में उन्होंने डल झील के किनारे के इलाकों को धीरे धीरे भरना शुरू किया। झील में मिट्टी भरकर बड़े बड़े आलीशान होटल तैयार कर लिए गए। आज इन होटलों में आकर सैलानी ठहरते हैं। इनमें से कई होटल शान से डल व्यू का दावा करते हैं। यानी की इन होटलों से डल झील का नजारा दिखाई देता है। पर ये होटल प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके बने हैं।

ज्यादातर होटलों की नींव कमजोर है। जितने ऊंचे होटल बनाए गए हैं उसकी तुलना में उनकी नींव मजबूत नहीं है। चारों तरफ से पानी से घिर जाने के बाद इनके कभी भी गिर जाने का खतरा है। 

डल झील के साथ हमने इतना ही अत्याचार नहीं किया। जितने हिस्से में पानी बचा हुआ है। उस हिस्से में बड़ी संख्या में स्थायी तौर पर शिकारे लगे हैं। सैलानियों के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हाउस बोट पर अपने स्थायी घर बना लिए हैं। झील में स्थायी तौर पर मीना बाजार बना है। जिसे शिकारा वाले शान से झील की विशेषता बताते हैं। पर ये भी तो एक तरह का अवैध कब्जा ही तो है।

पानी हुआ एकदम गंदा - डल झील का पानी काफी गंदला हो चुका है। न पीने लायक बचा है न ही स्नान करने या भोजन बनाने लायक। झील में चलने वाले हाउस बोट सारी गंदगी इसी झील में निस्तारित कर देते हैं। इसलिए झील में घूमते हुए हर जगह कचरे का अंबार नजर आता है। प्लास्टिक की बोतलें और घर से निकलने वाला तमाम तरह का कचरा।

सफाई का नाटक - हर साल इस कचरे की सफाई का भी बड़ा ड्रामा होता है और इस करोड़ो रुपये खर्च किए जाते हैं। हर साल सर्दी के महीने में पूरी डल झील जम जाती है। तब बर्फ बनी इस झील पर फुटबाल मैच खेला जाता है। तब एक बार फिर डल झील देश दुनिया में सुर्खियों में आती है। पर डल झील के सीने पर चलते हाउस बोट में ऐश करते लोग और झील पर सर्दियों में मौजमस्ती करते लोगों को झील का दर्द नहीं मालूम।

खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो गई डल झील
सैलानियों के लिए स्वर्ग श्रीनगर श्रीनगर की मशहूर डल झील कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। पानी इतना गंदा हो चुका है कि वह पीने लायक नहीं रहा। दुनिया भर से आने वाले सैलानी झील की दुर्दशा देखकर निराश होते हैं। कई सालों से डल झील की सफाई का अभियान चलाया जा रहा है, पर इसका कोई सार्थक नतीजा नहीं निकला।
गाद से पटी झील
डल झील गाद से पटी हुई है। पानी का रंग लाल गंदला है। इसमें काई की परतें जमी हैं। इसका पानी इंसान के इस्तेमाल के लिए खतरनाक घोषित किया जा चुका है। इसमें प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि इलाके के भूजल को भी दूषित कर रहा है। झील के दायरे में खेती और तैरते बगीचे पानी को जहरीला बना रहे हैं।

हर साल सफाई का नाटक
डल झील की सफाई हर साल राज्य सरकार की ओर से कराई जाती है। बड़ी मात्रा कचरा हटाया जाता है पर कुछ अगले महीने वही कचरा फिर झील में पहुंच जाता है।
झील में कचरे का ढेर
02 जून को हाईकोर्ट ने सरकार को डल झील के संरक्षण के लिए तुरंत समिति बनाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही झील की सफाई के लिए स्थायी तंत्र बनाने का भी निर्देश दिया।
50 सालों में 50 फीसदी तक सिकुड़ चुकी डल झील, अवैध कब्जा है बड़ा कारण ( बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की रिपोर्ट)
24,000 हेक्टेयर था कभी दायरा अब महज 12 हजार हेक्टेयर में है झील
25 हजार के करीब घर हैं झील के आसपास जो कचरा फैलाने का बड़ा कारण हैं।
61 लाख टन गंदगी हर साल गिराई जा रही है झील में (आईआईटी रुड़की रिपोर्ट )

ऐतिहासिक झील
50 हजार साल पुरानी मानी जाती है झील, ग्लेसियर के पिघलने और बारिश से आता है पानी

1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है डल झील

-    विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

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