Wednesday, October 8, 2014

दिल में बड़ा दर्द लिए घूमते हैं एजाज भाई

( जन्नत में जल प्रलय 23 )
एजाज भाई का एक और चेहरा। वे थोड़े गुस्से वाले शख्श हैं पर अंदर से बड़े रहम दिल। देश भर के 22 राज्यों से आए होटल में फंसे 250 से ज्यादा लोग उनके ले मेहमां की तरह हैं। उन्होंने बातों बातों में कहा, इन लोगों की बुकिंग सरकारी एजेंसी की ओर से है। इसका पेमेंट हमें हो सकता है देर से मिले। पर इसकी परवाह नहीं है मुझे। जब तक मेरे अंदर जान है और कहीं से कुछ भी खाने पीने  का इंतजाम हो जाए मैं सबके लिए खाने पीने का इंतजाम करूंगा। एजाज भाई का श्रीनगर शहर से कुछ किलोमीटर आगे बड़े बड़े सेब के बाग हैं। होटल चलाना उनका शौकिया बिजनेस है।

थोड़े खुले तो अपने बारे में काफी कुछ बताने लगे। उन्होंने होटल प्रबंधन और बिजनेस करने के गुर एक बंगाली बाबू से सीखा। वे उस बंगाली बाबू का आज भी बड़ा सम्मान करते हैं। लेकिन कहते हैं न कि दिल का मामला कुछ नाजुक होता है। उनका एक बंगाली लड़की से प्रेम हो गया। उन्होंने इस प्रेम को अंजाम तक भी पहुंचाया। इस प्रेम की परिणति विवाह में हुई। बंगाली बाला विवाह करके श्रीनगर एक पांरपरिक कश्मीरी परिवार में पहुंच गई। रहन सहन, परंपराएं और बोली सब कुछ अलग। लेकिन उन्होंने बंगाली बहू को हर तरह की आजादी दी। अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी। यानी कश्मीरी परिवारों की पूरी तरह से तन ढके हुए कपड़े पहनने की कोई बंदिश नहीं थी। संयुक्त परिवार था लेकिन बहु के कमरे में अलग से टीवी देखने की आजादी।
वक्त आगे बढ़ा उनकी पत्नी उम्मीदों से थी। डाक्टर ने पूरी तरह से आराम की सलाह दी। एजाज भाई बताते हैं कि पत्नी के लिए 24 घंटे ग्यानोक्लाजिस्ट का इंतजाम कर दिया। पर एक दिन अचानक वक्त का पहिया घूमा। बहू ने बंगाल जाने की जिद की। उसकी जिद के आगे वे लोग मान भी गए। बहू अपने पिता के पास चली गई। जाने के बाद कुछ समय तक बातें भी होती रहीं। पर एक दिन अचानक फोन आना बंद हो गया। सारे संपर्क टूट गए। बंगाली बाला ने तलाक मांग लिया। भोले प्रेमी ने तलाक दे भी दिया। एजाज भाई बताते हैं कि शादी में हमने जितने भी गहने दिए थे, उनमें से वह एक भी गहने लेकर नहीं गई।
रिट्ज होटल के स्टाफ के साथ अनादि। 

श्रीनगर छोड़ने के समय तक हमारे बीच कोई खटपट भी नहीं थी। पर कोलकाता जाने के बाद उसके विचारों में किस तरह का बदलाव आया। ये मेरी समझ में नहीं आया। हमने अपनी ओर से उसकी हर सुविधाओं का ख्याल रखा पर वह मुझे क्यों छोड़ गई ये आजतक मेरी समझ में नहीं आया। दिल बहुत रोया है एजाज भाई का। कई शिकवे शिकायत भी हैं। फिर भी वे अपने ससुर का पूरा सम्मान करते हैं क्योंकि ससुर उनके गुरू थे। 
कामकाज और बिजनेस का गुर उनसे ही सीखा था। पर वे एक असफल लव जिहादी हैं। प्रेम में उन्हें धोखा मिला है। फिर भी शिकायत नहीं है। बंगाल के लोगों से भी नहीं है। वे कहते हैं अगले डेढ़ महीने हमारे होटल में बंगाली टूरिस्टों की बुकिंग थी। पर इस सैलाब के कारण अब वे नहीं आएंगे। हमारा लाखों का नुकसान होगा। इसकी भरपाई सरकार से मिलने वाले मुआवजे से नहीं हो सकेगी।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
(J &K, FLOOD, RITZ HOTEL, DAL GATE ) 


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