Sunday, November 9, 2014

72 घंटे के इंतजार के बाद आई नाव

( जन्नत में जल प्रलय - 56 )
11 सितंबर 2014 – शाम हो गई थी। माधवी और वंश के जाने के बाद मैं अकेला बैठा था तभी एक परिवार मेरे सामने आकर बैठता है। पति पत्नी और दो नन्हें नन्हें बच्चे। पटना के कदमकुआं इलाके के रहने वाले अनुराग प्रकाश केनरा बैंक श्रीनगर के रेसिडेंसी रोड शाखा में चीफ मैनेजर हैं। वे श्रीनगर शहर के शिवपुरा मुहल्ले में परिवार के साथ रहते हैं। अनुराग की पत्नी बताती हैं कि जब सात तारीख की सुबह अचानक झेलम का बांध टूटा तो पानी उनके घर में आ गया। 

थोडा सा अंदेशा इन लोगों को बाढ़ का पहले से भी था, क्योंकि शिवपुरा मुहल्ला तीन तरफ से झेलम दरिया से घिरा हुआ है। अनुराग का परिवार ग्राउंड फ्लोर पर किराए पर रहता है। बाढ़ के अंदेशे से इन लोगों ने अपने आशियाने का प्रमुख सामान पहली मंजिल पर शिफ्ट कर दिया था। पर सात तारीख की सुबह जब पानी आया तो अनुराग अपने पत्नी बच्चों के साथ गहरी नींद में थे। घर में पानी आता देख ये लोग दौड़ कर पहली मंजिल पर भागे। पर पहली मंजिल भी थोड़ी देर में भरने लगी। अब ये लोग दूसरी मंजिल की छत पर भागे। उनके मकान की दो मंजिलें डूब गईं थीं। घर का सारा सामान जो पहली मंजिल पर सुरक्षित रखने की कोशिश की थी वह भी महफूज नहीं बचा। उनकी आंखों के सामने उनकी कार सड़क पर बहती हुई दिखाई दी। पर वे अपनी कार को बचाने के लिए कुछ कर पाने में अक्षम थे।


अनुराग का पूरा परिवार 72 घंटे तक सैलाब के बीच अपने छत पर फंसा रहा। इस दौरान खाने के लिए कुछ नहीं था। दो नन्हे बच्चे पीहू और ...... भूखे थे। उनके लिए इस सैलाब में दूध और ब्रेड का इंतजाम करना भी मुश्किल था। इस 72 घंटे के दौरान शिवपुरा से निकलने के लिए कोई इंतजाम नहीं हो सका। जब तीन दिनों के बाद एक सेना की नाव आई तो उसने कहा, सिर्फ आपको यहां से निकाल पाएंगे। आपके साथ कोई सामान नहीं जा सकेगा। अनुराग इस नाव से अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ किसी तरह निकल कर हेलीपैड तक पहुंचे। हेलीपैड पर 11 की शाम मेरी उनसे मुलाकात हुई तो पल भर मुलाकात दोस्ती में बदल गई। कई रातों से अनुराग सोए नहीं थे। मैंने उन्हें एक डिस्प्रीन की गोली दी जो शायद मेरे बैग में उनके लिए ही पड़ी थी। खुले आसमान के नीचे एक चादर में बड़ी मुश्किल से हमने 11 सितंबर की रात गुजारी। 

12 सितंबर को उनके दोनों बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। अनुराग उन्हें आर्मी के डाक्टरों के पास दिखाने ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद वे एयर लिफ्टिंग से निकल गए। दिल्ली होते हुए वे अपने ससुराल लखनऊ पहुंच गए। वहां बच्चों का बेहतर ढंग से उपचार हुआ जिसके बाद बच्चे और परिवार स्वस्थ है। पर अनुराग के पूरे परिवार ने जो सैलाब का खौफनाक मंजर देखा है, उसकी तस्वीर उनके जेहन में सालों बनी रहेगी। केनरा बैंक की रेसिंडेंसी रोड शाखा अब खुल गई है। पर अनुराग को अपना घरौंदा सजाने में फिर लंबा वक्त लग जाएगा।



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