Saturday, September 6, 2014

जर्मनी से आईं सेंड्रा और मारेन ((53))

(पहियों पर जिंदगी - 52)

उनकी उम्र 21 से 22 साल के बीच है। अभी उन्होंने स्कूली पढ़ाई खत्म की है। सुब्बराव जी की पिछली जर्मनी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात हुई। वे हिंदुस्तान आने और यहां की संस्कृति को करीब से देखने की इच्छुक थीं। भाई जी ने उन्हें महात्मा गांधी सेवा आश्रम ( जौरा, मुरैना) आने के लिए आमंत्रित किया। सेंड्रा और मारेन 1 अक्तूबर को रेल यात्रा के तैयारी शिविर में आईं। जर्मन उनकी मातृभाषा है। 

अंग्रेजी वे दूसरी भाषा के तौर पर बोलती हैं। शिविर के अनुशासित जीवन में प्रारंभ में उनके सामंजित करने में दिक्कत आई। परंतु धीरे धीरे वे सुबह जल्दी उठने  , व्यायाम करने, युवा गीत में हिस्सा लेने और सफाई जैसी नियमित गतिविधियों में शामिल होने लगीं। सेंड्रा और मारेन दोनों हम उम्र हैं। जर्मनी के सोएट शहर की रहने वाली हैं। सफेद रंग की भूरे बालों वाली सेंड्रा थोड़ी चंचल और शोख है जबकि मारेन अपेतक्षाकृत गंभीर। 


सेंड्रा बताती है कि जर्मनी में इतना अनुशासन नहीं है। वे देर तक सोने की आदि हैं। मैंने जब उनके स्कूल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की स्कूल में सुबह नौ बजे से एक बजे तक महज 4 घंटे कक्षाएं होती हैं। हिंदुस्तान की तरह होमवर्क का बोझ नहीं होता है। हिंदुस्तान को करीब से देखने के लिए सदभावना रेल पर रहना उनके लिए एक बड़ा मौका है। शिविर में हिंदुस्तान के 20 राज्यों से आए युवक युवतियां उन्हें घेरे रहते हैं और उनके बारे में जानना चाहते हैं। धीरे धीरे सेंड्रा और मारेन सबकी दोस्त बन गईं।

जर्मनी के शहरी जीवन में स्लाइस्ड ब्रेड और अन्य प्रकार के फास्ट फूड खाने की आदि थीं। अब कैंप में चावल
, दाल, रोटी, सब्जी और मसालेदार भोजन खाने में उन्हें परेशानी होती थी। वे काफी कम भोजन लेती हैं। साथ में अपने लिए कुछ फास्ट फूड रखती हैं। परंतु पानीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंजाब के अलग अलग शहरों में सुस्वादु भारतीय भोजन करने के बाद उनकी आदतें धीरे धीरे बदल गईं। भारत में उन्हे हर जगह शाकाहारी भोजन मिल रहा था। वे बताती हैं कि जर्मनी में ज्यादातर लोग मांसाहारी हैं। पर कुछ लोग शाकाहारी भी होते हैं।

सेंड्रा और मारेन की रूचि औसत भारतीय युवक युवतियों की दिनचर्या जानने, ग्रामीण भारत भारत की जीवन शैली जानने में ज्यादा रहती है। चौदह डिब्बे वाली इस आसमानी रंग की रेलगाड़ी सफर करना उनके लिए रोमांचकारी अनुभव है। दिल्ली शहर की भीड़भाड़ और प्रदूषण पर भी उनका ध्यान गया।


सेंड्रा की एक तस्वीर जो उसने मुझे डाक से भेजी थी....

पानीपत औऱ कुरुक्षेत्र के आसपास के गांवों में सेंड्रा को जाने का मौका मिला। यहां के गांवों की गलियां और आतिथ्य सत्कार देखकर वे रोमांचित हो रही थीं। हरियाणा में मिली लस्सी उन्होंने बड़े चाव से पी।

सेंड्रा और मारेन कैथोलिक मतावलंबी हैं। वे बताती हैं कि जर्मनी में शादियां 25 से 30 साल की आयु में होती हैं। उन्होंने बताया कि 75 फीसदी शादियां बाद में तलाक में बदल जाती हैं। मारेन बताती हैं जर्मनी में काफी पुरुष और महिलाएं ऐसे हैं जो अविवाहित रह जाते हैं। सेंड्रा और मारेन अभी अविवाहित हैं। वे बताती हैं कि शादी के फैसले उनके यहां युवक युवती खुद लेते हैं। उन्होंने अपनी शादी के बारे में अभी सोचा नहीं।
 


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