Monday, September 1, 2014

बिहार का पहला पड़ाव - छपरा ((47))


( पहियों पर जिंदगी 47)
26 नवंबर 1993  छपरा बिहार में सदभावना रेल यात्रा का पहला पड़ाव है। ट्रेन यहां निर्धारित समय से चार घंटे लेट पहुंच रही है। मैं हाजीपुर से ट्रेन के इंतजार में समय से पहले पहुंच चुका हूं। कुछ सामाजिक संस्थाओं के छात्र भी रेल यात्रा के स्वागत में पहुंच चुके हैं।

रेलयात्रा के मार्ग में आगे स्टेशनों पर स्वागत इंतजाम की व्यवस्था की तसल्ली करने के लिए चार लोगों की टीम है जो एडवांस पार्टी के तौर पर जाती है। इसमें अवकाश प्राप्त शिक्षक केदारनाथ मिश्र प्रमुख हैं। वे गोरखपुर के पास तमकुही गांव के रहने वाले हैं। जिन शहरों में राष्ट्रीय युवा योजना का नेटवर्क है वहां तो अपना नेटवर्क ही स्वागत इंतजाम देखता है जहां नहीं है वहां पर राष्ट्रीय सेवा योजना, नेहरु युवा केंद्र, सर्वोदय जगत, लायंस क्लब, रोटरी क्लब जैसे सामाजिक संगठन और सरकारी महकमे की भी मदद ली जाती है। छपरा में मैंने एडवांस पार्टी के तौर पर संपर्क किया था। यहां नेहरू युवा केंद्र के श्रीवास्तव जी और जय जगत प्रेस से जुड़े पुराने सर्वोदयी लोगों से मिला था। हमने रेल गाड़ी में रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जहां जहां से ट्रेन गुजरने वाली है वहां के जिलाधिकारी और प्रमुख सामाजिक संगठनों के लोगों को रेल यात्रा प्रबंधन की ओर से यात्रा का मार्ग और सहयोग की अपेक्षा वाले खत भिजवा दिए थे।



छपरा में इसका प्रभाव हमें देखने को मिला। बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन यात्रा का स्वागत करने छपरा में बिहार सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे थे। यात्रियों को सुबह के नास्ता स्टेशन पर ही मिला। उत्साह इतना कि यहां दो संस्थाओं की ओर से नास्ता प्रायोजित हो गया था। इसके बाद सदभावना रैली छपरा शहर से होती हुई तत्कालीन जनता दल विधायक उदित राय के आवास पर पहुंची। उनके घर के लॉन में दोपहर की सभा हुई। इस सभा के बाद उदित राय जी की ओर से ही दोपहर का भोजन दिया गया। हमारे राष्ट्रीय युवा योजना के सचिव रणसिंह परमार जी ये देखकर चकित थे कि विधायक उदित राय ने हाथी पाला हुआ है। वे बिहार के बारे में ऐसी दबंग छवि नहीं रखते थे।

अचानक कार्यक्रम में बदलाव हुआ -  मैं यहीं से हाजीपुर वापस लौटने को हुआ क्योंकि कल की तैयारी करनी थी। तभी सुब्बराव जी ने मुझे मंच पर बुलाया। उन्होंने बताया कि रेलवे के निर्देशानुसार ट्रेन हाजीपुर जंक्सन पर नहीं रुकेगी बल्कि सोनपुर में ही रुकेगी। मैं इसके लिए तैयार नहीं था। हाजीपुर से सोनपुर 6 किलोमीटर पहले आता है। बीच में गंडक नदी पर पुल है। पर हाजीपुर जंक्शन पर लाजिस्टक्स नहीं उपलब्ध होने के कारण सदभावना स्पेशल का ठहराव वहां नहीं बन सका।अब मुझे सारे इंतजाम हाजीपुर के बजाय सोनपुर से जोड़कर करने होंगे। मैं परेशान हो गया। 
सोनपुर सारण जिले में आता है, तो हाजीपुर वैशाली जिले में। दो जिलों के बीच सारे इंतजाम। थोड़ी देर पहले सारण के जिलाधिकारी श्री मिश्रा जी भी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के स्वागत में आए थे। मैं वहां से दौड़कर जिलाधिकारी के दफ्तर पहुंचा। अपने नाम की चिट भिजवाई। उन्होंने मुझे तुरंत अंदर बुला लिया। उन्हे मैंने बताया ट्रेन सोनपुर रूकेगी। इसलिए प्रशासन से सुरक्षा संबंधी मदद चाहिए। उन्होंने तुरंत सोनपुर के डीएसपी को फोन करके सारे इंतजाम करा दिए। पर मुझे हाजीपुर से सोनपुर होने पर ठहराव बदलने पर अपने सारे हाजीपुर के कार्यक्रमों में भी जरूरी फेरबदल करना था। मैंने हाजीपुर के जिलाधिकारी उदय प्रताप सिंह जी को जानकारी दी, वे भी सभी जरूरी मदद को तैयार थे।

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