Friday, August 15, 2014

विजयादशमी और संयुक्त राष्ट्र दिवस ((30))

( पहियों पर जिंदगी 30)
24 अक्टूबर 1993  ऐतिहासिक दिन है आज और हमलोग जम्मू में हैं। आज विजयादशमी भी है और संयोग से संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूनाइटेड नेशंस का स्थापना दिवस भी है। संयोग से रेल यात्रा में साथ चल रही पंजाब की एक बहन रिंपल चावला का जन्मदिन है आज। तो सुबह सुबह हमारी साइकिल रैली रेलवे स्टेशन से निकलकर जम्मू विश्वविद्यालय के परिसर में पहुंची। हरे भरे जम्मू विवि के परिसर ने मनमोह लिया। हमारा सुबह का कार्यक्रम यहीं तय है। लेकिन इससे पहले यहां के ओल्ड ब्याएज हास्टल में हमारा सुबह का सुस्वादु नास्ता हुआ। इस दौरान विवि के कई शिक्षकों से बातचीत का मौका मिला। 
नौजवान जोश से लबरेज यश शर्मा जी
जम्मू विश्वविद्यालय में हमारी मुलाकात एक बार फिर यश शर्मा से हुई। ये वही यश शर्मा हैं जिनसे हमारी मुलाकात बंगलोर के आध्यात्मिक युवा शिविर में हुई थी। 65 साल के गौर वर्ण के सुंदर व्यक्तित्व वाले यश शर्मा डोगरी और हिंदी भाषा के कवि हैं। वे जम्मू कश्मीर दूरदर्शन पर हिंदी के समाचार वाचक भी हैं। साथ ही सुकंठ गायक भी। बेंगलुरू शिविर में मुलाकात के समय उन्होंने मुझसे पूछा था- बिहार से आए हो- फणीश्वर नाथ रेणु को पढ़ा है...मैंने बताया हां, उनकी कुछ कहानियां और उपन्यास पढे हैं। तो वे बड़े प्रसन्न हुए।

मुझे पता चला कि यश शर्मा जी को पिछले साल डोगरी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है।  आज हमने जम्मू विश्वविद्यालय में हुए कार्यक्रम में यश शर्मा जी द्वारा ही रचित एकता गीत में उनके साथ सुर मिलाया।



एकता एकता एकता का दीया ,
इस जमीं पर सदा जगमगाता रहे।
आदमी आदमी के लिए
प्यार के गीत...बुनता रहे..गुनगुनाता रहे।

यश शर्मा जी द्वारा रचित ये गीत बड़ा ही प्रेरक है। यश शर्मा की उम्र सुब्बाराव जी से भी थोड़ी ज्यादा है, लेकिन उनकी सक्रियता किसी नौजवान जैसी है।


मिश्रीवाला गांव में 
हमारी सद्भावना साइकिल रैली दौड़ पड़ी है जम्मू श्रीनगर हाईवे पर। सरपट दौड़ती साइकिलें 18 किलोमीटर चलकर रूकीं मिश्रीवाला गांव में। इस गांव में कश्मीर घाटी से विस्थापित कश्मीरी परिवारों का शिविर है। हमलोग इस शिविर में पहुंच गए हैं। कस्तूरबा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट जम्मू शाखा की संचालिका ललिता नागर यहां पर हमारी मेजबान हैं। 

यहां हुए समारोह में मंच पर ललिता नागर, कश्मीर टाइम्स के संपादक वेद भसीन, श्री बलराज जो पत्रकार हैं आदि ने अपनी बातें रखीं। कश्मीरियत के प्रखर प्रवक्ता पत्रकार वेद भसीन का निधन 7 नवंबर 2015 को हो गया। कश्मीरी विस्थापित परिवार यहां 4 सालों से आकर रह रहे हैं। सुब्बराव जी ने यहां पर हिंदी हैं हम नब्बे करोड़... गीत सुनाया।


वेद भसीन, संपादक, कश्मीर टाइम्स 
जम्मू कश्मीर सरकार के सांस्कृतिक सचिव ने अपनी बात रखने के क्रम में हमें बताया कि जिस प्रकार हम भगवान का नाम लेकर बराबर उसे अपने दिल में स्थापित करने की कोशिश करते हैं उसी प्रकार सद्भावना मंत्र का भी बार बार उद्घोष करने से सद्भावना का माहौल स्थापित किया जा सकता है। दोपहर का भोजन ट्र्स्ट की ओर से ही विस्थापितों के बच्चों के लिए चलाए जा रहे स्कूल परिसर में था। इसके बाद का कुछ समय आराम के लिए निर्धारित था। सो लंबा साइकिल चलाकर आए रेल यात्री थोड़ा सुस्ताने लगे।


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