Thursday, August 14, 2014

जम्मू में हुई हमारी सुहानी सुबह... ((29))


(पहियों पर जिंदगी 29)
 ( 23 अक्तूबर 1993 )  ये एक बहुत ही सुहानी सुबह है। हल्की सी धूप प्लेटफार्म पर आ रही है। हमारी  सद्भावना स्पेशल रेल जम्मू रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर खड़ी है। सुबह प्लेटफार्म पर युवा गीत में सभी रेल यात्री बाहर आए। स्नान करने के लिए प्लेटफार्म नंबर एक के रिटायरिंग रूम की तरह जाते समय फुट ओवर ब्रिज पर चढ़ा तो जम्मू शहर का सुंदर नजारा दिखा। एक दिन में ही सब कुछ बदल चुका था। हम एक नए राज्य में थे। हिन्दुस्तान नक्शे में सबसे ऊपर और सबसे उत्तर जम्मू एवं कश्मीर में। हल्की सरदी पड़ रही है। पर मौसम मजेदार है।  



जम्मू रेलवे स्टेशन की बनावट भी काफी सुंदर है। जम्मू शहर तवी नदी के किनारे बसा है इसलिए रेलवे स्टेशन का नाम जम्मू तवी है।

यहां पर यश शर्मा जी और अश्वनी कुमार गुप्ता हमारे स्थानीय आयोजक हैं। नास्ते के बाद रैली के लिए हमारी ट्रेन प्लेटफार्म नंबर तीन से एक पर आई। जम्मू शहर भी कई सेक्टरों में बंटा हुआ है। रैली को लेकर यहां सुरक्षा इंतजाम काफी कड़े हैं।

सदभावना रैली गांधी नगर से होती हुई रघुनाथ मंदिर पहुंची। हमारा दोपहर का भोजन वहीं हुआ। यहां मंदिर जम्मू कश्मीर के महाराजा रहे डाक्टर कर्ण सिंह के परिवार द्वारा निर्मित है। खाने के पश्चात थोड़ा आराम का समय था। मंदिर में आराम के क्षण में वीना और गुरप्रीत साथ थीं। मंदिर के मंडप में हाल में एक शादी संपन्न हुई थी। वीना लड़का बनी और गुरप्रीत लड़की। वे सात फेरे लेने लगीं मैं पुजारी बनकर मंत्र पढ़ने लगा। इस तरह हो गई शादी। अच्छा मजाक बन गया। झांसी से आई दो बहने विनीत और उस्मी उनियाल लौट गई हैं। विनीत कहती थी मैं तुम्हारी शादी अपने पड़ोस वाली लड़की से झांसी में कराऊंगी। इस रिश्ते से तुम मेरे जीजा हुई। और वह मुझे जीजा जी कहकर चिढाती थी। ट्रेन इस तरह के रिश्ते बाद में याद आते हैं।

जम्मू शहर के बीचों बीच बहती तवी नदी।  इसका रात का नजारा शानदार होता है। 

हमारी रैली का दूसरा चरण जम्मू की सड़कों पर आरंभ हुआ इसे हरी झंडी दिखाई कश्मीर टाइम्स के संपादक श्री वेद भसीन ने। रैली का मार्ग चढाई का है। सड़के पहाड़ों की ओर चढ़ती हुई हम लोग जम्मू शहर के परेड ग्राउंड पहुंचे।

रास्ते में हमें बिस्कुट के पैकेट मिले। शहर के मध्य तवी नदी का पुल आया। तवी नदी के पुल से जम्मू शहर का विस्तार बड़ा सुंदर दिखाई देता है। खास तौर पर रात को तो रंग बिरंगी रोशनी में ऐसा लगता है मानो सारा शहर दिवाली मना रहा हो। परेड ग्राउंड में सर्वधर्म प्रार्थना के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसका मंच संचालन मैंने किया। दिन में कई स्कूल में जम्मू के स्थानीय बच्चों से मुलाकात हुई। वे विवेकानंद और सद्भावना के विचारों के बारे में जानने को उत्सुक हैं।



जम्मू शहर में सदभावना रैली का  प्रभाव काफी अच्छा है। लोग हमें कौतूहल से देख रहे हैं और खुश हो रहे हैं। जम्मू शहर में पिछले दिनों ही एक बम धमाका हुआ था। ये शहर आज भी आतंकवाद के साये में जीता हुआ लगता है। ऐसे में सद्भावना रैली देखकर स्थानीय लोग उत्साहित हैं।



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