Monday, September 22, 2014

जब श्रीनगर शहर की मोबाइल सेवाएं हो गईं बंद ((10))

चिनार बाग में सुबह टहलने निकले थे....
( जन्नत में जल प्रलय – 10 )

रविवार सात सितंबर सुबह के छह बजे थे। मेरी नींद खुली। अनादि भी जग गए। माधवी अलसाई हुई थीं। हमने और अनादि ने सुबह की सैर पर जाने को तय किया। जैसा की हम हर शहर में करते हैं। होटल से बाहर निकलने पर सामने चिनार बाग था। बाग में हरियाली के बीच कुछ इलाकों में थोड़ा थोड़ा पानी आ गया था। ऐसा डल झील के जल स्तर में बढ़ोत्तरी के कारण हुआ था। चिनार बाग के प्रवेश द्वार पर बोर्ड लगा था प्रवेश टिकट 10 रुपये। पर काउंटर पर कोई नहीं था। लंबे लंबे चिनार के पेड़ों के कारण इस बाग का नाम चिनार बाग है। 

श्रीनगर स्थित बाबा धर्मदास मंदिर, जहां भारी सुरक्षा थी। 
बाग के किनारे किनारे बने डल गेट चैनल में कई हाउस बोट लगे हैं। पर इन हाउस में वीरानगी है। बाग में बैठने के लिए कुछ बेंच बनी हैं। बच्चों के लिए कुछ झूले भी बने हैं। आनदि बाग में चहल कदमी करते रहे। हमने खुशनुमा माहौल में बाग में कई तस्वीरें खिंचवाई। यहां एक सज्जन मिले जो कश्मीर क सीमांत जिले के रहने वाले हैं। वे लकड़ियों की खरीददारी का काम करते हैं। इसलिए वे सूखे पेड़ की तलाश कर रहे थे। पर शायद उन्हें कोई पेड़ नजर नहीं आया।

बाग से निकल कर हम लोग आगे बढ़े। सीआरपीएफ के 21 बटालियन का मुख्यालय आया। यहां सड़क पर बैरियर लगे हैं। आते जाते वाहनों की चेकिंग होती है। पास में होटल ममता की विशाल बिल्डिंग है। जम्मू कश्मीर हैंडीक्राफ्ट इंपोरियम का शोरूम है।

 आगे विश्वंभर नगर चौक आया। यहां पर बाबा धर्मदास ट्रस्ट का बोर्ड और एक मंदिर नजर आया। मंदिर देखकर हमने वहां जाकर दर्शन करने की सोची। मंदिर के छोटे प्रवेश द्वार पर सेना का कड़ा पहरा था। संगीनों के साए में भगवान। पता चला श्रीनगर के सभी मंदिरों के आगे कड़ी सुरक्षा है। प्रवेश करने वालों की भी जांच पड़ताल की जाती है। हमलोग मंदिर के अंदर पहुंचे। वहां कुछ भोजपुरी बोलने वाले लोग मिले। उन्होंने हमसे मुलाकात कर खुशी जताई। भगवान के सामने मत्था टेकने के बाद कुछ देर हमलोग वहां बैठे रहे। पता चला पुजारी जी एक घंटे बाद आएंगे तब प्रसाद मिलेगा। हमने वापस लौटने की सोची। 

खोनाखोन रोड पर रोटियों की एक दुकान 
बाहर निकलने पर कश्मीरी रोटियों की दुकान मिली। पांच रुपये की एक खमीरी रोटी। कश्मीर का सुबह का नास्ता। इन रेडीमेड रोटियों के साथ चाय या कॉफी पीकर लोग चल पड़ते हैं काम पर। एक नौजवान सज्जन रोटी खरीदकर जा रहे थे। हमने उनसे जानकारी ली रोटियों के बारे में। पता चला हमारे ही होटल में ठहरे हैं नाम है आफताब वानी। बाद में वे हमारे पक्के दोस्त बन गए। संकट के साथी। उनके साथ एक दर्द का रिश्ता बन गया। जो शायद लंबे समय तक चले।

खैर चिनार बाग में हमने मोबाइल में फेसबुक ऑन किया और तीन तस्वीरें अपलोड की। एक श्रीनगर के आसमान में इंद्रधनुष की। अनादि ने जीवन में पहली बार इंद्रधनुष देखा था। एक माधवी और वंश की दुआ करते हुए, तीसरी तस्वीर मेरी थी बाग में बैठे हुए। इसके आधे घंटे बाद पूरे श्रीनगर शहर की मोबाइल सेवाएं बंद हो गईं और हम पूरी दुनिया से कट चुके थे।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य   ( FLOOD, KASHMIR )

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