Monday, September 15, 2014

मुनीर भाई...तुम कहां हो... ((03 ))

( जन्नत में जल प्रलय -3)
झेलम दरिया पर बना बादशाह पुल। 
हमारी स्विफ्ट डिजायर टैक्सी श्रीनगर शहर के रास्ते पर सरपट आगे बढ़ रही थी। पर हमारे ड्राइवर जहूर भाई ने कहा मुख्य मार्ग बंद है आपको दूसरे रास्ते से डल गेट लेकर जा रहे हैं। हमने पहले से ही जानकारी ले ली थी एयरपोर्ट से प्री पेड टैक्सी लेकर श्रीनगर शहर में कहीं भी जाना अच्छा रहेगा। पर आज प्रीपेड काउंटर पर डल गेट के लिए 450 रुपये की जगह मुझसे 700 रुपये मांगे गए। जानकारी मिली थी मुख्य पानी भरा होने के कारण रास्ता बंद है आपको लंबे रास्ते ले जाया जाएगा।

थोड़ी देर बाद टैक्सी रावलपुरा की गलियों में थी। कहीं सड़कों पर थोड़ा पानी था। 
कालोनी में कहीं मकान तो कहीं धान के खेत नजर आ रहे थे। ऐसा लग रहा था कि ये तकरीबन 10 लाख आबादी वाले शहर श्रीनगर शहर का बाहरी इलाका है। थोडी देर में हम सनत नगर चौक पर थे। वहां से बारामूला हाईवे गुजर रहा था। हम बटमालू बाइपास पहुंचे। यहां मोटरपार्ट्स और हार्डवेयर का बड़ा बाजार नजर आ रहा था पर ज्यादातर दुकानों के शटर गिरे हुए थे। टैक्सी वाले जहूर भाई ने अपना कार्ड दिया। उसमें तीन मोबाइल नंबर थे। वे पूरी टूर एंड ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीनगर से बाहर गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम जाने के रास्ते बंद हैं। मौसम साफ होने पर कल परसों खुल भी सकते हैं। पर आप शहर में डल झील, शालीमार बाग, निशात बाग, शंकराचार्य मंदिर आदि तो घूम ही सकते हैं। टैक्सी की जरूरत हो तो मुझे फोन कर लेना।

लाल चौक स्थित होटल ताज जो एक दिन बाद डूब गया।
लाल चौक से पहले झेलम दरिया पर पुल आया। झेलम की चौड़ाई महज 30 मीटर थी। ये श्रीनगर शहर में किसी नहर जैसी लग रही थी। दरिया के दोनों तरफ ऊंचे मकान बने हुए थे। रास्ते में जहूर भाई ने दो फ्लड चैनल ( नहरें ) दिखाई। ये झेलम के पानी को वितरित करने के लिए बनाए गए हैं।

हम शहर के ऐतिहासिक लाल चौक से गुजर रहे थे। ये श्रीनगर शहर का बिजनेस हब है। हमने श्रीनगर की यात्रा प्लान करने से पहले पर लाल चौक और राजबाग के दो होटलों से भी बुकिंग के लिए बात की थी। पर मेरे हिंदुस्तान टाइम्स के साथी जीवन प्रकाश शर्मा जो दो साल श्रीनगर में गुजार चुके थे, उन्होंने नेक सलाह दी थी। लाल चौक में मत ठहरना। संवेदनशील जगह है। कई बार आतंकी और सेना के आपरेशन में चौक बंद हो जाता है सैलानी फंस जाते हैं। उनकी सलाह पर ही मैंने फिर डल गेट इलाके में होटल बुक किया था। ये बाद में मेरे लिए बड़ा बुद्धिमता भरा फैसला साबित हुआ।

सैलाब के बाद पानी में डूबा होटल ताज ( फोटो - ट्रिब्यून)

कहां हो मुनीर भाई...

आनलाइन बुकिंग वेबसाइट स्टेजिला डाट काम से हमने श्रीनगर का होटल मुनीर बुक किया था डल गेट इलाके में कोनाखान रोड पर। इसके मालिक मुनीर अहमद से हमारी बात भी हुई थी। पर टैक्सी वाले ने जब इन नंबरों पर बात की तो उन्होंने हमें होटल मुनीर न बुलाकर डलगेट इलाके में ही होटल रिट्ज बुला लिया। एकबारगी मुझे कुछ गड़बड़ लगा, पर हमें वहां मुनीर अहमद मिले, जिन्होंने स्टेजिला डाट काम से मेरी बुकिंग को स्वीकार करते हुए होटल रिट्ज के तीसरी मंजिल के एक बेहतरीन कमरे में ठहराया। पर बाद में मेरी मुनीर अहमद से दुबारा कभी मुलाकात नहीं हो सकी। होटल के दूसरे कर्मचारियों से  पता चला कि बाढ़ में उनका घर डूब गया है। वे अपने परिवार को महफूज जगह पर पहुंचाने में व्यस्त रहे। इसलिए अपना होटल बंद कर मुझे अपने दोस्त के होटल में शिफ्ट किया था। बाद में दिल्ली लौटने पर कई बार मैं मुनीर अहमद को फोन लगाता रहा। पर उनका फोन कभी नहीं मिला। नहीं मालूम मुनीर भाई किस हाल में हैं...

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

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